डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम नागरिकों के अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला : गौरव गोगोई

० आनंद चौधरी ० 
नई दिल्ली,इंडिया गठबंधन ने डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम की धारा 44(3) को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि धारा 44(3) से सूचना के अधिकार कानून की मूल भावना को नुकसान पहुंचा है और नागरिकों के सूचना के अधिकार पर हमला हुआ है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा संसद में बिना समुचित चर्चा के पारित किए गए डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन बिल के जरिए छल से सूचना के अधिकार को नागरिकों से छीना गया। 
डेटा संरक्षण अधिनियम की धारा 44(3) आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) को संशोधित कर रही है। उन्होंने इसे नागरिकों के अधिकारों एवं प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया और इसे निरस्त किए जाने की मांग की। गौरव गोगोई के साथ शिवसेना (यूबीटी) से प्रियंका चतुर्वेदी, सीपीआई (एम) से जॉन ब्रिटास, डीएमके से पुदुकोट्टई एमएम अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान और राजद से प्रो. नवल किशोर ने भी संबोधित किया।
गौरव गोगोई ने बताया कि वर्ष 2023 में संसद में मणिपुर मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बिना समुचित चर्चा के सरकार ने इस बिल को पारित कर दिया। तब से इसके विभिन्न प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले इस बिल पर संयुक्त संसदीय समिति का गठन हुआ था, जिसने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। लेकिन सरकार ने अंतिम क्षण में बिल में ऐसे संशोधन किए, जो मूल रिपोर्ट की भावना के खिलाफ थे। गौरव गोगोई ने कहा कि इस अधिनियम ने आरटीआई एक्ट की धज्जियां उड़ा दी हैं। 
आरटीआई अधिनियम में यह प्रावधान था कि यदि कोई जानकारी सार्वजनिक हित में हो, तो भले ही वह व्यक्तिगत जानकारी हो, उसे प्रदान करना अनिवार्य होगा। लेकिन डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम की धारा 44(3) यह कहती है कि ऐसी कोई भी व्यक्तिगत जानकारी अब साझा नहीं की जाएगी, चाहे वह सार्वजनिक हित में ही क्यों न हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इस बदलाव के कारण नागरिक अब यह जानकारी नहीं प्राप्त कर सकेंगे कि जो पुल टूट रहा है, उसके निर्माण का ठेका किस ठेकेदार को दिया गया, क्या एक ही ठेकेदार को सभी पुलों का ठेका मिला हुआ है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस अधिनियम से जुड़ी चिंताओं को लेकर कई आरटीआई कार्यकर्ताओं, पत्रकारों व नागरिक समाज के लोगों ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और ‘इंडिया’ गठबंधन के कई नेताओं से मुलाकात की थी, जिसके बाद निर्णय लिया कि सभी मिलकर सामूहिक याचिका इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को देंगे। एक साझा याचिका तैयार की गई है, जिस पर करीब 120-130 विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर हैं। इस याचिका को अश्विनी वैष्णव को सौंपा जाएगा।

  कांग्रेस नेता ने बताया कि इस याचिका में केंद्र सरकार से अपील की गई है कि डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम से धारा 44(3) को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि आरटीआई कानून की आत्मा को बचाया जा सके और लोकतंत्र में नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित रखा जा सके।

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