जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता : सचिन पायलट
० आशा पटेल ०
राजस्थान, बांसवाड़ा, कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व उप मुख्य्मंत्री सचिन पायलट ने ग्राम पोटलिया (कुशलगढ़, बांसवाड़ा) में पूर्व प्रधान स्व हुरतिंग खड़िया की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। सचिन पायलट कुशलगढ़ विधायक रमिला खड़िया के पोटलिया स्थित निवास पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने पूर्व प्रधान स्व. हुरतिंग खड़िया की 9वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर शांति यज्ञ, स्वैच्छिक रक्तदान शिविर और निःशुल्क हृदय रोग जांच शिविर का आयोजन किया गया।इस दौरान कुशलगढ़ विधायक रमिला खड़िया, बांसवाड़ा कांग्रेस जिलाध्यक्ष और विधायक अर्जुन सिंह बामणिया, पूर्व मंत्री महेंद्रजीत मालवीय , विधायक नानालाल निनामा, उदयपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रघुबीर मीणा, पूर्व सांसद ताराचंद भगौरा, विधायक अनीता जाटव एवं हजारों की संख्या में किसान एवं कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।सचिन पायलट ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम स्व हुरतिंग खड़िया को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम था। पिछले दो-तीन सालों में कई बार मेरा यहाँ आने का कार्यक्रम बना, लेकिन किसी कारणवश मैं नहीं आ सका। लेकिन आज कुशलगढ़ आकर, बांसवाड़ा में इस जिले में क्षेत्र में आप लोगों से मुलाकात हुई। इतनी बड़ी संख्या में आप लोग यहाँ श्रद्धांजलि देने के लिए आए हैं। कांग्रेस पार्टी की जड़ों को, उसकी नींव को और मजबूत करने के लिए जो काम इस परिवार ने किया है, उसके लिए सचमुच मैं अपनी तरफ से बहुत-बहुत साधुवाद देना चाहता हूँ रमिला को भी और पूरे परिवार को, जिनकी बदौलत आज यहाँ पर कांग्रेस मजबूत है। अभी बताया कि किसानों के क्या हालात बने हुए हैं। रोजगार को लेकर दोनों जयपुर और दिल्ली में जो 'डबल इंजन' की सरकार चल रही है.। इंजन तो डबल है, लेकिन इसमें तेल जो है वो इथेनॉल वाला है ! वो ऐसा तेल है कि इंजन में डालो तो सिर्फ धुआं फेंकता है। और यह बात अब साबित हो चुकी है।
12 साल से आपकी सरकार दिल्ली में है, केंद्र में है। और इस बार जो जनता से वादा किया था कि "400 पार, 400 पार"... आई कितनी ? लोकसभा की सिर्फ 240 सीटें ! और 240 सीटें आने के बाद, अब चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की दो बैशाखियों को लेकर सरकार चल रही है। ऐसा प्रतीत नहीं होता, लेकिन हकीकत यह है कि यह बहुमत की सरकार नहीं है। यह दो दलों के साथ मिलकर बहुमत पर आए हैं। जिस दिन भी इन दोनों में से किसी एक ने बैशाखी खींच ली, सरकार गिर जाएगी। लेकिन सरकार को चलाने के लिए जो बहुमत चाहिए, वो फिलहाल उन्होंने जुटा लिया है।अब सवाल यह है कि पिछले डेढ़ साल से देश में जितनी पार्टियां हैं, आप सब देखते हो चाहे महाराष्ट्र में शिवसेना हो या एनसीपी हो। अभी बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी के सांसदों को अपनी तरफ खींच रहे हैं। इसका कारण अगर आप देखोगे तो समझ में आएगा कि यह सरकार और भारतीय जनता पार्टी, अपना राजनीतिक हित साधने के लिए यह काम कर रही है ।
जो बहुमत देश की जनता ने इन्हें नहीं दिया 240 के अंदर रोक दिया, दो तिहाई का बहुमत जो संविधान में संशोधन करने के लिए चाहिए था वो जनता ने नहीं दिया। अब ये 240 सीटें पाकर अलग-अलग पार्टियों के सांसदों को लेकर एक वैकल्पिक बहुमत बनाना चाहते हैं, ताकि वो संसद के अंदर मनमाने नियम-कानून पारित कर सकें और संविधान में संशोधन कर सकें।
