संयुक्त अभिभावक संघ के तत्वाधान में अभिभावकों ने किया "हल्ला बोल" प्रदर्शन

o आशा पटेल o 
जयपुर। राजधानी में एक बार फिर अभिभावकों की एकजुटता देखने को मिली, इस बार मामला राइट टू एजुकेशन के अंतर्गत गरीब व जरूरतमंद विद्यार्थियों की जरूरी शिक्षा को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा जारी सभी गाइडलाइन को अपनाने के बावजूद दाखिला नहीं होना था, जिसको लेकर पिछले तीन महीनों से अभिभावकों में आक्रोश था, ना स्कूल संचालक ठीक से कोई जवाब दे रहे थे ना शिक्षा विभाग कोई जवाब दे रहा था,
जब जवाब देने की बारी आई तो राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर अभिभावकों को बीच राह में छोड़ दिया और बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया, आलम यह रहा कि बच्चे नए सत्र के प्रारंभ होने के 23 दिन बीत जाने के बावजूद आजतक पढ़ाई का इंतजार करने को मजबूर हो रहे है किंतु ना राज्य सरकार कोई सुध ले रही है ना शिक्षा विभाग कोई सुध ले रहा है। अभिभावक ठोकरों पर ठोकरें खा रहे है किंतु जिम्मेदार लोग बंद एसी कमरों में बैठकर जनता द्वारा दिए जा रहे टैक्स की मलाई डकार रहे है।
संयुक्त अभिभावक संघ के आह्वान पर RTE से पीड़ित, प्रभावित और प्रताड़ित अभिभावक बड़ी संख्या में जुटे और राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अपना आक्रोश दिखाया, इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में वह बच्चे भी शामिल हुए जिनका आरटीई की प्रक्रिया में शिक्षा विभाग द्वारा लॉटरी माध्यम से चयन हुआ था, जिनकी पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।

 प्रदर्शन में राजधानी जयपुर के 50 से अधिक स्कूलों के अभिभावक शामिल हुए साथ ही प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री संजय गोयल, प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू, रवि खंडेलवाल, एडवोकेट विकास चंदोलिया, पंडित लोकेश शर्मा, विशाल मुदगल, रितिका शर्मा, अनीता पंजवानी, पूनम, काव्या, रवि प्रकाश, सुरेश कुमार, हिमांशु मेहरा, विजय सोनी सहित अभिभावक और बड़ी संख्या में बालक बालिकाएं एकत्रित हुए पढ़ाई शुरू करवाने की गुहार लगाई।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि 14 जुलाई को अभिभावकों की मीटिंग रखी गई थी, जिसमें  शिक्षा संकुल पर "हल्ला बोल " प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया था। इस ऐलान के बाद 17 जुलाई को शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी कर आरटीई प्रक्रिया में चयनित विद्यार्थियों के दाखिले निजी स्कूलों सुनिश्चित करवाने एवं जो निजी स्कूल दाखिला नहीं दे उन स्कूलों पर कार्यवाही करने के आदेश दिए थे।

 यही आदेश 18 जुलाई को शिक्षा अधिकारी ने सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को जारी कर दिए, फिर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने भी उसी दिन आदेश जारी कर दिए। नोटिस जारी होने के 7 दिवस के अंदर भी ना विद्यार्थियों को दाखिला मिला ना निजी स्कूलों पर कार्यवाही हुई। जिसके चलते बुधवार को सभी अभिभावकों का आक्रोश शिक्षा संकुल के मुख्य द्वार पर फूट पड़ा और मजबूर होकर " हल्ला बोल " प्रदर्शन कर अंधे, गूंगे, बहरे बने शिक्षा विभाग को अभिभावकों की पीड़ित आवाज सुनाई । 

 इस दौरान संयुक्त अभिभावक संघ के छह सदस्यों का एक डेलिगेशन शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन देने जिला शिक्षा अधिकारी के पास गए किंतु विभाग की मीटिंग में व्यस्त होने के चलते उनकी जगह विभाग के आनंदीलाल मीणा को ज्ञापन की प्रति दी गई। 7 दिन में दाखिले नहीं हुए तो फिर उतरेंगे सड़कों पर, शांति पूर्ण किया था प्रदर्शन किंतु अगली बार उग्र होगा।

प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि संयुक अभिभावक संघ शिक्षा के सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है इसलिए शांतिपूर्ण तरीके से हल्ला बोल प्रदर्शन किया, शिक्षा मंत्री के नाम दिए ज्ञापन में स्पष्ट कहा है कि अगले सात दिनों में अभिभावकों को न्याय नहीं मिला और मासूम बच्चों की पढ़ाई शुरू नहीं हुई तो अगली बार जो प्रदर्शन होगा वह उग्र होगा। उग्र भी इसलिए होगा क्योंकि शिक्षा विभाग आंख, कान बंद कर निजी स्कूलों के इशारों पर काम कर गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

प्रदेश महामंत्री संजय गोयल ने कहा कि 27 जुलाई को शिक्षा संकुल के मुख्य द्वार की पार्किंग स्थल पर अभिभावकों की पुनः मीटिंग करने का निर्णय लिया गया है, इस बैठक में सभी अभिभावकों से विचार विमर्श कर आगे की रूप रेखा बनाई जाएगी।

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