पृथ्वी दिवस पर राष्ट्रीय संवाद : सस्टेनेबिलिटी ही धर्म : कैलाश सत्यार्थी

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर,पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित 4th युवा सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस (ऑनलाइन) में कैलाश सत्यार्थी, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता एवं प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि “सस्टेनेबिलिटी ही धर्म है, जो जीवन को बनाए रखने का सार्वभौमिक आधार है, और धर्म का आचरण ही कर्म है।

 उन्होंने कहा कि जलवायु और सामाजिक संकट मानव-निर्मित हैं, जिनसे निपटने के लिए सामूहिक और त्वरित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कार्बन उत्सर्जन में कमी, करुणा-आधारित समाज के निर्माण तथा युवाओं को वर्तमान में ही नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

यह सम्मेलन “Our Power, Our Planet” थीम पर Voices of Bharat: Yuva for Sustainability द्वारा आयोजित किया गया, जो Sustainability Karma की पहल है। आयोजन टीम में कार्यान्वयन सहयोगी के रूप में Lok Samvad Sansthan की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में शिक्षा, उद्योग और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए सस्टेनेबिलिटी को शिक्षा, नीति और व्यवहार में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सम्मेलन में डॉ. एन.सी. वाधवा, डायरेक्टर जनरल, मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स ने प्रदूषण, चरम मौसम और ग्लेशियर पिघलने जैसी चुनौतियों पर चिंता जताते हुए शिक्षा और शोध में सस्टेनेबिलिटी को शामिल करने की आवश्यकता बताई। प्रो. नुपुर प्रकाश, वाइस चांसलर, द नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी ने विभिन्न विषयों में सस्टेनेबिलिटी को समाहित करने तथा सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने पर बल दिया। प्रो. हरप्रीत कौर, प्रिंसिपल, माता सुंदरी कॉलेज फॉर वीमेन, दिल्ली विश्वविद्यालय ने सामाजिक उद्यमिता और सर्कुलर इकोनॉमी के महत्व को रेखांकित किया।

प्रो. सीमा अग्रवाल, प्रिंसिपल, कनोरिया पीजी महिला महाविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय ने “हमारा कचरा हमारी जिम्मेदारी” बताते हुए जिम्मेदार उपभोग पर जोर दिया। प्रो. एल. रमेश, जॉइंट रजिस्ट्रार, डॉ. एम.जी.आर. एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट एवं प्रेसीडेंट, द इंस्टीट्यूशन ऑफ ग्रीन इंजीनियर्स ने ज्ञान और उसके क्रियान्वयन के बीच अंतर को पाटने की आवश्यकता बताई।

 आयोजित पैनल चर्चा का संचालन प्रो. अविनाश सिंह, पूर्व प्रो-वाइस चांसलर, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, शिलांग एवं डायरेक्टर जनरल और प्रो-वाइस चांसलर, मंगलायतन यूनिवर्सिटी ने किया। इस दौरान राज भाटिया, सीएमडी, बोनी पॉलिमर्स एवं प्रेसीडेंट, फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन तथा गीत कपूर, फाउंडर, क्वांटम शिफ्ट कंसल्टिंग ने ग्रीन टेक्नोलॉजी और रोजगार के अवसरों पर अपने विचार साझा किए। प्रो. डॉ. विकास राजपूत, डायरेक्टर, पैरेलल लिविंग रिसर्च एंड कंसल्टिंग ने पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। आरोही सोरल, बी.एससी. तृतीय वर्ष, कनोरिया पीजी महिला महाविद्यालय, जयपुर ने इकोसिस्टम रिस्टोरेशन, दीक्षा वैद, यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू ने एनवायरनमेंटल गवर्नेंस, साई दिनेश, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, तमिलनाडु ने ऊर्जा संक्रमण तथा सारा, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश ने क्लाइमेट माइग्रेशन पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

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