राष्ट्र में ऊर्जा एवं सार्वजनिक पेट्रोलियम क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका” पर सेमिनार
नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अमर संदेश समाचार पत्र द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा पद्मभूषण भगत सिंह कोश्यारी तथा मुख्य अतिथि ओएनजीसी सेवानिवृत निर्देशक (अन्वेषण) सुषमा रावत की उपस्थिति में “राष्ट्र में ऊर्जा एवं सार्वजनिक पेट्रोलियम क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका” विषय पर सेमिनार एवं ऊर्जा सुरक्षा सम्मान-2026 का आयोजन पत्रकारों, लेखकों, संस्कृति कर्मियों व अनेकों सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति में किया गया।वैश्विक व राष्ट्रीय फलक पर चर्चित ज्वलंत विषय पर आयोजित सेमिनार का श्रीगणेश मुख्य व विशिष्ठ अतिथियों सुषमा रावत सेवानिवृत निर्देशक ओएनजीसी, दुर्गा सिंह भंडारी सेवानिवृत जीएम (एचआर) ओएनजीसी व संचालक मौल्यार रिसोर्स फाउंडेशन, डॉ. के सी पांडे अध्यक्ष भारतीय जादूगर संघ, प्रोफेसर रवि शर्मा श्रीराम कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय, सी एम पपनै वरिष्ठ पत्रकार व अध्यक्ष पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली,
अमर चंद्र व निम्मी ठाकुर मुख्य संपादक अमर संदेश मीडिया ग्रुप व पॉलिटिकल ट्रस्ट द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर तथा आयोज अमर चंद्र द्वारा सभी मंचासीन मुख्य व विशिष्ठ अतिथियों व सभागार में उपस्थित सभी पत्रकारों, सभी अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ा कर, स्मृति चिन्ह व ऊर्जा परिचायक पौंधा प्रदान कर किया गया।
आयोजित सेमिनार “राष्ट्र में ऊर्जा एवं सार्वजनिक पेट्रोलियम क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका” विषय पर सभी वक्ताओं वरिष्ठ पत्रकार सुनील नेगी, सुजीत ठाकुर, उत्तराखंड की अनेकों सामाजिक संस्थाओं से जुड़े चार्टड अकाउंटेंट राजेश्वर पैन्यूली द्वारा विचार व्यक्त किए गए।कहा गया, वर्ष 1947 से पूर्व कोई उद्यम नहीं था। देश को मिली आजादी के बाद देश के नेतृत्व ने समझदारी व विवेक से कार्य कर नीति नियोजन किया। वर्ष 1956, 1965, के बाद देश में परिवर्तन हुआ। वर्ष 1970 में घरेलू उपयोग हेतु एलपीजी आई। वर्ष 1984 में ऑयल के साथ गैस की ओर भी बढ़े। देश के सम्मुख चुनौती रही, 75 फीसद ऑयल तथा 50 फीसद गैस बाहरी देशों से आयात की जाती थी। आयोजित सेमिनार सामरिक विषय से जुड़ा है। जो स्थिति वर्तमान में बनी है हमें भविष्य के लिए सावधान करने के साथ-साथ जागृत भी करता है। हमें भविष्य पर दृष्टि डालनी चाहिए। हमारे भंडार सीमित हैं।सूर्य से जुड़ा अक्षय ऊर्जा का श्रोत बड़ा है। उक्त ऊर्जा को संचित करना सीख जाए तो बड़ी उम्मीद जग सकती है। कहा गया, भारत ने सौर ऊर्जा में छलांग लगाई है। चालीस गुना हम आगे बढ़े हैं। इस श्रोत में और अधिक काम करने की जरूरत है। एक बूंद पेट्रोल और एक यूनिट बिजली बचाने के लिए हमे सोचना होगा, प्रयास करना होगा।वक्ताओं द्वारा कहा गया, ऋगवेद में पहली रचना ही ऊर्जा से है, जिसमें अग्नि का आह्वान किया गया है। सूर्य का प्रातः आह्वान किया जाता है, जिससे पौंधो का विकास होता है जो हमारे खान-पान का माध्यम बनता है। कहा गया, बिना ऊर्जा के जीवन संभव नही है। ऊर्जा उत्पादन और वितरण से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हमारी रीढ़ की हड्डी के समान हैं। छोटा सा प्रयास हमारी ऊर्जा को बचा सकता है।