वॉटर बॉडीज़ को विकसित करने हेतु वूमेन लीडरशिप की ज़रूरत : डॉ. मुहम्मद जुनैद
० आशा पटेल ०
जयपुर।अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस के अवसर पर जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में मीडिया महिला कर्मियों के लिए फ्यूचर सोसाइटी एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर यूनिसेफ के चीफ के.एल. राव ने राजस्थान में जल संरक्षण के प्रयासों में महिला मीडिया कर्मियों की भूमिका को बेहद जरूरी बताया।जल, जलवायु परिवर्तन और बच्चों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मीडिया की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से “जर्नलिस्ट्स फॉर वॉटर सिक्योरिटी: मीडिया डायलॉग ऑन वॉटर, क्लाइमेट एंड चिल्ड्रेन” विषय पर इस कार्यशाला का आयोजन 22 मार्च को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस की अहमियत समझने के लिए किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की महिला पत्रकारों ने भाग लेते हुए जल संरक्षण और जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की।यूनिसेफ राजस्थान के वॉश स्पेशलिस्ट रूषभ हिमानी ने अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस 2026 की थीम “जल और लैंगिक समानता – जहाँ जल बहता है, समानता पनपती है” के बारे में जानकारी देते हुए राजस्थान के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल संकट का प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर सबसे अधिक पड़ता है, इसलिए जल प्रबंधन और संरक्षण में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।शोहिब खान ने राजस्थान में जल संकट की चुनौतियों, जल और जलवायु परिवर्तन के संबंध, स्वास्थ्य तथा बाल अधिकारों पर इसके प्रभाव जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पत्रकारों को जल से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी रिपोर्टिंग के लिए मजबूत स्टोरी एंगल पहचानने, डेटा आधारित रिपोर्टिंग करने और सामुदायिक समाधानों को सामने लाने के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया।कार्यशाला के दौरान “जेंडर इन द मीडिया रूम: वूमेन जर्नलिस्ट्स शेपिंग द वॉटर नैरेटिव” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें महिला पत्रकारों ने जल से जुड़े मुद्दों पर मीडिया की भूमिका और अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वॉटर बॉडीज़ के विकास और संरक्षण के लिए महिला नेतृत्व बेहद आवश्यक है। जब महिलाओं को जल से जुड़े निर्णयों में बराबर भागीदारी मिलती है, तो जल सेवाएँ अधिक समावेशी और टिकाऊ बनती हैं।
इस कार्यशाला के आयोजन में द फ्यूचर सोसाइटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था की सचिव डॉ. मीना शर्मा ने बताया कि यह संवाद कार्यशाला पत्रकारों को जल, जलवायु परिवर्तन और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए आयोजित की गई है और भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएँ आयोजित की जाती रहेंगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल से मीडिया के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलेगी। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों को अपनी रिपोर्टिंग में प्राथमिकता देने का संकल्प भी व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. ज्योति जोशी, प्रेरणा साहनी, अर्चना शर्मा, शालू सचेदेवा, आशा पटेल, मणिमाला शर्मा सहित बड़ी संख्या में महिला पत्रकार मौजुद रही ।
यूनिसेफ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अंकुश सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस 2026 की बधाई देते हुए महिला मीडिया कर्मियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर परितोष गुप्ता (चीफ इंजीनियर, पीएचईडी) एवं निशा शर्मा (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, पीएचईडी) ने भी केंद्र और राज्य सरकार की जल संरक्षण से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी।
जयपुर।अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस के अवसर पर जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में मीडिया महिला कर्मियों के लिए फ्यूचर सोसाइटी एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर यूनिसेफ के चीफ के.एल. राव ने राजस्थान में जल संरक्षण के प्रयासों में महिला मीडिया कर्मियों की भूमिका को बेहद जरूरी बताया।जल, जलवायु परिवर्तन और बच्चों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मीडिया की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से “जर्नलिस्ट्स फॉर वॉटर सिक्योरिटी: मीडिया डायलॉग ऑन वॉटर, क्लाइमेट एंड चिल्ड्रेन” विषय पर इस कार्यशाला का आयोजन 22 मार्च को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस की अहमियत समझने के लिए किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की महिला पत्रकारों ने भाग लेते हुए जल संरक्षण और जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की।यूनिसेफ राजस्थान के वॉश स्पेशलिस्ट रूषभ हिमानी ने अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस 2026 की थीम “जल और लैंगिक समानता – जहाँ जल बहता है, समानता पनपती है” के बारे में जानकारी देते हुए राजस्थान के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल संकट का प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर सबसे अधिक पड़ता है, इसलिए जल प्रबंधन और संरक्षण में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।शोहिब खान ने राजस्थान में जल संकट की चुनौतियों, जल और जलवायु परिवर्तन के संबंध, स्वास्थ्य तथा बाल अधिकारों पर इसके प्रभाव जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पत्रकारों को जल से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी रिपोर्टिंग के लिए मजबूत स्टोरी एंगल पहचानने, डेटा आधारित रिपोर्टिंग करने और सामुदायिक समाधानों को सामने लाने के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया।कार्यशाला के दौरान “जेंडर इन द मीडिया रूम: वूमेन जर्नलिस्ट्स शेपिंग द वॉटर नैरेटिव” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें महिला पत्रकारों ने जल से जुड़े मुद्दों पर मीडिया की भूमिका और अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वॉटर बॉडीज़ के विकास और संरक्षण के लिए महिला नेतृत्व बेहद आवश्यक है। जब महिलाओं को जल से जुड़े निर्णयों में बराबर भागीदारी मिलती है, तो जल सेवाएँ अधिक समावेशी और टिकाऊ बनती हैं।
इस कार्यशाला के आयोजन में द फ्यूचर सोसाइटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था की सचिव डॉ. मीना शर्मा ने बताया कि यह संवाद कार्यशाला पत्रकारों को जल, जलवायु परिवर्तन और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए आयोजित की गई है और भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाएँ आयोजित की जाती रहेंगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल से मीडिया के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलेगी। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों को अपनी रिपोर्टिंग में प्राथमिकता देने का संकल्प भी व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. ज्योति जोशी, प्रेरणा साहनी, अर्चना शर्मा, शालू सचेदेवा, आशा पटेल, मणिमाला शर्मा सहित बड़ी संख्या में महिला पत्रकार मौजुद रही ।
यूनिसेफ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अंकुश सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस 2026 की बधाई देते हुए महिला मीडिया कर्मियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर परितोष गुप्ता (चीफ इंजीनियर, पीएचईडी) एवं निशा शर्मा (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, पीएचईडी) ने भी केंद्र और राज्य सरकार की जल संरक्षण से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी।
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