तम्बाकू मुक्त पीढ़ी नीति” की आवश्यकता राजस्थान के लिए करना होगा तम्बाकू का अंत
जयपुर | नशा मुक्त राजस्थान के निर्माण के लिए तम्बाकू का अंत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में “राजतोफा” ( राजस्थान टोबैको फ्री अलायंस ) के पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तम्बाकू मुक्त पीढ़ी नीति लागू करने की मांग उठाई।
राजतोफा की युवा सदस्या ज्योति चौधरी ने कहा कि नशे की शुरुआत प्रायः मीठी सुपारी, गुटखा, पान मसाला एवं अन्य तम्बाकू उत्पादों से होती है। यदि तम्बाकू मुक्त पीढ़ी नीति लागू कर दी जाए, तो कोटपा अधिनियम की धारा 6ए की पालना सुनिश्चित करना भी आसान हो जाएगा। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ठोस एवं प्रभावी निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी के सचिव धर्मवीर कटेवा ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में तम्बाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अनेक प्रयास किए गए हैं, जिनसे आंशिक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जीवन शैली एवं प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार कर इस विषय को प्राथमिकता से लागू करने पर ही नशा मुक्त राजस्थान का सपना साकार हो सकता है।
राजतोफा के अध्यक्ष डॉ. रमेश गांधी ने कहा कि नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम जो 2007-8 में शुरू हुआ था इसका नाम और कार्य प्रणाली पुरानी व प्रभावहीन हो चुकी है अब इन्हें नए स्वरूप में लागू किया जाना चाहिए। इसका नाम बदलकर "नेशनल मिशन फोर एंडगेम" किया जाना चाहिए। राजतोफा को भी WHO सिविल सोसाइटी कमीशन की तर्ज पर सुधार करके उसमें युवा पीढ़ी, टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, रिसोर्स mobilisation जोड़ा जाना चाहिए ताकि 2030 तक तंबाकू की समाप्ति के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
राजतोफा के संरक्षक एवं राजस्थान कैंसर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि यदि राजस्थान सरकार वास्तव में नशा मुक्त राजस्थान बनाना चाहती है, तो 1 जनवरी 2009 के बाद जन्मे बच्चों के लिए जीवनभर तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने वाली “तम्बाकू मुक्त पीढ़ी (Tobacco Free Generation)” नीति लागू करनी होगी।
उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 27 करोड़ लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं, जबकि राजस्थान में करीब 2 करोड़ लोग तम्बाकू उपभोक्ता हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्व तम्बाकू निषेध दिवस की थीम “आकर्षण का पर्दाफाश: निकोटिन और तम्बाकू की लत का मुकाबला” है तथा तम्बाकू का अंत करना आज की आवश्यकता बन चुका है।
राजतोफा की युवा सदस्या ज्योति चौधरी ने कहा कि नशे की शुरुआत प्रायः मीठी सुपारी, गुटखा, पान मसाला एवं अन्य तम्बाकू उत्पादों से होती है। यदि तम्बाकू मुक्त पीढ़ी नीति लागू कर दी जाए, तो कोटपा अधिनियम की धारा 6ए की पालना सुनिश्चित करना भी आसान हो जाएगा। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ठोस एवं प्रभावी निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी के सचिव धर्मवीर कटेवा ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में तम्बाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अनेक प्रयास किए गए हैं, जिनसे आंशिक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जीवन शैली एवं प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार कर इस विषय को प्राथमिकता से लागू करने पर ही नशा मुक्त राजस्थान का सपना साकार हो सकता है।
राजतोफा के अध्यक्ष डॉ. रमेश गांधी ने कहा कि नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम जो 2007-8 में शुरू हुआ था इसका नाम और कार्य प्रणाली पुरानी व प्रभावहीन हो चुकी है अब इन्हें नए स्वरूप में लागू किया जाना चाहिए। इसका नाम बदलकर "नेशनल मिशन फोर एंडगेम" किया जाना चाहिए। राजतोफा को भी WHO सिविल सोसाइटी कमीशन की तर्ज पर सुधार करके उसमें युवा पीढ़ी, टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, रिसोर्स mobilisation जोड़ा जाना चाहिए ताकि 2030 तक तंबाकू की समाप्ति के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
राजतोफा के समन्वयक राजन चौधरी ने कहा कि विभिन्न स्वैच्छिक संगठन मिलकर नशा मुक्त राजस्थान बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के सहयोग से तम्बाकू मुक्त पीढ़ी नीति लागू करवाने एवं तम्बाकू उन्मूलन हेतु राज्यभर में व्यापक अभियान प्रारम्भ किया जा रहा है। 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर राजस्थान के सभी जिलों में “तम्बाकू का अंत” अभियान शुरू किया जाएगा।
.jpeg)

टिप्पणियाँ