COWE की 'विमेंस इंटरनेशनल समिट ऑन एंटरप्रेन्योरशिप 2026' में वसुंधरा राजे ने दिए एक्सीलेंस अवॉर्ड्स’
० आशा पटेल ०
जयपुर। भविष्य के लिए तैयार रहे, बदलाव को अपनाएं और तकनीक को समझें, लेकिन इसे स्वयं पर कभी हावी न होने दें। आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे नए तकनीकी बदलाव व्यवसायों को तेजी से प्रभावित करेंगे, इसलिए सभी को समय रहते खुद को तैयार करना होगा। हाल ही में ट्विटर में एआई के कारण हुए लगभग 4,000 कर्मचारियों की छंटनी का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीक को समझना और अपनाना अब बहुत जरूरी हो गया है।
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ‘COWE एक्सीलेंस अवॉर्ड्स’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में राजे ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से COWE ने देश की महिला उद्यमियों को एक छत के नीचे लाने का सराहनीय कार्य किया है।
समिट के दौरान 'अनलॉकिंग कैपिटल-फाइनेंसिंग स्कैलेबल एंड इम्पैक्ट-ड्रिवन एंटरप्राइजेज' विषय पर एक सत्र आयोजित किया गया गया। इस सत्र में सीए रुचिका सराफ, सीए निवेदिता सारदा, नितिका अग्रवाल, अनिश थॉमस, डॉ. पूजा शर्मा और सीए अर्पित भार्गव ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने संस्थापकों से बड़ा सोचने और अपनी क्षमता को स्वयं तक सीमित न करने का आग्रह किया। उन्होंने माना कि बाहरी प्रभाव मौजूद हैं,
सेशन 'एआई एंड डिजिटल ट्रान्सफॉर्मेशन- क्राफ्टिंग फ्यूचर-रेडी बिजनेसेस' विषय पर आयोजित सत्र में चेतना जैन, डॉ. पूनम उपाध्याय, सृजना रघुपति, नुपुर सी शर्मा, विशाल माहेश्वरी और हिमांशु सिंह ने भाग लिया। पैनल में चर्चा हुई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब धीरे-धीरे व्यवसायों के लिए एक व्यावहारिक सहयोगी के रूप में उभर रहा है, जो विकास को बढ़ावा देने, कार्यकुशलता सुधारने और मैन्युअल कार्यभार कम करने में मदद कर रहा है।
जयपुर। भविष्य के लिए तैयार रहे, बदलाव को अपनाएं और तकनीक को समझें, लेकिन इसे स्वयं पर कभी हावी न होने दें। आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे नए तकनीकी बदलाव व्यवसायों को तेजी से प्रभावित करेंगे, इसलिए सभी को समय रहते खुद को तैयार करना होगा। हाल ही में ट्विटर में एआई के कारण हुए लगभग 4,000 कर्मचारियों की छंटनी का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीक को समझना और अपनाना अब बहुत जरूरी हो गया है।
यह बात पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री, स्मृति ईरानी ने 'विमेंस इंटरनेशनल समिट ऑन एंटरप्रेन्योरशिप (वाईज) 2026' में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए कही। कॉन्फिडरेशन ऑफ विमेन इंटरप्रेन्योर्स ऑफ इंडिया (COWE) के राजस्थान चैप्टर द्वारा इस वर्ष समिट की थीम ‘रूट्स टू विंग्स: स्पॉटलाइटिंग विमेंस एंटरप्रेन्योर्स फ्रॉम ग्रासरूट्स इनोवेशन दू ग्लोबल लीडरशिप’ है।
स्मृति ईरानी ने वुमंस कलैक्टिव फोरम और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के एक संयुक्त शोध का भी जिक्र किया, जिसमें बताया गया है कि छोटे और मध्यम उद्योगो की बड़ी पूंजी अदालतों में चल रहे मामलों के कारण फंसी रहती है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश में 7 करोड़ से अधिक पंजीकृत उद्यम हैं, जो 30 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। इनमें लगभग 1.17 करोड़ उद्यम महिलाओं के स्वामित्व में हैं। फिर भी, करीब ₹8 लाख करोड़ की रकम भुगतान में देरी के कारण अटकी हुई है, जिससे कारोबार की वृद्धि प्रभावित होती है।
उन्होंने COWE से बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल इनोवेशन, कमर्शियल एंटरप्राइजेज और अन्य उभरते क्षेत्रों में काम कर रही महिला नवाचारियों को पहचान कर उनका मार्गदर्शन करने और उनके नवाचारों को बाजार तक पहुंचाने में मदद करने की अपील की।
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ‘COWE एक्सीलेंस अवॉर्ड्स’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में राजे ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से COWE ने देश की महिला उद्यमियों को एक छत के नीचे लाने का सराहनीय कार्य किया है।
उन्होंने ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का श्रेय ग्रामीण महिलाओं को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न पहलों जैसे कि लखपति दीदी, राजीविका, आजीविका, अन्नपूर्णा दूध योजना, भामाशाह आदि योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद की है। डेटा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में यह आंकड़ा वर्ष 2018 में 26 प्रतिशत से बढ़कर 2024 तक करीब 47 प्रतिशत हुआ है।
