प्यार रंग गहरा बहुत फीकी होती जंग


होली के त्योहार पर 
करें न हम हुडदंग।
प्यार रंग गहरा बहुत
फीकी होती जंग।।


द्वेष ईर्ष्या लोभ सब 
झगड़े की शुरुआत।
होली खुशियों से भरी
कर लें मीठी बात ।।


जब से जग को लग गया
मैं- मैं -मैं का रोग।
तर्क वितर्क कुतर्क का
अन्तर भूले लोग।।


रंग सभी देते हमें
मनमोहक बर्ताव।
आ होली के रंग से
धो लें सारे घाव।।


होली की अग्नि जले
करूँ बुराई भस्म।
भीतर भी होली जले
सीखूंगी तिलिस्म।।


सुषमा भंडारी


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्पेशल ओलंपिक्स यूनिफाइड बास्केटबॉल 3x3 वर्ल्ड कप भारत ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

महामना मालवीय मिशन,जयपुर द्वारा मालवीय जयंती मनाई

कृष्ण चंद्र सहाय स्मृति समारोह : सवाई सिंह को सहाय स्मृति सम्मान

वरिष्ठ पत्रकार कानाराम कड़वा और कमलेश गोयल को पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

डॉ. नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’ कृत ‘खूब लड़ी मर्दानी’ अंग्रेजी रूपान्तरण का लोकार्पण

पुणे ग्रैंड टूर 2026 भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग रोड रेस की शुरुआत

एमएनआईटी जयपुर एल्युमिनी एसोसिएशन ने किया गोल्डन जुबली व सिल्वर जुबली बैच के पूर्व छात्रों का सम्मान