जो बहुमत देश की जनता ने इन्हें नहीं दिया 240 के अंदर रोक दिया, दो तिहाई का बहुमत जो संविधान में संशोधन करने के लिए चाहिए था वो जनता ने नहीं दिया। अब ये 240 सीटें पाकर अलग-अलग पार्टियों के सांसदों को लेकर एक वैकल्पिक बहुमत बनाना चाहते हैं, ताकि वो संसद के अंदर मनमाने नियम-कानून पारित कर सकें और संविधान में संशोधन कर सकें।
हमारी सरकार के समय मनरेगा, सूचना का अधिकार (RTI), शिक्षा का अधिकार (RTE) और खाद्य सुरक्षा का अधिकार जैसे कानून लोगों के भले के लिए लाए गए थे और संविधान में संशोधन किया गया था। लेकिन ये लोग क्या संशोधन करना चाहते हैं ? यही वजह है कि आज लोगों के मन में यह अविश्वास पैदा हो गया है कि यह जो बीजेपी की सरकार है, यह दलितों और आदिवासियों से कहीं न कहीं बदला लेना चाहती है। संविधान को बदलने की बात ये पिछले दो साल से कर रहे हैं।
अब ये लोग कह रहे हैं कि अगले साल देश में जनगणना होगी। और देश में जनगणना होने से पहले ही, ये पूरे लोकसभा और विधानसभा का परिसीमन करना चाहते हैं। ये अपनी मर्जी से क्षेत्रों को काटना और जोड़ना चाहते हैं। ये गैर-कानूनी परिसीमन करके, अपने फायदे के अनुसार कानून के अंदर बदलाव करना चाहते हैं। इसीलिए तो सवाल उठता है कि आखिर इसकी क्या जरूरत आ पड़ी है?
ममता बनर्जी के 25 सांसद और शिवसेना के 8 सांसद क्यों इसलिए लिये इनके पास सरकार चलाने और बजट पास कराने के लिए तो बहुमत है, लेकिन संविधान में संशोधन करने के लिए देश में परिसीमन लागू करके, जहाँ-जहाँ कांग्रेस का गढ़ रहा है, जिन-जिन राज्यों और जिलों में कांग्रेस मजबूत है, वहाँ ये छेड़छाड़ करना चाहते हैं। कभी किसी क्षेत्र को आरक्षित कर देंगे, तो कभी किसी को तोड़ देंगे। यह सरकार पूरी तरह से एक साजिशपूर्ण तरीके से काम कर रही है।
इस सरकार का ध्यान असल मुद्दों पर नहीं है। आज पूरे देश में NEET परीक्षा में लाखों बच्चों के साथ धोखा हुआ है, पेपर लीक हो गया। लेकिन शिक्षा मंत्री का कोई इस्तीफा नहीं आया। लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। मुझे बताया गया कि पिछले 10 साल में करीब 85 पेपर लीक हो चुके हैं।
देश के अंदर सैकड़ों बच्चों ने आत्महत्या कर ली। वो नौजवान बच्चे-बच्चियां जो पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहते हैं, उनके साथ आप धोखा करते हो। वे हताश होकर आत्महत्या कर रहे हैं, और आपको कोई फर्क नहीं पड़ता! आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है, कोई दोषी नहीं है बस एक जांच बिठा दी। जांच से क्या हुआ ? दो साल पहले भी यही हुआ था, सीबीआई की जांच हुई थी। लेकिन आपने किसको जेल में डाला ? किसका इस्तीफा लिया ? जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता,
आज प्रधानमंत्री दुनिया भर में घूम रहे हैं। और अयोध्या में जो मंदिर के चंदे का पैसा है, उसमें चंपत राय 'चंपत' कर गए किसी को पता ही नहीं चला! जो आम आदमी दान-पुण्य करता है, दानपेटी में अपनी श्रद्धा भाव से दो, पांच या 1000 रुपये डालता है, वो भगवान राम में अपनी गहरी आस्था से डालता है। मंदिर एक पवित्र प्रांगण है, जहाँ दान-पुण्य का काम हर व्यक्ति अपनी हैसियत के हिसाब से करता है। इसलिए इसका पूरा हिसाब होना चाहिए। लेकिन यहाँ तो चंदे की ही चोरी हो गई, आप चंदा चोरी करोगे?
