कबाड़ भारत के इस्पात क्षेत्र को मजबूती देने की कुंजी

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : भारतीय इस्पात उद्योग लगातार विस्तार कर रहा है और ऐसे समय में कबाड़ (स्क्रैप) इस क्षेत्र को अधिक मजबूत, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बात यहां शुरू हुए एमजंक्शन के 13वें भारतीय इस्पात बाज़ार सम्मेलन में उद्योग जगत के प्रमुख विशेषज्ञों ने कही।
सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अशोक कुमार पांडा ने कहा, "कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को घटाना हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे कैसे हासिल किया जाए? बेहतर परिचालन पद्धतियों, नई तकनीकों और ऐसे कच्चे माल के उपयोग से, जिससे कम प्रदूषण हो। ऐसा कच्चा माल क्या है? वह है कबाड़। जिसे कभी बेकार समझा जाता था, आज वही सबसे मूल्यवान संसाधन बन गया है।

एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय वर्मा ने कहा, "आज हम सभी कबाड़ को महत्व दे रहे हैं। यह अब केवल बेकार सामग्री नहीं रह गई है, बल्कि आने वाले समय के इस्पात की नींव है। उन्होंने कहा "भारत में इस्पात की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कबाड़ अब केवल एक उप-उत्पाद नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कच्चा माल बनता जा रहा है।

 कबाड़ से तैयार होने वाला प्रत्येक टन इस्पात हमें प्राकृतिक संसाधनों और आयातित कबाड़ पर निर्भरता कम करने में मदद करता है तथा देश के विनिर्माण तंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है। टाटा स्टील में विपणन एवं बिक्री के उपाध्यक्ष आशीष अनुपम ने कहा कि इस्पात निर्माण को कम कार्बन उत्सर्जन वाला बनाने के कई रास्ते हैं, जिनमें कबाड़ का अधिक उपयोग भी शामिल है। हालांकि, सही विकल्प चुनना इस समय इस्पात उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

उन्होंने कहा "इस समस्या का कोई एकमात्र समाधान नहीं है। हम हरित हाइड्रोजन की बात करते हैं, कार्बन को पकड़कर सुरक्षित रखने की तकनीक की बात करते हैं, कबाड़ के उपयोग की बात करते हैं और विद्युत आर्क भट्ठी की भी चर्चा करते हैं। लेकिन इनमें से कोई भी अकेला उपाय इस चुनौती का समाधान नहीं कर सकता। उन्होंने आगे कहा "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम आपसी सहयोग करें, नवाचार को बढ़ावा दें और सर्वोत्तम तरीके से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ें।

मैकिंज़ी एंड कंपनी के वरिष्ठ भागीदार रजत गुप्ता ने कहा कि देश में इस्पात उत्पादन क्षमता और खपत दोनों लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इस उद्योग को अधिक मजबूत, भू-राजनीतिक जोखिमों से सुरक्षित तथा लागत के लिहाज़ से प्रतिस्पर्धी बनाना भी उतना ही आवश्यक है। घरेलू इस्पात उद्योग के लिए एक टिकाऊ व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, इस वर्ष सम्मेलन का विषय रखा गया "स्टीलाथॉन : इस्पात से कबाड़ तक की मूल्य शृंखला का निर्माण"

भारत वर्ष 2030 तक इस्पात उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 30 करोड़ टन करने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करना देश की औद्योगिक प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। 

अपने व्यापक परिचालन नेटवर्क के बल पर एमजंक्शन ने पिछले वित्त वर्ष में इस्पात संयंत्रों को 25 लाख टन कबाड़ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही कंपनी ने देश के बिखरे हुए कबाड़ बाज़ार को एक सुव्यवस्थित और परिपत्र मूल्य शृंखला में संगठित करने में भी सफलता हासिल की।

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