आज़मगढ़-जौनपुर की घटनाओं का किया जा रहा है साम्प्रदायिकरण

लखनऊ । रिहाई मंच ने आज़मगढ़ सरदहां और जौनपुर के ग्राम भरेठी में वंचित समाज के बीच होने वाली मारपीट और आगज़नी की कड़ी निंदा की और प्रशासन पर साम्प्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। मंच ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं बचा है ऐसे में साम्प्रदायिकरण कर समाज को विभाजित किया जा रहा है।



रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी के चलते संकट में है। जन साधारण के जाति–धर्म के भेद को परे रखकर एक दूसरे की पीड़ा को समझने और आपस में सहायक बनने का अद्भुत नज़ारा देश की सड़कों, महानगरों की गलियों से लेकर गांवों तक ने देखा है। लेकिन इस बीच कुछ अप्रिय घटनाएं भी सामने आईं जिनमें जौनपुर के ग्राम भरेठी और आज़मगढ़ के गांव सरदहां में हाशिए पर खड़े दो समूहों के बीच मारपीट और आगज़नी की घटना खासतौर से उक्त भावना को आहत करने वाली है।


मंच महासचिव ने कहा कि संकट की इस घड़ी में इन घटनाओं के बाद शासन और प्रशासन की भूमिका ऐसी ही अन्य घटनाओं की तुलना में काफी असंतुलित रही है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले इसी तरह की घटना कानपुर में घटित हुई थी लेकिन पुलिस और उत्तर प्रदेश शासन की भूमिका अलग थी। इस मामले में पुलिस की भूमिका एक अपराधिक घटना को साम्प्रदायिक रूप देने जैसी है। जिस तरह से घटना के तुरंत बाद उच्चतम स्तर पर संज्ञान लिया गया और पुलिस को रासुका लगाने के निर्देश सरकार की तरफ से दिए गए उससे राजनीति की गंध आती है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की दमनकारी और भेदभावपूर्ण नीतियों का शिकार रहे दोनों समाज के आमजन एक दूसरे से करीब होने लगे थे। इस घटना का फायदा उठाते हुए वंचित समाज को एक बार फिर एक दूसरे से अलग कर किसी सामूहिक प्रतिरोध की संभावना को खत्म करने का प्रयास किया गया लगता है। रिहाई मंच इन घटनाओं की सूक्ष्मतम जानकारी प्राप्त कर विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा।


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