ऊर्जा संकट है नहीं, बनाया गया है या करवाया जा रहा है। ऊर्जा से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का देश के विकास में बड़ा हाथ रहा है। ईंधन के रूप में चीड़ के पेड़ों से स्वाभाविक रूप में बड़ी तादात में गिरे पिरूल का बड़े स्तर पर ईंधन के रूप में प्रयोग कर ऊर्जा की प्राप्ति की जा सकती है। उत्तराखंड के जंगलों में लग रही आग पर नियंत्रण व हिमालयी पर्यावरण व जलवायु विविधता की रक्षा की जा सकती है।महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी द्वारा कहा गया सेमिनार का विषय रोचक और महत्वपूर्ण है। सौर ऊर्जा पर बहुत काम हुआ है। उक्त क्षेत्र में भारत विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भगत सिंह कोश्यारी द्वारा कहा गया, जब वे महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, प्रातः सैर पर निकलते थे। सूर्य का प्रकाश छा जाने पर जल रही स्टेट लाईट पर उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिया, बेकार में जल रही स्टेट लाईटें बंद होने से बिजली की बचत हुई। इसी तरह पानी बिना वजह बहता रहे यह भी ठीक नहीं है। देख परख कर ही निर्णय लिए जाते हैं। जन का जागरूक होना जरूरी है।जीवन में ईमानदारी से चलना चाहिए। उन्होंने कहा उत्तराखंड स्थित बदरीनाथ धाम की बेहद ठंड वाली पहाड़ी में से एक जगह पर खौलता हुआ पानी निकलता है जो अचंभित करता है। इसी तरह तेल और गैस का भी है, खोज जरूरी है। हो रहे उत्पादन क्षेत्रों में कैसे आगे बढ़े देखना होगा।
मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता ओएनजीसी सेवानिवृत निर्देशक सुषमा रावत द्वारा कहा गया, उत्तराखंड अंचल से उनका बड़ा जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा, बिजली उत्पादन में 74 फीसद एनर्जी में कोयले की प्रमुख भूमिका रही है। सोलर कूकर से सौर ऊर्जा संकलन और संवर्धन शुरू हुआ था। असम के डिगबोई में हाथियों द्वारा किए जा रहे लदान कार्य के दौरान उनके पैरों में सने पदार्थ से पता चला उक्त स्थान पर तेल है जो प्रचुर मात्रा में शताब्दी से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बाद भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है।
भारत में दो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा ऑयल वितरण कार्य किया गया ओएनजीसी और वर्मा ऑयल। अवगत कराया गया, वर्तमान में ऊर्जा के क्षेत्र में कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कार्य कर रहे हैं। कच्चा तेल रिफाइंड कर हमारा देश उसे निर्यात भी करता है, उक्त ऑयल का कुछ भाग फर्टिलाइजर में भी लगता है। ओएनजीसी के माध्यम से बाहरी पंद्रह देशों में कुछ ब्लॉक हैं जहां हमने तेल खोजा है।
मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता ओएनजीसी सेवानिवृत निर्देशक सुषमा रावत द्वारा कहा गया, उत्तराखंड अंचल से उनका बड़ा जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा, बिजली उत्पादन में 74 फीसद एनर्जी में कोयले की प्रमुख भूमिका रही है। सोलर कूकर से सौर ऊर्जा संकलन और संवर्धन शुरू हुआ था। असम के डिगबोई में हाथियों द्वारा किए जा रहे लदान कार्य के दौरान उनके पैरों में सने पदार्थ से पता चला उक्त स्थान पर तेल है जो प्रचुर मात्रा में शताब्दी से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बाद भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है।