ममता बनर्जी के 25 सांसद और शिवसेना के 8 सांसद क्यों इसलिए लिये इनके पास सरकार चलाने और बजट पास कराने के लिए तो बहुमत है, लेकिन संविधान में संशोधन करने के लिए देश में परिसीमन लागू करके, जहाँ-जहाँ कांग्रेस का गढ़ रहा है, जिन-जिन राज्यों और जिलों में कांग्रेस मजबूत है, वहाँ ये छेड़छाड़ करना चाहते हैं। कभी किसी क्षेत्र को आरक्षित कर देंगे, तो कभी किसी को तोड़ देंगे। यह सरकार पूरी तरह से एक साजिशपूर्ण तरीके से काम कर रही है।
इस सरकार का ध्यान असल मुद्दों पर नहीं है। आज पूरे देश में NEET परीक्षा में लाखों बच्चों के साथ धोखा हुआ है, पेपर लीक हो गया। लेकिन शिक्षा मंत्री का कोई इस्तीफा नहीं आया। लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। मुझे बताया गया कि पिछले 10 साल में करीब 85 पेपर लीक हो चुके हैं।
देश के अंदर सैकड़ों बच्चों ने आत्महत्या कर ली। वो नौजवान बच्चे-बच्चियां जो पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहते हैं, उनके साथ आप धोखा करते हो। वे हताश होकर आत्महत्या कर रहे हैं, और आपको कोई फर्क नहीं पड़ता! आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है, कोई दोषी नहीं है बस एक जांच बिठा दी। जांच से क्या हुआ ? दो साल पहले भी यही हुआ था, सीबीआई की जांच हुई थी। लेकिन आपने किसको जेल में डाला ? किसका इस्तीफा लिया ? जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता,
आज प्रधानमंत्री दुनिया भर में घूम रहे हैं। और अयोध्या में जो मंदिर के चंदे का पैसा है, उसमें चंपत राय 'चंपत' कर गए किसी को पता ही नहीं चला! जो आम आदमी दान-पुण्य करता है, दानपेटी में अपनी श्रद्धा भाव से दो, पांच या 1000 रुपये डालता है, वो भगवान राम में अपनी गहरी आस्था से डालता है। मंदिर एक पवित्र प्रांगण है, जहाँ दान-पुण्य का काम हर व्यक्ति अपनी हैसियत के हिसाब से करता है। इसलिए इसका पूरा हिसाब होना चाहिए। लेकिन यहाँ तो चंदे की ही चोरी हो गई, आप चंदा चोरी करोगे?
मैं दो दिन पहले आगरा गया था, तो मुझे वहाँ बताया गया कि जो एफआईआर (FIR) हुई है, उसमें ट्रस्ट के किसी जिम्मेदार व्यक्ति का नाम नहीं है! उसमें एक चपरासी का नाम है, एक ड्राइवर का नाम है और एक छोटे कर्मचारी का नाम है। अब इंजन 'डबल' है—लखनऊ में भी है और दिल्ली में भी है। आपकी नाक के नीचे जिन लोगों को आपने नियुक्त किया, ये चंपत राय जी कोई चुनाव जीतकर नहीं आए थे।
इन्हें राम मंदिर ट्रस्ट का पदाधिकारी बनाया गया और जब चोरी पकड़ी गई, तो पता नहीं कितने अरबों-खरबों का घपला होगा! आप सोचो, इससे बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता कि आप मंदिर के पैसे को चुरा रहे हो। लोगों के अंदर आपकी क्या नीयत है? किस मुंह से आप जनता के बीच वोट मांगने जाते हो? मैं ये बातें इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि इस देश में जो चल रहा है, उसे लोग देख और समझ तो रहे हैं, लेकिन खुलकर सुनना भी जरूरी है।
आज इन्होंने मनरेगा को बंद कर दिया। अभी महाराष्ट्र में चुनाव हुए, बिहार में जब चुनाव हुए तो चलते चुनाव के दौरान इन्होंने घोषणा करी कि महिलाओं के अकाउंट में 8000और 10000 रुपए डालेंगे आचार संहिता लागू होने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने कहा कोई बात नहीं, आप कर सकते हो। महाराष्ट्र और बिहार में बिल्कुल ऐसा ही किया गया। क्योंकि वहाँ चुनाव आ रहे थे। ये बात तो एक बच्चा भी समझता है कि चुनाव से ठीक पहले अगर कोई मेरे खाते में पैसा डाल रहा है, तो वो किसलिए दे रहा है—साफ है कि वो वोट के लिए दे रहा है!
