भारत अमरीका ट्रेड डील के खिलाफ आरपार का संघर्ष करेगा एसकेएम

० आशा पटेल ० 
मुलताई | किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 343वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। पंचायत में विभिन्न राज्यों से जुड़े किसान नेताओं ने किसानों को एमएसपी (सी2+50%) पर खरीद की कानूनी गारंटी, संपूर्ण कर्जमुक्ति, 22 जुलाई को "एफटीए विरोधी किसान संकल्प दिवस", 28 जुलाई को नई दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का अखिल भारतीय सम्मेलन, 
29 जुलाई को एसकेएम–सीटीयू के राष्ट्रीय मजदूर–किसान सम्मेलन, 10 अगस्त को 'भारत छोड़ो आंदोलन' की स्मृति में 'जेल भरो आंदोलन', शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तथा जंतर-मंतर पर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक एवं छात्र-छात्राओं के आंदोलन के समर्थन सहित अनेक समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की।
किसान पंचायत को महाराष्ट्र से अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीरसागर, हरियाणा से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, अलीगढ़ से क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत, हरियाणा से राष्ट्रीय किसान मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष हरजिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ से भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, हरियाणा से भाकियू (नैन) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह नैन, अकोला (महाराष्ट्र) से शेतकरी विकास मंच के हुसैन खान, भोपाल से किसान जागृति संगठन के प्रमुख इरफान जाफरी,

 संकिमो सिवनी के संयोजक डी.डी. वासनिक, सागर से भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर, रीवा से किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड. शिवसिंह, छिंदवाड़ा से प्रदेश अध्यक्ष एड. आराधना भार्गव, ग्वालियर से प्रदेश सचिव शत्रुघ्न यादव, सिंगरौली से जिला अध्यक्ष एड. अशोक सिंह पैगाम सहित अनेक किसान नेताओं ने संबोधित किया।

किसान पंचायत को संबोधित करते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा कि देश के किसानों पर मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के माध्यम से तीन कृषि कानूनों से भी बड़ा हमला किया जा रहा है। जिस तरह संयुक्त किसान मोर्चा ने 380 दिन तक आंदोलन चलाकर 750 किसानों की कुर्बानी देकर तीन किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार को मजबूर किया था, उसी तर्ज पर किसान सरकार पर दबाव डालकर ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने से रोकेंगे यदि सरकार ने हस्ताक्षर कर भी दिए तो ट्रेड दिल को रद्द करेंगे।

अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीरसागर ने कहा कि भारत सरकार अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर चुकी है और अब अंतिम समझौते की तैयारी कर रही है। यह समझौता किसानों पर तीन कृषि कानूनों से भी बड़ा हमला साबित होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जबकि भारत में किसानों को एमएसपी तक नहीं मिलती, जिससे उन्हें हर वर्ष लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है।

 यही कारण है कि किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए देश के किसानों की बलि दी जा रही है। इंद्रजीत सिंह ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते के बाद देश में जीएम बीजों का प्रसार बढ़ेगा, जो स्वास्थ्य, पर्यावरण और किसानों की आत्मनिर्भरता के लिए गंभीर खतरा है। शशिकांत ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का दुष्प्रभाव केवल किसानों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि देश के छोटे उद्योग धंधे भी बर्बाद हो जाएंगे।

एड. शिवसिंह ने कहा कि प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक छात्रों के मुद्दों को लेकर पिछले 14 दिनों से अनशन पर हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी पूरी तरह उपेक्षा कर रही है।
जोगिंदर सिंह नैन ने कहा कि केंद्र सरकार हरियाणा और राजस्थान के किसानों को पानी के मुद्दे पर आपस में लड़ाने की कोशिश कर रही है, जबकि आजादी के 78 वर्ष बाद भी देश के नागरिकों को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका है |

तेजराम विद्रोही ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आगामी कार्यक्रमों को प्रदेश की राजधानियों में भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि आंदोलन की व्यापकता बढ़े। हरजिंदर सिंह ने कहा कि भारत में खेती कभी जीवन और आजीविका का आधार थी, लेकिन सरकारों की नीतियों ने इसे केवल व्यापार का माध्यम बना दिया है।

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