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डॉ.अग्रवाल आई हॉस्पिटल की बड़ी उपलब्धि, दुर्लभ जन्मजात नेत्र दोष से पीड़ित व्यक्ति की आँखों की रौशनी वापस लौटी

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० संवाददाता द्वारा ०  कोलकाता : डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल, कोलकाता में जन्मजात 'आइरिस कोलोबोमा' ( एक दुर्लभ जन्मजात दोष जिसमें आइरिस का एक हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता ) की समस्या से जूझ रहे 51 वर्षीय मरीज़ का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। पीड़ित को बचपन से ही बाईं आँख से कम नज़र आता था लेकिन अस्पताल में कई डे-केयर प्रक्रियाओं के बाद उनकी नज़र वापस लौट आई। उनका 'सिंगल-पास फोर-थ्रो (SFT) प्यूपिलोप्लास्टी' नामक उपचार किया गया। यह एक आइरिस रीकंस्ट्रक्शन तकनीक है जिसे डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल के चेयरमैन प्रो. अमर अग्रवाल ने विकसित किया है। इस प्रक्रिया में असामान्य पुतली की मरम्मत की जाती है जिससे दृष्टि व दृश्य गुणवत्ता दोनों में सुधार आता है। उपचार के बाद, रोगी की बाईं आंख की रौशनी 40% से बढ़कर 75% हो गई है। रोगी ने कई वर्षों के दौरान बड़े-बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखाया लेकिन हर जगह से यहीं खबर आई कि उनका केस बहुत पेचीदा है और आँखों की रौशनी वापस लौटने की कोई गारंटी नहीं है। जन्मजात आइरिस कोलोबोमा के अलावा, रोगी की आँखों के अगले और पिछले हिस्सों में भी कुछ असामान्यता...

ब्लड टेस्ट से शुरुआती कैंसर की होगी पहचान,रिलायंस की स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज को मिला पेटेंट

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० संवाददाता द्वारा ०  बेंगलुरु : रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज को ऐसी तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट मिला है, जो सिर्फ ब्लड सैंपल के जरिए कैंसर की शुरुआती पहचान और उसके संभावित स्रोत का पता लगाने में मदद कर सकती है। यह प्लेटफॉर्म सेल-फ्री डीएनए का विश्लेषण करता है और इसमें जीनोम सीक्वेंसिंग, बायोलॉजिकल डेटा एनालिसिस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल होता है। कंपनी के मुताबिक इस तकनीक की खासियत कैंसर से जुड़े डीएनए पैटर्न में बदलाव को पहचानना है, ताकि बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सके और मरीजों को बेहतर इलाज का मौका मिल सके। फिलहाल बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर की पहचान बीमारी के गंभीर चरणों में ही हो पाती है। स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज के सीईओ रमेश हरिहरन ने कहा कि यह पेटेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लिक्विड बायोप्सी टेक्नोलॉजी के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी का लक्ष्य ऐसे समाधान विकसित करना है, जो कैंसर स्क्रीनिंग को अधिक सटीक, बड़े पैमाने पर लागू करने योग्य और सुलभ बना सकें।

भाजपा एवं आरएसएस का एजेंडा बढ़ाने हेतु सरकार बिना किसी ड्राफ्ट के जन सुनवाई करवा रही है : डोटासरा

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० संवाददाता द्वारा ०  जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता हेतु कमेटी बनाई गई है जिसमें रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, रिटायर्ड आईएएस शत्रुध्न सिंह, एडिशन एडवोकेट जनरल बसंत छाबा, पूर्व प्रिसिंपल राजकीय महाविद्यालय गंगानगर रामस्वरूप अग्रवाल तथा आरएसएस से संबंधित डॉ. सुची चौहान को शामिल किया गया है, जबकि कानून का कोई मसौदा (ड्राफ्ट) नहीं बनाया गया है, क्या जनसुनवाई करनी है यह भी तय नहीं है, उद्देश्य केवल यह है कि देश और प्रदेश में सामाजिक समरसता पर प्रहार करना है।  समाज में धार्मिक उन्माद फैलाना चाहते हैं ताकि मूलभूत समस्याओं को लेकर सरकार अपनी जवाबदेही से बच सके, इसीलिये बिना मसौदे के जनसुनवाई की जा रही है। इस कमेटी में अधिकांश आरएसएस से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है, उत्तराखण्ड, गुजरात, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और अब राजस्थान में कमेटी का दायित्व नेतृत्व के रूप में एक ही जन को लिया गया है।  सरकार गर्वनेन्स को लेकर जनता की जवाबदेही से बचने के लिये बहस प्रारम्भ करवा रही है। यदि एक ही व्यक्ति को सभी राज्यों में दायित्व देना था तो यह कवायद केन्द्र सरकार को पूरे देश ...