मैं तो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूँ कि अगर आपको देश की महिलाओं के प्रति इतना ही प्रेम है, तो राजस्थान की महिलाओं ने क्या पाप किया है? यहाँ भी वैसी ही योजनाएं चालू कर दो और महिलाओं के खातों में पैसे डालो। चुनाव का इंतजार मत करो, लोगों को दो-दो साल तक इंतजार मत कराओ। लाडली बहना या पता नहीं कौन-कौन सी योजनाएं बनाई हैं, उनके खाते में पैसा डालो। एक तरफ तो आप लोगों के बीच मनरेगा बंद कर देते हो, राहत के नाम पर कुछ नहीं है और महंगाई इतनी बढ़ा रखी है।
आज देश के हालात क्या बन गए हैं ? अमेरिका भारत को बोलता है कि तुम रूस से तेल नहीं खरीदोगे, अमेरिका बोलता है कि तुम हमसे 5000 करोड़ का माल खरीदोगे। देश में खाद सामग्री और तेल की जो किल्लत पैदा हो रही है, उस पर भारत सरकार को मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए था। हम किसी से डरने वाले देश नहीं हैं। लेकिन पहली बार विदेश नीति में ऐसा हो रहा है—हिंदुस्तान-पाकिस्तान का तो ' ऑपरेशन'सिंदूर चल रहा है और युद्धविराम की घोषणा कौन करता है ?
आज इन्होंने मनरेगा को बंद कर दिया। अभी महाराष्ट्र में चुनाव हुए, बिहार में जब चुनाव हुए तो चलते चुनाव के दौरान इन्होंने घोषणा करी कि महिलाओं के अकाउंट में 8000और 10000 रुपए डालेंगे आचार संहिता लागू होने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने कहा कोई बात नहीं, आप कर सकते हो। महाराष्ट्र और बिहार में बिल्कुल ऐसा ही किया गया। क्योंकि वहाँ चुनाव आ रहे थे। ये बात तो एक बच्चा भी समझता है कि चुनाव से ठीक पहले अगर कोई मेरे खाते में पैसा डाल रहा है, तो वो किसलिए दे रहा है—साफ है कि वो वोट के लिए दे रहा है!
मैं तो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूँ कि अगर आपको देश की महिलाओं के प्रति इतना ही प्रेम है, तो राजस्थान की महिलाओं ने क्या पाप किया है? यहाँ भी वैसी ही योजनाएं चालू कर दो और महिलाओं के खातों में पैसे डालो। चुनाव का इंतजार मत करो, लोगों को दो-दो साल तक इंतजार मत कराओ। लाडली बहना या पता नहीं कौन-कौन सी योजनाएं बनाई हैं, उनके खाते में पैसा डालो। एक तरफ तो आप लोगों के बीच मनरेगा बंद कर देते हो, राहत के नाम पर कुछ नहीं है और महंगाई इतनी बढ़ा रखी है।
आज देश के हालात क्या बन गए हैं ? अमेरिका भारत को बोलता है कि तुम रूस से तेल नहीं खरीदोगे, अमेरिका बोलता है कि तुम हमसे 5000 करोड़ का माल खरीदोगे। देश में खाद सामग्री और तेल की जो किल्लत पैदा हो रही है, उस पर भारत सरकार को मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए था। हम किसी से डरने वाले देश नहीं हैं। लेकिन पहली बार विदेश नीति में ऐसा हो रहा है—हिंदुस्तान-पाकिस्तान का तो ' ऑपरेशन'सिंदूर चल रहा है और युद्धविराम की घोषणा कौन करता है ?
