परिवर्तन केवल एक थीम न रहे, इसे एक वैश्विक आंदोलन बनने दें : भूपेंद्र यादव

By : YOGESH BHATT♦️ Correspondent,NEW DELHI.
नई दिल्ली : द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के वार्षिक मंच, विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) 2026 के रजत जयंती संस्करण का ताज पैलेस में शुभारंभ हुआ। यह आयोजन जलवायु और विकास से जुड़े परिवर्तनकारी कार्यों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया भर के नेताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है।

“परिवर्तन | ट्रांसफॉर्मेशन्स: सतत विकास के लिए दृष्टि, स्वर और मूल्य” की व्यापक थीम के अंतर्गत आयोजित WSDS (WSDS) का यह 25वां संस्करण, शिखर सम्मेलन की विरासत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह 'ग्लोबल साउथ' (वैश्विक दक्षिण) में आधारित सतत विकास पर स्वतंत्र रूप से आयोजित होने वाला दुनिया का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय मंच है।

 टेरी के अध्यक्ष नितिन देसाई ने कहा, “आज दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। हमारे सामने चुनौती जागरूकता की नहीं, बल्कि कार्रवाई की है। विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन का पूरा सफर सिर्फ जागरूकता की बातें करने से हटकर अब इस बात की बेहतर समझ की ओर बढ़ा है कि स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए वास्तव में क्या किया जाना चाहिए। हमारे सामने सबसे गंभीर समस्या जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की है।

टेरी की महानिदेशक, डॉ. विभा धवन ने इस बात पर जोर दिया, “पिछले 25 संस्करणों के दौरान, WSDS वैश्विक दक्षिण के लिए जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर विमर्श को दिशा देने वाला एकमात्र स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है। हम चर्चाएं तो बहुत कर चुके हैं, लेकिन आज हमें भारत और वैश्विक, दोनों स्तरों पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

विकसित देशों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे तेजी से आगे बढ़ें, सतत जीवनशैली अपनाएं और बड़े पैमाने पर वित्त व तकनीक उपलब्ध कराएं। मुझे उम्मीद है कि यह सम्मेलन संकल्पों को मजबूत करेगा, सहयोग को गहरा करेगा और हमारे ग्रह के लिए एक सतत भविष्य सुनिश्चित करेगा। 

 टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा ने कहा, “यह कार्रवाई का समय है। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम जलवायु परिवर्तन की भाषा का लोकतंत्रीकरण करें। इसे केवल सम्मेलनों, बैठक कक्षों या बोर्डरूम की चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आम जनमानस तक पहुँचना होगा। लोगों को यह समझना होगा कि यह उन पर कैसे प्रभाव डालता है। इसके बाद हमें ऐसे समाधानों पर काम करना होगा जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हों, और जिनमें अनुकूलन को भी उतना ही महत्व दिया जाए जितना हम शमन को देते हैं।

इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा किया गया। अपने संबोधन में मंत्री ने समानता, लचीलापन और सतत विकास पर टिकी जलवायु महत्वाकांक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

WSDS (WSDS) के ग्लोबल साउथ से उभरकर एक ऐसे विशिष्ट मंच बनने पर, जो सरकारों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदायों को एक साथ लाता है ताकि 'स्थिरता के विज्ञान' को नीतियों, साझेदारियों और धरातल पर व्यावहारिक कार्रवाई में बदला जा सके, यादव ने कहा, “आज का दिन केवल एक विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता और इस ग्रह के लिए एक निर्णायक क्षण है। इस शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम — ट्रांसफॉर्मेशन्स: विजन,

 वॉयस और वैल्यूज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट — एक रणनीतिक जरूरत है। लेकिन नेतृत्व के लिए धैर्य और दृष्टि दोनों की आवश्यकता होती है। शिखर सम्मेलन में रेखांकित 'परिवर्तन का सिद्धांत' — कंस्ट्रक्टिविज़्म, लर्निंग, ट्रांसफॉर्मेशन — हमें याद दिलाता है कि मानक और नियम संवाद के माध्यम से विकसित होते हैं।

लेकिन अगले 25 वर्ष केवल क्रियान्वयन के होने चाहिए। हमें आगे बढ़ना होगा: प्रतिज्ञाओं से प्रदर्शन की ओर; लक्ष्यों से प्रगति-पथ की ओर; और महत्वाकांक्षा से जवाबदेही की ओर। इस सम्मेलन को उस आयोजन के रूप में याद किया जाए जहाँ: विजन व्यावहारिक बना, आवाजें समावेशी हुईं और मूल्य संस्थागत बने। 'परिवर्तन' केवल एक विषय बनकर न रह जाए, बल्कि इसे एक वैश्विक आंदोलन बनने दें।

उद्घाटन संबोधन में, कोऑपरेटिव रिपब्लिक ऑफ गुयाना के उपराष्ट्रपति, महामहिम डॉ. भर्रत जगदेव ने कहा, “जब यह शिखर सम्मेलन पच्चीस साल पहले शुरू हुआ था, तब सारा ध्यान जलवायु और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने पर था। आज चुनौती जागरूकता की नहीं, बल्कि अपने लक्ष्यों को पाने के लिए ठोस कार्रवाई और उच्च महत्वाकांक्षा की है। ऐसे समय में जब बड़ी अर्थव्यवस्थाएं पीछे हट रही हैं, जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना—विशेष रूप से कार्बन मूल्य निर्धारण, बहुपक्षीय व्यवस्थाओं और विमानन व नौवहन जैसे क्षेत्रों में—कहीं अधिक कठिन हो जाता है।

