मंच से उठा सवाल-आखिर कौन है भेड़िया

० अशोक चतुर्वेदी ० 

जयपुरः जवाहर कला केंद्र में पाक्षिक नाट्य योजना के तहत ‘खारू का खरा किस्सा’ नाटक का मंचन किया गया। प्रवीण शेखर के निर्देशन में कहानी मंच पर साकार हुई। नाटक भुवनेश्वर कृत कहानी ‘भेड़िए’ पर आधारित है। जिसका नाट्य रूपांतरण सुमन कुमार ने किया। खारू नामक पात्र के इर्द-गिर्द घूमता नाटक समाज में छिपे भेड़ियों की पड़ताल की तरह है। यूं चलती है कहानी... खारू व उसके पिता ग्वालियर की बांदियों को लेकर सौदे के लिए एक जंगल से गुजरते हैं। भेड़ियों का झुंड उनके पीछे पड़ जाता है। बचाव के लिए बांदियों को भेड़ियों के बीच फेंका जाता है। खारू के पिता बेटे को बचाने के लिए गाड़ी से कूद पड़ते हैं और भेड़ियों को मारते-मारते जान गंवा बैठते हैं। 

यहाॅं दर्शाया गया कि किस तरह संपन्न वर्ग के लोग गरीबों को सामान या आगे बढ़ने का जरिया मात्र मानते हैं। वहीं पिता का प्रेम भी प्रदर्शित होता है। आगे खारू एक बांदी को भेड़ियों में धकेलने से पहले सिहर उठता है, वह बांदी जाने से पहले अपने गहने खारू को दे जाती है। इस दौरान इंसानी लगाव व प्रेम की झलकियाॅं नजर आई। जिजीविषा की बदौलत खारू भेड़ियों को अंगूठा दिखाते हुए आगे निकल जाता है। नाटक में दर्शाया गया कि इंसानों में भी पाश्विकता देखने को मिल सकती हैं।

इन्होंने निभाई अहम भूमिका भास्कर शर्मा ने खारू, सतीश तिवारी ने खारू के पिता, प्रज्ञा वर्मा ने खारू के बेटे का रोल अदा किया। वहीं प्रत्त्यूष वर्सने, अनुज कुमार व अमर सिंह ने भेड़िए और कोमल पाण्डेय ने नटनी की भूमिका निभाई। दिलीप श्रीवास्तव, आयुष केसरवानी, अनुराग तिवारी, सत्यम मिश्रा आदि अन्य पात्रों के रूप में नजर आए। मंच से परे टोनी सिंह, निखिलेश कुमार मौर्य ने लाइट व अमर सिंह ने म्यूजिक की व्यवस्था संभाली।

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