ट्रंप अमेरिका में बैठे-बैठे कर रहा है! ट्रंप कौन होते हैं? युद्धविराम की घोषणा करने वाला अमेरिका का राष्ट्रपति कौन होता है? ये लोग भाषण अलग देते हैं और धरातल पर हकीकत कुछ दूसरी ही है। इन बातों पर आपको ध्यान देना पड़ेगा। आज हम जिस जिले में खड़े हैं, यह बागड़ का क्षेत्र है—बांसवाड़ा, डूंगरपुर। यह हमेशा से कांग्रेस का जिला रहा है। और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि हमारे बीच कुछ दूरियां आ गई थीं।
बड़ी बात यह है कि दो भाई भी अगर अलग-अलग शहरों में रहते हैं, आपस में मिलते नहीं हैं, संबंध नहीं बनाते और एक-दूसरे का हालचाल नहीं पूछते, सुख-दुख में शामिल नहीं होते, तो दूरियां बढ़ ही जाती हैं। इस जिले के लोगों के साथ, खासकर हमारे आदिवासी भाई-बहनों के साथ कुछ दूरियां पैदा हो गई थीं, इस हकीकत को हमें स्वीकार करना चाहिए।
आज मैं देखता हूँ कि समाज में सबसे ज्यादा पीड़ित, शोषित, परेशान और अंतिम पंक्ति में सबसे पीछे कौन खड़ा है? वहाँ हमारे दलित और आदिवासी भाई-बहन ही खड़े हैं। अमीर और गरीब की खाई बहुत ज्यादा बढ़ गई है। सरकार ने चंद लोगों के हाथ में लाखों-करोड़ों रुपये सौंप दिए है हमारे हवाई अड्डे, हमारी रेलवे लाइन, हमारी खानें, गोदाम और दुनिया भर के संसाधन चंद पूंजीपतियों के हाथ में चले गए हैं। और जो वर्ग पिछड़ रहा है, वो इस देश और प्रदेश के गरीब लोग हैं—किसान, दलित और आदिवासी भाई-बहन है।
इन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए हम लोगों को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। अगर हम सब मिलकर एक सच्ची कोशिश करें, तो इन जिलों के जो गरीब लोग हैं, जिनके लिए कांग्रेस पार्टी ने 60-65 साल तक कानून बनाए, उन्हें आरक्षण दिया, सुविधाएं दीं और मान-सम्मान दिया, हम उनका दिल जीतने में पूरी तरह कामयाब होंगे।
यह क्षेत्र राजस्थान का प्रवेश द्वार है। यह द्वार हमारी पार्टी का इतना भव्य, इतना मजबूत और इतना सुंदर बनेगा कि आने वाले समय में हमारी पार्टी के लिए मिसाल होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि जो भी कमियां रही हैं, उन्हें हम पूरा करेंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे और जन-कल्याण के लिए, खासकर नौजवानों के लिए काम करेंगे।
हमारे जो नौजवान भाई 18 से 35 साल की उम्र के हैं, उनकी बात को सुनना पड़ेगा, समझना पड़ेगा और उनकी उम्मीदों को पूरा करना पड़ेगा। क्योंकि आपने देख ही लिया है, हमारे मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि "किसान तो साल में सिर्फ 20 दिन काम करता है।" पता नहीं वो ऐसी कौन सी किसानी की बात कर रहे हैं जहाँ साल में सिर्फ 20 दिन काम करना पड़ता है! ये लोग सत्ता में आ गए हैं और तरह-तरह की बातें बोल रहे हैं। लेकिन धरातल पर सच्चाई बिल्कुल अलग है। हमारी जो कांग्रेस की सरकार थी, उसने लोगों के लिए जो योजनाएं बनाई थीं—चाहे वो पेंशन हो, दवाई हो या खाद्य सुरक्षा हो.