शहरी क्षेत्र में यह करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ा है। राजे ने अपील की कि महिलाओं को आगे बढ़ते समय अपने साथ-साथ आने वाली पीढ़ी की महिलाओं के लिए भी रास्ते आसान और अवसरों से भरपूर बनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। इस आयोजन का उद्देश्य एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना, प्रेरित करना और उनके उद्यमिता सफर में सार्थक नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करना है।
इन दो दिनों के दौरान उद्यमियों, स़्टार्ट-अप ईकोसिस्टम पार्टनर्स और उभरती महिला उद्यमियों को पैनल स्पीकर्स और इंडस्ट्री के लीडर्स से सीधा संवाद करने और नेटवर्क स्थापित करने के अवसर मिल रहा है। COWE की फाउंडर डायरेक्टर और 2025-2026 की बोर्ड चेयरपर्सन, शेलजा रेड्डी और फाउंडर प्रेसिडेंट, COWE राजस्थान,निधि तोषनीवाल सहित कार्यक्रम में पूरे भारत से महिला एंटरप्रेन्योर, COWE नेशनल कमिटी और चैप्टर कमिटी की अन्य सदस्य शामिल हुई हैं। समिट के दौरान इटरनल हॉस्पिटल जयपुर और COWE के बीच एमओयू हस्ताक्षर भी हुआ।
समिट के दौरान 'अनलॉकिंग कैपिटल-फाइनेंसिंग स्कैलेबल एंड इम्पैक्ट-ड्रिवन एंटरप्राइजेज' विषय पर एक सत्र आयोजित किया गया गया। इस सत्र में सीए रुचिका सराफ, सीए निवेदिता सारदा, नितिका अग्रवाल, अनिश थॉमस, डॉ. पूजा शर्मा और सीए अर्पित भार्गव ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने संस्थापकों से बड़ा सोचने और अपनी क्षमता को स्वयं तक सीमित न करने का आग्रह किया। उन्होंने माना कि बाहरी प्रभाव मौजूद हैं,
लेकिन कई उद्यमी विशेषकर महिलाएं अनजाने में अपनी महत्वाकांक्षाओं पर स्वयं ही सीमा लगा देती हैं। चर्चा के दौरान निवेश के लिए तैयार होने के इन महत्वपूर्ण बिंदुओं जैसे कि अपने विचार और उद्यम के प्रति सच्चा विश्वास, अपने वित्तीय आंकड़ों पर मजबूत पकड़, और अपने व्यवसाय को स्पष्टता व आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने की क्षमता पर जोर दिया गया।
सेशन 'एआई एंड डिजिटल ट्रान्सफॉर्मेशन- क्राफ्टिंग फ्यूचर-रेडी बिजनेसेस' विषय पर आयोजित सत्र में चेतना जैन, डॉ. पूनम उपाध्याय, सृजना रघुपति, नुपुर सी शर्मा, विशाल माहेश्वरी और हिमांशु सिंह ने भाग लिया। पैनल में चर्चा हुई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब धीरे-धीरे व्यवसायों के लिए एक व्यावहारिक सहयोगी के रूप में उभर रहा है, जो विकास को बढ़ावा देने, कार्यकुशलता सुधारने और मैन्युअल कार्यभार कम करने में मदद कर रहा है।
स्वचालित भर्ती प्रक्रियाओं से लेकर “को-पायलट” मोड में चलने वाली मार्केटिंग तक, जहां तकनीक और मानवीय समझ साथ मिलकर काम करते हैं। वहां एआई टीमों को रोजमर्रा के कार्यों से मुक्त कर रणनीतिक निर्णयों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बना रहा है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि एआई लोगों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर और समझदारीपूर्ण निर्णय लेने तथा अधिक मूल्य सृजन में सहायक बनने के लिए आया है।
लीडिंग विद इम्पैक्ट: बिल्डिंग रेजिलिएंट ऑर्गेनाइजेशंस’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विभिन्न संगठनों की महिला लीडर्स ने अपने विचार रखे। इन वक्ताओं में निधि तोषनीवाल, मंजू शर्मा, वैदेही सिंह, नैन्सी बैरी, डॉ. तूलिका गुप्ता और स्मृति शर्मा शामिल रहीं। अपने-अपने संगठनों से अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि सशक्त नेतृत्व संकट के दौर में संगठनों को न केवल संभालता है, बल्कि उन्हें नई दिशा भी देता है।
लीडिंग विद इम्पैक्ट: बिल्डिंग रेजिलिएंट ऑर्गेनाइजेशंस’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विभिन्न संगठनों की महिला लीडर्स ने अपने विचार रखे। इन वक्ताओं में निधि तोषनीवाल, मंजू शर्मा, वैदेही सिंह, नैन्सी बैरी, डॉ. तूलिका गुप्ता और स्मृति शर्मा शामिल रहीं। अपने-अपने संगठनों से अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि सशक्त नेतृत्व संकट के दौर में संगठनों को न केवल संभालता है, बल्कि उन्हें नई दिशा भी देता है।
पैनलिस्टों ने जोर दिया कि प्रभावी नेतृत्व व्यवहार में कम्युनिकेशन और लिसनिंग को अवश्य शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही संवेदनशीलता, मजबूत सिद्धांतों पर आधारित कार्य संस्कृति और स्पष्ट परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड संगठन को स्थायित्व प्रदान करते हैं। वहीं, वक्ताओं ने सस्टेनेबल एंड रिस्पॉन्सिबल प्रथाओं को अपनाना आज के समय की आवश्यकता बताया।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने कोलेबोरेशन की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। किस प्रकार संगठन एक-दूसरे से सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं। विभिन्न हितधारकों और संगठनों के बीच मजबूत साझेदारी ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।
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