भारत में दो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा ऑयल वितरण कार्य किया गया ओएनजीसी और वर्मा ऑयल। अवगत कराया गया, वर्तमान में ऊर्जा के क्षेत्र में कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कार्य कर रहे हैं। कच्चा तेल रिफाइंड कर हमारा देश उसे निर्यात भी करता है, उक्त ऑयल का कुछ भाग फर्टिलाइजर में भी लगता है। ओएनजीसी के माध्यम से बाहरी पंद्रह देशों में कुछ ब्लॉक हैं जहां हमने तेल खोजा है।
एक जमाने में ओएनजीसी में विभिन्न तकनीक वर्ग के करीब 46 हजार कर्मचारी कार्यरत थे। ओएनजीसी ग्रुप ऑफ कम्पनीज है जिसमें चौदह कंपनियां हैं। ये सब इंटीग्रेटेड एनर्जी कम्पनिया हैं। ओएनजीसी ग्रीन में सोलर है। कई देशों व देश के राज्यों में कार्य हेतु कंपनी ने हाथ बढ़ाया है।
हिमालयी क्षेत्रों के निचले स्थानों में ढाई से तीन डिग्री तक का तापमान बढ़ता है। सौर ऊर्जा में सूर्य के रहने तक ऊर्जा मिलती है। ओएनजीसी में ग्यारह अन्य कंपनियां हैं जो आरएंडडी रिफाईनरी नहीं करते हैं। कुछ ही रिफाइनरीज आरएंडडी करते हैं। बताया गया, विंड एनर्जी रिनोभल है जिसमें स्पीड जरूरी है।
सुषमा रावत द्वारा कहा गया, अर्थव्यवस्था की सिक्युरिटी व देश का सम्मान बनाए रखने हेतु जरूरी है जागरूकता। अवगत कराया गया, यह ईको सिस्टम है जो राष्ट्र के भविष्य के लिए जुड़ा हुआ है। अवगत कराया गया, वे उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में जियोथर्मल के लिए गई थी जहां कार्य हो रहा है। भू-तापीय (जियोथर्मल) ऊर्जा की अपार संभावनाएं उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में हैं।
हिमालयी क्षेत्रों के निचले स्थानों में ढाई से तीन डिग्री तक का तापमान बढ़ता है। सौर ऊर्जा में सूर्य के रहने तक ऊर्जा मिलती है। ओएनजीसी में ग्यारह अन्य कंपनियां हैं जो आरएंडडी रिफाईनरी नहीं करते हैं। कुछ ही रिफाइनरीज आरएंडडी करते हैं। बताया गया, विंड एनर्जी रिनोभल है जिसमें स्पीड जरूरी है।
सुषमा रावत द्वारा कहा गया, अर्थव्यवस्था की सिक्युरिटी व देश का सम्मान बनाए रखने हेतु जरूरी है जागरूकता। अवगत कराया गया, यह ईको सिस्टम है जो राष्ट्र के भविष्य के लिए जुड़ा हुआ है। अवगत कराया गया, वे उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में जियोथर्मल के लिए गई थी जहां कार्य हो रहा है। भू-तापीय (जियोथर्मल) ऊर्जा की अपार संभावनाएं उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में हैं।
इस अवसर पर पत्रकारों, संस्कृति कर्मियों को भगत सिंह कोश्यारी, सुषमा रावत के कर कमलों "ऊर्जा सुरक्षा सम्मान 2026" से नवाजा गया। सम्मान प्राप्त करने वालो में हरीश चंद्र उपाध्याय, सुनील नेगी, द्वारका प्रसाद चमोली, सुजीत ठाकुर, राजू बोरा, हरीश असवाल, हरीश गोला, रंजना गुप्ता, तरुण पंत, मदन मोहन सती, स्वाति पहाड़ी, महेंद्र लटवाल, धन लक्ष्मी महतो, रिया शर्मा, बबली अधिकारी, रोशनी चमोली, दयाल सिंह नेगी, संजय आर्या, प्रताप थलवाल इत्यादि। मंच संचालन नीरज बवाड़ी द्वारा किया गया।
आयोजित सेमिनार को प्रभावी बनाने हेतु निम्मी ठाकुर, पत्रकार सी एम पपनै, डॉ. के सी पांडे, मदन मोहन सती, हरीश असवाल, प्रताप थलवाल, दुर्गा सिंह भंडारी, रश्मि सिंह, नीरा झा, कल्पना पाठक, कांति चौहान, मयंक रहे।
आयोजित सेमिनार को प्रभावी बनाने हेतु निम्मी ठाकुर, पत्रकार सी एम पपनै, डॉ. के सी पांडे, मदन मोहन सती, हरीश असवाल, प्रताप थलवाल, दुर्गा सिंह भंडारी, रश्मि सिंह, नीरा झा, कल्पना पाठक, कांति चौहान, मयंक रहे।
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