राजस्थान में गिग वर्कर कानून लागू नहीं होने से उन की सामाजिक सुरक्षा अधर में–निखिल डे

० आशा पटेल ० 
जयपुर । सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान द्वारा राजस्थान में गिग वर्कर के अधिकारों की चिंताजनक स्थिति पर चर्चा की गई। यह चर्चा राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 के एक साल पूरा होने पर भी सरकार ने नियम बनाकर क़ानून लागू नहीं किया इस पर रखी गई। तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में जो सड़क पर सबसे ज्यादा दिखते हैं, वे श्रम कानूनों में अदृश्य हैं। न तो कंपनियां और न ही सरकार गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों को लेकर गंभीर हैं।

दअरसल गत दिनों सांगानेर निवासी जोमैटो वर्कर रोहित रमानी की मौत ने राजस्थान में गिग वर्कर्स की दर्दनाक स्थिति को उजागर कर दिया है। रोहित के चाचा ने बताया कि वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और अब उसके बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने वाला कोई नहीं बचा है। 
मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक, निखिल डे ने कहा, "राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 को पारित हुए पूरा एक वर्ष हो गया है, लेकिन सरकार ने इसे लागू करने के लिए नियम नहीं बनाए हैं।" निखिल डे ने "रेटिंग नहीं, हक चाहिए" का नारा लगाते हुए कहा की जब तक सरकार क़ानून लागू कर सामाजिक सुरक्षा नहीं देगी तब तक गिग श्रमिकों को गरिमापूर्ण ज़िंदगी जीने का हक़ नही मिलेगा।

गंगानगर से आए 33 साल के असगर खान ने बताया कि उन का एक्सीडेंट मार्च, 2024 को स्विगी के लिए डिलीवरी करते हुए हुआ। उनके घुटने में दो जगह फ्रेक्चर हुआ जिस वजह से डॉक्टर ने उनको 3 महीने आराम करने के लिए कहा। कंपनी ने बीमा के पैसे से दवाई, इलाज और बेड रेस्ट समय में उनको घर चलाने के लिए भुगतान की बात कही लेकिन टीम लिडर से मीटिंग के कई चक्कर लगाने के बावजुद उनको कोई मुआवजा नहीं मिला। “कम्पनी की सारी पॉलिसी कागजो में ही है और गिग वर्कर को कुछ मुआवजा नही मिल रहा है।”
 गंगानगर से आए स्विगी वर्कर अजय योगी ने भी अपना कष्ट बयां किया।

कंपनियाँ अक्सर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत वर्कर्स के आईडी को ब्लॉक कर देती हैं और ऐसे में वर्कर्स के पास अपना पक्ष रखने के लिए कोई मंच नहीं है। कई वर्कर्स ने टीम लीडर और ग्राहकों से मौखिक उत्पीड़न का सामना किया है, लेकिन शिकायतों के निवारण के लिए कोई मंच उपलब्ध नहीं हुआ। इन वर्कर्स को आयुष्मान का भी लाभ नहीं मिलता ना ही कोई कम्पनी की तरफ से बीमा होता है।
भरतपुर से आए जोमैटो डिलीवरी वर्कर पुष्पेंद्र ने कहा कि गिग वर्कर्स की श्रम की गरिमा का कोई सम्मान नहीं है और मौखिक उत्पीड़न बहुत आम बात है।

धौलपुर और भीलवाड़ा के गिग वर्कर्स ने राजस्थान संपर्क पोर्टल पर पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के तहत ₹5,000 का लाभ पाने के लिए शिकायतें दर्ज की थीं। हालांकि, उनकी शिकायतों को श्रम विभाग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 के तहत कोई सरकारी आदेश जारी नहीं किया गया है। इस सफ़र से जुड़े पारस बंजारा ने बताया कि 2024-25 के वित्तीय वर्ष में सरकार ने ₹250 करोड़ की घोषणा की थी, लेकिन कोई योजना या कार्यक्रम लागू नहीं हुआ। इस कारण गिग वर्कर्स का सरकार की घोषणाओं से विश्वास उठने लगा है।

संयुक्त बयान में सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान, मजदूर किसान शक्ति संगठन, और सोशल अकाउंटेबिलिटी फोरम फॉर एक्शन एंड रिसर्च ने सरकार से राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 को तुरंत नियम बनाकर क़ानून लागू करने की अपील की। इस अभियान की निम्न माँगे है-1,राजस्थान प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार (पंजीकरण एवं कल्याण ) अधिनियम, 2023 नियम को तुरंत क़ानून लागू करावे.

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