उत्कर्ष उड़ीसा-मेक इन उड़ीसा कॉन्क्लेव में वेदांता ने किया एमओयू साईन

० आशा पटेल ० 
भुवनेश्वर | प्राकृतिक संसाधनों एवं टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर तथा दो दशकों से उड़ीसा की प्रगति में प्रतिबद्ध साझेदार वेदांता लि ने उत्कर्ष उड़ीसा के उड़ीसा सरकार के साथ रु 1 लाख करोड़ के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। उत्कर्ष उड़ीसा, भुवनेश्वर में आयोजित किया जा रहा, राज्य का विश्वस्तरीय निवेश सम्मेलन है। उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य राज्य में विश्वस्तरीय एलुमिनियम उत्पादन सुविधाओं की स्थापना के द्वारा ओद्यौगिक विकास को गति प्रदान करना तथा राज्य में स्थायी विकास को बढ़ावा देना है।
इस साझेदारी के तहत 3 मिलियन टन सालाना एलुमिनियम प्लांट और एलुमिनियम पार्क का विकास शामिल है, जो एलुमिनियम उत्पादों के डाउनस्ट्रीम उत्पादकों के लिए मुख्य हब के रूप में उभरेगा। आपसी सहयोग से घोषित की गई ये पहलें न सिर्फ ग्लोबल एलुमिनियम वैल्यू चेन में उड़ीसा की भुमिका को मजबूत बनाएगीं, बल्कि रोज़गार के 2 लाख अवसर भी उत्पन्न करेंगी तथा ऑटोमोटिव, पावर, कंस्ट्रक्शन एवं लॉजिस्टिक्स में एमएसएमई के विकास को भी बढ़ावा देंगी।
इस अवसर पर अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांता लिमिटेड ने कहा, ‘‘उड़ीसा हमेशा से वेदांता के विकास की कहानी का अभिन्न हिस्सा रहा है और इसके संसाधनों ने भारत के विकास में अद्वितीय भूमिका निभाई है। यह समझौता ज्ञापन राज्य में बडे़ पैमाने पर ओद्यौगिकीकरण और सामाजिक आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगा, यह प्रगति के लिए हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। हमने उड़ीसा सरकार के साथ दशकों पुरानी साझेदारी को और मजबूत बना लिया है और स्थायी विकास एवं कौशल विकास के माध्यम से राज्य में लाखों लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया है।’

वेदांता के मौजूदा निवेश ने झरसागुड़ा में दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन एलुमिनियम स्मेल्टर तथा लांजीगढ़ में विश्वस्तरीय एलुमिना रिफाइनरी के निर्माण में योगदान दिया। वेदांता के इन्हीं प्रयासों के चलते उड़ीसा भारत के एलुमिनियम हब के रूप में विकसित हुआ है। कंपनी भदरक में फाकोर का संचालन भी करती है, जो देश में फेरो क्रोम के प्रमुख उत्पादकों में से एक है। राज्य में कंपनी का विकसित होता खान पोर्टफोलियो है। कंपनी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं,

 कौशल विकास केन्द्रों और नंद घरों (आधुनिक आंगनवाड़ी केन्द्रों) के माध्यम से जो आस-पास के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक प्रगति को बढ़ावा दे रही है, तथा उड़ीसा के समुदायों में समावेशी विकास को सुनिश्चित करती है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में एलुमिनियम की मांग 2030 तक दोगुना हो जाएगी, ऐसे में यह समझौता ज्ञापन उड़ीसा को ओद्यौगिक एवं आर्थिक पावरहाउस के रूप में स्थापित करेगा तथा ग्लोबल मैनुफैक्चरिंग लीडर के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत बनाएगा।

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