क्रेडाई ने किया राज्य सरकार द्वारा की गई डीएलसी दरों में 40% की वृद्धि का विरोध

० आशा पटेल ० 
जयपुर | क्रेडाई ने राज्य सरकार द्वारा डी.एल.सी. दरों में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि करने को अन्यायपूर्ण कदम बताया है | आमतौर पर डी.एल.सी. दरों का निर्धारण कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा विभिन्न स्थानो पर अचल संपत्ति के वास्तविक बाजार मूल्यों का अवलोकन करके किया जाता है, किन्तु इस बार यह वृद्धि बिना गुण दोषों का अवलोकन करे सभी स्थान की आवासीय / वाणिज्यिक एंव अन्य सम्पत्तियों के मूल्यांकन हेतु बढाई जा रही है जो कि असंगत है एंव प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है।
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 के बजट मे डी.एल.सी. दरों मे 10 प्रतिशत वृद्धि की जा चुकी है, जो 01.04.2024 से प्रभावी हुई, इसके पश्चात 10.10.2025 को सड़क की चौडाई के अनुसार डी.एल.सी दरों में क्रमशः 10% 15% एवं 20% तक वृद्धि की जा चुकी है। इसके अलावा निर्माण दरों में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि राज्य सरकार द्वारा की गई है, जिसका सीधा प्रभाव स्टॉम्प ड्यूटी पर पड़ रहा है। इस प्रकार राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 से लगातार डी.एल.सी. दरों से अप्रत्याशित वृद्धि की जा चुकी है जिससे ना सिर्फ रियल एस्टेट उद्योग बल्कि आमजन भी प्रभावित हुए है।

रियल एस्टेट उद्योग कृषि के बाद सबसे बड़ा ऐसा उद्योग है जो कि कुशल एंव अकुशल श्रमिकों को ना सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराता है बल्कि रियल एस्टेट उद्योग से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से 381 से अधिक छोटे बड़े उद्योग सीधे प्रभावित होते है।

केड़ाई राजस्थान के चेयरमैन अनुराग शर्मा ने कहा कि वर्तमान में खाडी युद्ध के परिपेक्ष्य में बढती निर्माण लागत के कारण रियल एस्टेट उद्योग भारी चुनौतीयों का सामना कर रहा है और ऐसे चुनौतीपूर्ण काल में अगर डी.एल.सी. दरें असंगत और बिना किसी ठोस विश्लेषण के बढाई जाती है तो रियल एस्टेट उद्योग में भारी मंदी आएगी जिससे ना सिर्फ रोजगार के अवसर घटेगें बल्कि राज्य सरकार को होने वाली आय में भी भारी गिरावट आने का अंदेशा है।

उन्होने बताया कि राजस्थान सरकार ने वर्ष 2024-25 में स्टांप ड्यूटी एंव रजिस्ट्रेशन मद से रू. 10,542/- करोड़ की आमदनी प्राप्त की है और चालू वित्त वर्ष में रू. 15,000/- करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रियल एस्टेट उद्योग का सुचारू संचालन बहुत आवश्यक है और डी.एल.सी. दरों को अगर अतार्किक रूप से बढवाया जाता है तो रियल एस्टेट उद्योग प्रभावित होगा और राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकेगा। 
 साथ ही साथ राज्य सरकार के आमजन को राहत उपलब्ध करवाने हेतु, शहरी सेवा शिविरो का आयोजन किया जा रहा है उसमें आम नागरिक को मिलने वाले पट्टे में भी अत्यधिक शुल्क लगेगा जिससे आमजन को काफी नुकसान होगा।

केड़ाई राजस्थान के अध्यक्ष रविन्द्र प्रताप सिंह ने बताया की डी. एल.सी. दरों से आमजन सीधे प्रभावित होता है क्योंकि ज्यादातर कर एंव शुल्कों का निर्धारण डी.एल.सी. दरों को आधार मानकर ही विभिन्न विभागों द्वारा लिया जाता है इसलिए अगर डी.एल.सी. दरों में वृद्धि की जाती है तो आमजन पर करों का अतिरिक्त बोझ आएगा। उन्होने बताया कि राज्य के विकास के लिए आवश्यक है कि ज्यादा से ज्यादा करों को सरल एंव व्यावहारिक बनाया जाए और अन्य विकसित राज्यों में जो विकास का मॉडल है उसी अनुरूप डी.एल.सी. दरों को अनुकूल बनाते हुए लागू किया जाए।

केड़ाई राजस्थान के महासचिव आशीष अग्रवाल ने बताया कि पूर्व में राज्य सरकारों द्वारा जब भी डी.एल.सी. दरों में वृद्धि की जाती थी तो केड़ाई राजस्थान के प्रतिनिधियों के साथ जन प्रतिनिधियों के सुझाव भी लिए जाते थे ताकि होने वाली वृद्धि व्यावहारिक हो किन्तु इस बार ऐसा हो रहा है कि जन प्रतिनिधियों से राय लिए बिना ही डी.एल.सी. दरों में वृद्धि किया जाना प्रस्तावित है जो कि स्थापित सिद्धातों के विरूद्ध है।

केड़ाई राजस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार एक ओर राईजिंग राजस्थान के माध्यम से राज्य में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है वहीं दूसरी ओर डी.एल.सी. दरों को बढाकर लागत बढा रही है जिससे राज्य में होने वाला निवेश प्रभावित होगा।

केड़ाई राजस्थान के वाईस चेयरमैन राजेन्द्र सिंह पचार ने बताया कि राजस्थान में वर्तमान में स्टांप ड्यूटी बहुत अधिक है और उसके ऊपर 1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता है जिसकी पूर्व में अधिकतक सीमा रू.2,00,000/- थी किन्तु अब ये पूरी वेल्यू का 1 प्रतिशत है और उस पर किसी भी प्रकार की केपिंग नहीं है। यह रजिस्ट्रेशन शुल्क किसी भी अन्य राज्य में इस प्रकार का नहीं है और इस वजह से क्रेता पर 1 प्रतिशत अधिक कर देने का भार पड़ रहा है जिसे राज्य सरकार को जनहित में जल्द से जल्द संशोधित करना चाहिए।

केड़ाई राजस्थान के प्रवक्ता मदन यादव ने बताया कि डी.एल. सी. दरों के बढने से आमजन को भारी नुकसान होगा उसे अपने घर के लिए ना सिर्फ अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा बल्कि कई जगह अव्यवहारिक डी.एल.सी. दरों के कारण आयकर एक्ट के प्रावधानों के कारण अतिरिक्त टेक्स का भी भुगतान करना पड़ेगा। 

केड़ाई राजस्थान के कोषाध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल ने राज्य सरकार से यह माँग की है कि डी.एल.सी. दरों को बढाने से पहले सभी क्षेत्रों का प्रचलित बाजार मूल्यों के आधार पर विस्तृत सर्वे करवाए एंव जन प्रतिनिधियों की राय लेकर ही डी.एल.सी. दरों का निर्धारण करें। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर यह आवश्यक है कि राज्य सरकार रोजगार एंव राजस्व उपलब्ध करवाने वाले रियल एस्टेट उद्योग का संरक्षण करे।

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