चाहे मनमोहन सिंह की सरकार हो या राजस्थान की सरकार हो, जब-जब कांग्रेस को मौका मिला है, उसने हमेशा जन-कल्याण और जनता की सेवा में काम किया है। मैं यह मान सकता हूँ कि सरकार चलाने वाले भी इंसान ही होते हैं, इसलिए कुछ कमियां रह गई होंगी, लेकिन हमारी नीयत और नीति हमेशा एक थी।
इसके विपरीत, आज की भाजपा सरकार की नीति तो यह है कि उद्योगपतियों को पैसा दे दो, लोगों की जमीन हड़प लो, नरेगा (मनरेगा) बंद कर दो और आदिवासी व गरीबों को पिछड़ने दो! इनकी नीयत साफ बोलती है कि जिन्होंने इन्हें सत्ता में पहुँचाया है, इन्हें बस उन्हीं पूंजीपतियों की जेबें भरनी हैं और उनका बचाव करना है। देश के सारे संसाधन उनके हाथों में सौंप दिए गए हैं। यही भाजपा और कांग्रेस की नीति व नीयत में मुख्य अंतर है।
आज इस खास मौके पर मैं हमारी बहन रमिला को धन्यवाद देना चाहता हूँ। उनके परिवार ने बहुत मजबूती से इस पूरे क्षेत्र को सींचा है और इतिहास इस बात का गवाह है। इस क्षेत्र में जो भी विकास हुआ है, वो कांग्रेस के शासनकाल के समय ही हुआ है, जिसे रमिला जी ने धरातल पर करके दिखाया है।
आने वाले समय में पंचायत चुनाव होने वाले हैं और विधानसभा चुनाव भी अब सिर्फ दो-ढाई साल दूर हैं। समय बहुत जल्दी निकल जाता है, इसलिए अब हम लोगों को पीछे मुड़कर नहीं देखना है, बल्कि आगे की ओर देखना है। आने वाले समय में हमें अपने इस आंचल के अंदर, परिवारों के अंदर, घरों, तहसीलों, गांवों, जिलों और ब्लॉकों में यानी पूरे राजस्थान के अंदर एक नई शुरुआत करनी है।
आज देश में जिस प्रकार की राजनीति की जा रही है कि "पुलिस भेज दो, इनकम टैक्स भेज दो, जेल में डाल दो, झूठे मुकदमे कर दो और गालियां दे दो"। क्या हम आने वाली पीढ़ी के लिए ऐसा ही माहौल छोड़कर जाना चाहते हैं ? राजनीति तो हम भी करते हैं, कटाक्ष भी करते हैं और सरकार की नीतियों की आलोचना भी करते हैं। हम खुद भी सरकार में रहे हैं।
आज मैं देखता हूँ कि समाज में सबसे ज्यादा पीड़ित, शोषित, परेशान और अंतिम पंक्ति में सबसे पीछे कौन खड़ा है? वहाँ हमारे दलित और आदिवासी भाई-बहन ही खड़े हैं। अमीर और गरीब की खाई बहुत ज्यादा बढ़ गई है। सरकार ने चंद लोगों के हाथ में लाखों-करोड़ों रुपये सौंप दिए है हमारे हवाई अड्डे, हमारी रेलवे लाइन, हमारी खानें, गोदाम और दुनिया भर के संसाधन चंद पूंजीपतियों के हाथ में चले गए हैं। और जो वर्ग पिछड़ रहा है, वो इस देश और प्रदेश के गरीब लोग हैं—किसान, दलित और आदिवासी भाई-बहन है।
इन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए हम लोगों को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। अगर हम सब मिलकर एक सच्ची कोशिश करें, तो इन जिलों के जो गरीब लोग हैं, जिनके लिए कांग्रेस पार्टी ने 60-65 साल तक कानून बनाए, उन्हें आरक्षण दिया, सुविधाएं दीं और मान-सम्मान दिया, हम उनका दिल जीतने में पूरी तरह कामयाब होंगे।
यह क्षेत्र राजस्थान का प्रवेश द्वार है। यह द्वार हमारी पार्टी का इतना भव्य, इतना मजबूत और इतना सुंदर बनेगा कि आने वाले समय में हमारी पार्टी के लिए मिसाल होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि जो भी कमियां रही हैं, उन्हें हम पूरा करेंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे और जन-कल्याण के लिए, खासकर नौजवानों के लिए काम करेंगे।
हमारे जो नौजवान भाई 18 से 35 साल की उम्र के हैं, उनकी बात को सुनना पड़ेगा, समझना पड़ेगा और उनकी उम्मीदों को पूरा करना पड़ेगा। क्योंकि आपने देख ही लिया है, हमारे मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि "किसान तो साल में सिर्फ 20 दिन काम करता है।" पता नहीं वो ऐसी कौन सी किसानी की बात कर रहे हैं जहाँ साल में सिर्फ 20 दिन काम करना पड़ता है! ये लोग सत्ता में आ गए हैं और तरह-तरह की बातें बोल रहे हैं। लेकिन धरातल पर सच्चाई बिल्कुल अलग है। हमारी जो कांग्रेस की सरकार थी, उसने लोगों के लिए जो योजनाएं बनाई थीं—चाहे वो पेंशन हो, दवाई हो या खाद्य सुरक्षा हो.
