विधायक गोपाल शर्मा के अशोभनीय बयान से प्रदेश की जनता आहत हुई : वंदना माथुर
जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री स्व.शिवचरण माथुर की पुत्री वंदना माथुर ने प्रेसवार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के ऊपर भाजपा विधायक गोपाल शर्मा द्वारा लगाए गए आरोप को बेबुनियादी बताते हुए इसका कड़े शब्दों में निंदा करी है। श्रीमती वंदना माथुर ने कहा कि शिवचरण माथुर ने अपनी अंतिम सांस तक देश व प्रदेश की उच्च मूल्यों एवं ईमानदारी से सेवा की है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर व उसके बाद भी चाहे वे भीलवाड़ा म्युनिसिपैलिटी के प्रथम चेयरमैन हों, प्रथम जिला प्रमुख हों, या विधानसभा अथवा लोकसभा के सदस्य के रूप में उन्हें देश और प्रदेश की जनता ने जो भी जिम्मेदारी दी, उसे उन्होंने पूरी संवेदनशीलता और ईमानदारी से पूरा किया।
शिवचरण माथुर ने सदैव गांधीवादी मूल्यों और जनहित को अपने से आगे रखकर काम किया है और अपने जीवनकाल में उन्होंने इन मूल्यों और सिद्धान्तों से कभी कोई समझौता नहीं किया। वे संवेदनशील और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। दो विधानसभा सदस्यों पर एनकाउंटर का आरोप लगाना अत्यन्त दुःखद है माथुर ने आगे कहा कि विधानसभा का सदस्य एक जिम्मेदार व्यक्ति होता है, उन्हें सोचना चाहिए था कि 30-35 साल पुरानी बात का आज क्या औचित्य है। इन आरोपों के खंडन के लिए न तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर माथुर और न ही पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत आज इस दुनिया में हैं।
माथुर ने कहा कि भाजपा विधायक को शायद यह ज्ञात नहीं होगा कि मेरे परिवार की चार पीढ़ियों ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक पूरी निष्ठा और मूल्यों पर काम किया है, चाहे वे राजनीतिक हों अथवा सामाजिक उत्थान के हों। भाजपा के विधानसभा सदस्य द्वारा दिया गया यह वक्तव्य हमारे परिवार के महान पूर्वजों द्वारा किए गए त्याग का अपमान है। हम इसका विरोध करते हैं और जो भी व्यक्ति ऐसे महान व्यक्ति पर इस तरह बेबुनियाद आक्षेप लगाता है यह उनकी निम्न मानसिकता और वैचारिक अक्षमता को ही दर्शाता है। जिन भी सदस्यों ने यह आरोप लगाया है उनके द्वारा की गई इस अशोभनीय टिप्पणी से प्रदेश की जनता आहत हुई है। सदन के पटल पर प्रदेश की जनता से उन्हें माफी माँगनी चाहिए।
राज्य के विभिन्न विभागों में मंत्री व दो बार मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी उनकी दूरदर्शिता, प्रशासनिक एवं राजनीतिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। असम के राज्यपाल पद का दायित्व भी उन्हें सौंपा गया।
वंदना माथुर ने आगे कहा कि 7 फरवरी को भाजपा के विधानसभा सदस्य ने, जो पहली बार विधानसभा में चुनकर आए हैं, उन्होंने माथुर साहब पर अशोभनीय टिप्पणी की है। ऐसा प्रतीत होता है कि महोदय को उस समय की राजनीति, जो मूल्यों और सिद्धान्तों पर आधारित थी, इसका उन्हें अनुभव नहीं है। एक व्यक्ति जो इस संसार से 15 साल पहले जा चुका है, उस पर ऐसी अमर्यादित टिप्पणी करने की क्या आवश्यकता थी।
वंदना माथुर ने आगे कहा कि 7 फरवरी को भाजपा के विधानसभा सदस्य ने, जो पहली बार विधानसभा में चुनकर आए हैं, उन्होंने माथुर साहब पर अशोभनीय टिप्पणी की है। ऐसा प्रतीत होता है कि महोदय को उस समय की राजनीति, जो मूल्यों और सिद्धान्तों पर आधारित थी, इसका उन्हें अनुभव नहीं है। एक व्यक्ति जो इस संसार से 15 साल पहले जा चुका है, उस पर ऐसी अमर्यादित टिप्पणी करने की क्या आवश्यकता थी।
शिवचरण माथुर ने सदैव गांधीवादी मूल्यों और जनहित को अपने से आगे रखकर काम किया है और अपने जीवनकाल में उन्होंने इन मूल्यों और सिद्धान्तों से कभी कोई समझौता नहीं किया। वे संवेदनशील और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। दो विधानसभा सदस्यों पर एनकाउंटर का आरोप लगाना अत्यन्त दुःखद है माथुर ने आगे कहा कि विधानसभा का सदस्य एक जिम्मेदार व्यक्ति होता है, उन्हें सोचना चाहिए था कि 30-35 साल पुरानी बात का आज क्या औचित्य है। इन आरोपों के खंडन के लिए न तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर माथुर और न ही पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत आज इस दुनिया में हैं।
माथुर ने कहा कि भाजपा विधायक को शायद यह ज्ञात नहीं होगा कि मेरे परिवार की चार पीढ़ियों ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक पूरी निष्ठा और मूल्यों पर काम किया है, चाहे वे राजनीतिक हों अथवा सामाजिक उत्थान के हों। भाजपा के विधानसभा सदस्य द्वारा दिया गया यह वक्तव्य हमारे परिवार के महान पूर्वजों द्वारा किए गए त्याग का अपमान है। हम इसका विरोध करते हैं और जो भी व्यक्ति ऐसे महान व्यक्ति पर इस तरह बेबुनियाद आक्षेप लगाता है यह उनकी निम्न मानसिकता और वैचारिक अक्षमता को ही दर्शाता है। जिन भी सदस्यों ने यह आरोप लगाया है उनके द्वारा की गई इस अशोभनीय टिप्पणी से प्रदेश की जनता आहत हुई है। सदन के पटल पर प्रदेश की जनता से उन्हें माफी माँगनी चाहिए।

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