इसके बावजूद, मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व प्रगति को आगे बढ़ा सकता है। गुयाना में, हमारी 2009 की लो-कार्बन डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी ने यह साबित किया है कि मौजूदा वनों को बचाए रखना उच्च गुणवत्ता वाला और किफायती समाधान प्रदान करता है। हमने तेल संसाधनों का जिम्मेदारी से विकास करने के साथ-साथ, स्वैच्छिक और अनुपालन बाजारों में करोड़ों डॉलर मूल्य के 'फॉरेस्ट कार्बन क्रेडिट' बेचे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सस्टेनेबिलिटी वास्तविक आर्थिक मूल्य प्रदान करती है।

उद्घाटन दिवस का एक मुख्य आकर्षण 'हिम-कनेक्ट' का शुभारंभ था। यह 'हिमालय से और हिमालय के लिए' केंद्रित एक नवाचार मेला है, जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक अनूठी पहल है। यह मंच 'राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन' के तहत विकसित तकनीकों को स्टार्टअप्स, उद्यमियों और निवेशकों से जोड़ता है, ताकि हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास को गति दी जा सके। यह पहल नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा के साथ-साथ भारतीय हिमालयी क्षेत्र में 'हरित आजीविका' और नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत नीतिगत कदम है।

टेरी ने WSDS की रजत जयंती के अवसर पर एक विशेष स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया, जिसका शीर्षक है: “विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (2001–2026): सतत विकास पर महत्वाकांक्षा और कार्रवाई को आगे बढ़ाने के 25 संस्करण – एक आर्काइवल पॉकेटबुक।” यह प्रकाशन WSDS के माध्यम से आकार लेने वाले 25 वर्षों के वैश्विक संवाद, नेतृत्व और साझेदारियों का वृत्तांत प्रस्तुत करता है। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, व्यावसायिक दिग्गजों और परिवर्तनकर्ताओं को एक साथ लाने की इस मंच की यात्रा का दस्तावेजीकरण किया गया है।

रजत जयंती 'आर्काइवल पॉकेटबुक' के बारे में बताते हुए डॉ. शैली केडिया, क्यूरेटर, विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन, ने कहा, “यह आर्काइवल पुस्तक हमारी सामूहिक यात्रा के 25 संस्करणों का दस्तावेज़ है। यह शिखर सम्मेलन के सफर को 'एजेंडा तय करने' से लेकर 'समाधान-उन्मुख जुड़ाव' की ओर विकसित होते हुए दर्शाती है। साथ ही, यह उन मुख्य घोषणाओं, प्रमुख पहलों और ऐतिहासिक पड़ावों को समेटती है, जिन्होंने वैश्विक स्थिरता से जुड़ी चर्चाओं को नया आकार दिया है।

 WSDS 2026 में भारत और 'ग्लोबल साउथ' की प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई, जिनमें जलवायु वित्त, स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन सुरक्षा और वैश्विक शासन जैसे विषय शामिल थे। इन चर्चाओं से प्राप्त सुझावों से अमल में लाई जा सकने वाली साझेदारियों और नीतिगत सिफारिशों को बल मिलेगा।

 टेरी के वरिष्ठ निदेशक संजय सेठ ने कहा, “हमारे भागीदारों के सामूहिक प्रयास ही WSDS को गहराई, विश्वसनीयता और प्रभाव प्रदान करते हैं। इस शिखर सम्मेलन और इसके परिणामों को आकार देने में उनके निरंतर सहयोग के लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं।

पिछले 25 वर्षों में, WSDS सतत विकास पर 'दक्षिणी दृष्टिकोण' को मजबूती से रखने वाला एक प्रमुख वैश्विक मंच बन गया है। आज जब विश्व जलवायु, जैव विविधता, वित्त और समानता जैसे एक-दूसरे से जुड़े संकटों का सामना कर रहा है, 2026 का यह रजत जयंती संस्करण केवल छोटे-मोटे सुधारों तक सीमित न रहकर, व्यापक प्रणालीगत परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

WSDS 2026 का आयोजन 27 फरवरी तक जारी रहेगा। इसमें उच्च-स्तरीय पूर्ण सत्र, वैश्विक नेताओं के संबोधन और क्षेत्र-विशिष्ट गहन चर्चाएं होंगी, जिनका उद्देश्य एक न्यायसंगत, लचीले और सतत भविष्य के लिए ठोस कार्रवाई को गति देना है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सैफ़ी काउंट द्वारा विकास नगर में मीटिंग में नियुक्त पत्र वितरित

गांधीवादी संस्थाओं ने शांति मार्च और प्रार्थना सभा कर बापू को श्रद्धांजलि दी

अफ्रीकी देशों में व्यापार बढ़ाने के लिए केंद्रीय विशेष प्रोत्साहन योजना की आवश्यकता-सुरेश अग्रवाल

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की पहल पर "सक्षम" का आयोजन

राजस्थान समग्र सेवा संघ, में “राजस्थान के गाँधी” गोकुल भाई की 128वीं जयंती पर नशामुक्ति अभियान

अ भा महिला गुर्जर महासभा राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मुनेश गुर्जर बनी

बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा Earned Salary Advance Drawal Access Scheme का शुभारंभ

COWE और टी ट्रेडिशन ने "पौष्टिक" comeptition का आयोजन किया

जयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा के शपथ ग्रहण में उमड़ा जन सैलाब

NSUI National President जो गहलोत और पायलट न कर सके, वह विनोद जाखड़ ने कर दिखाया