चाहे मनमोहन सिंह की सरकार हो या राजस्थान की सरकार हो, जब-जब कांग्रेस को मौका मिला है, उसने हमेशा जन-कल्याण और जनता की सेवा में काम किया है। मैं यह मान सकता हूँ कि सरकार चलाने वाले भी इंसान ही होते हैं, इसलिए कुछ कमियां रह गई होंगी, लेकिन हमारी नीयत और नीति हमेशा एक थी।
इसके विपरीत, आज की भाजपा सरकार की नीति तो यह है कि उद्योगपतियों को पैसा दे दो, लोगों की जमीन हड़प लो, नरेगा (मनरेगा) बंद कर दो और आदिवासी व गरीबों को पिछड़ने दो! इनकी नीयत साफ बोलती है कि जिन्होंने इन्हें सत्ता में पहुँचाया है, इन्हें बस उन्हीं पूंजीपतियों की जेबें भरनी हैं और उनका बचाव करना है। देश के सारे संसाधन उनके हाथों में सौंप दिए गए हैं। यही भाजपा और कांग्रेस की नीति व नीयत में मुख्य अंतर है।
आज इस खास मौके पर मैं हमारी बहन रमिला को धन्यवाद देना चाहता हूँ। उनके परिवार ने बहुत मजबूती से इस पूरे क्षेत्र को सींचा है और इतिहास इस बात का गवाह है। इस क्षेत्र में जो भी विकास हुआ है, वो कांग्रेस के शासनकाल के समय ही हुआ है, जिसे रमिला जी ने धरातल पर करके दिखाया है।
आने वाले समय में पंचायत चुनाव होने वाले हैं और विधानसभा चुनाव भी अब सिर्फ दो-ढाई साल दूर हैं। समय बहुत जल्दी निकल जाता है, इसलिए अब हम लोगों को पीछे मुड़कर नहीं देखना है, बल्कि आगे की ओर देखना है। आने वाले समय में हमें अपने इस आंचल के अंदर, परिवारों के अंदर, घरों, तहसीलों, गांवों, जिलों और ब्लॉकों में यानी पूरे राजस्थान के अंदर एक नई शुरुआत करनी है।
आज देश में जिस प्रकार की राजनीति की जा रही है कि "पुलिस भेज दो, इनकम टैक्स भेज दो, जेल में डाल दो, झूठे मुकदमे कर दो और गालियां दे दो"। क्या हम आने वाली पीढ़ी के लिए ऐसा ही माहौल छोड़कर जाना चाहते हैं ? राजनीति तो हम भी करते हैं, कटाक्ष भी करते हैं और सरकार की नीतियों की आलोचना भी करते हैं। हम खुद भी सरकार में रहे हैं।
एक समय था जब पार्लियामेंट के अंदर राजीव गांधी के पास 425 सांसद थे। वो चाहते तो संविधान को 10 बार बदल देते या विपक्ष का नामोनिशान मिटा देते। लेकिन लोकतंत्र में विपक्ष का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि आलोचना को सुनना और उस पर विचार करना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।
लेकिन आज की जो भाजपा सरकार है, उसे प्रदेश और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई मतलब नहीं है। अगर आप अपना मुँह खोलोगे या उनके खिलाफ बोलोगे, तो तुरंत पुलिस का केस, सीबीआई (CBI) का केस या ईडी (ED) का केस लगा दिया जाता है। ये लोग पूरी दुनिया भर का दबाव बनाकर शोषण की राजनीति कर रहे हैं।
इस टकराव की राजनीति को खत्म करने के लिए ही राहुल गांधी जी कहते हैं कि हमें "मोहब्बत की दुकान खोलनी है"। हमें समाज के सभी वर्गों—चाहे अगड़े हों या पिछड़े—सबको साथ लेकर चलना है और एक नए राजस्थान व नए देश का निर्माण करना है। अब वो समय आ गया है।
यहाँ जितने भी लोग बैठे हैं—चाहे कोई पूर्व मंत्री रहा हो, विधायक रहा हो या आगे बनने वाला हो—हम सब मूल रूप से कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। हम में से कोई छोटा या बड़ा नेता नहीं है। हम सभी कार्यकर्ताओं के कंधों पर चढ़कर ही यहाँ तक पहुँचे हैं। इसलिए हमारा जो जमीनी कार्यकर्ता है, वही हमारी सबसे बड़ी और बेहद कीमती अमानत है। हमें अपने कार्यकर्ताओं और नौजवानों को हमेशा अपने साथ जोड़कर रखना है।
इस एकजुटता के संदेश को आप लोग जिले के हर कोने में, बागड़ के हर क्षेत्र में और पूरे राजस्थान में पहुँचाएं। मैं पूरे विश्वास के साथ आपसे कहना चाहता हूँ कि ढाई साल बाद जब जनता को दोबारा मौका मिलेगा, तो कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक बहुमत के साथ राजस्थान में फिर से सरकार बनाएगी। और उस जीत में सबसे आगे नंबर हमारे बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों का होना चाहिए।
लेकिन आज की जो भाजपा सरकार है, उसे प्रदेश और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई मतलब नहीं है। अगर आप अपना मुँह खोलोगे या उनके खिलाफ बोलोगे, तो तुरंत पुलिस का केस, सीबीआई (CBI) का केस या ईडी (ED) का केस लगा दिया जाता है। ये लोग पूरी दुनिया भर का दबाव बनाकर शोषण की राजनीति कर रहे हैं।
इस टकराव की राजनीति को खत्म करने के लिए ही राहुल गांधी जी कहते हैं कि हमें "मोहब्बत की दुकान खोलनी है"। हमें समाज के सभी वर्गों—चाहे अगड़े हों या पिछड़े—सबको साथ लेकर चलना है और एक नए राजस्थान व नए देश का निर्माण करना है। अब वो समय आ गया है।
यहाँ जितने भी लोग बैठे हैं—चाहे कोई पूर्व मंत्री रहा हो, विधायक रहा हो या आगे बनने वाला हो—हम सब मूल रूप से कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। हम में से कोई छोटा या बड़ा नेता नहीं है। हम सभी कार्यकर्ताओं के कंधों पर चढ़कर ही यहाँ तक पहुँचे हैं। इसलिए हमारा जो जमीनी कार्यकर्ता है, वही हमारी सबसे बड़ी और बेहद कीमती अमानत है। हमें अपने कार्यकर्ताओं और नौजवानों को हमेशा अपने साथ जोड़कर रखना है।
इस एकजुटता के संदेश को आप लोग जिले के हर कोने में, बागड़ के हर क्षेत्र में और पूरे राजस्थान में पहुँचाएं। मैं पूरे विश्वास के साथ आपसे कहना चाहता हूँ कि ढाई साल बाद जब जनता को दोबारा मौका मिलेगा, तो कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक बहुमत के साथ राजस्थान में फिर से सरकार बनाएगी। और उस जीत में सबसे आगे नंबर हमारे बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों का होना चाहिए।
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