Rajasthan Police Academy ऑल वुमेन दीक्षांत परेड 317 महिला प्रशिक्षुओं ने पूरी की ट्रेनिंग

० आशा पटेल ० 
जयपुर। राजस्थान पुलिस अकादमी में प्रशिक्षणरत 317 महिला कांस्टेबल का दीक्षांत परेड समारोह हुआ,राजस्थान पुलिस की 241 और दूरसंचार विभाग की 76 महिला कांस्टेबल की इस दीक्षांत परेड समारोह के मुख्य अतिथि महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा ने परेड की सलामी ली और इसे महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।
इस मौके पर डीजीपी शर्मा ने परेड का निरीक्षण किया, राष्ट्रीय ध्वज व पुलिस कलर पार्टी का ग्राउंड पर आगमन एवं परेड द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अभिवादन किया गया। रिटायर्ड डीजीपी पीएस बैंस व के.एल.बैरवा, डीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय अग्रवाल, डीजी ट्रेफिक अनिल पालीवाल सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस समारोह में अतिथियों के पहुंचने पर आरपीए निदेशक संजीब कुमार नार्जारी, अतिरिक्त निदेशक शंकर दत्त शर्मा ने स्वागत किया।
डीजीपी शर्मा ने नई न्याय संहिताओं की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन कानूनों को नागरिकों के लिए बनाया गया है। उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा "ये तीनों नए कानून और इनके माध्यम से भारत का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम 21वीं सदी का सबसे बड़ा रिफॉर्म है।" इन कानूनों में तकनीक को समाहित किया गया है ताकि आने वाले 50 वर्षों की चुनौतियों का सामना किया जा सके।
उन्होंने बताया कि इनका पूर्ण क्रियान्वयन होने के बाद किसी भी मामले में सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में फैसला आ सकेगा। नए आपराधिक कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए प्रावधानों को और मजबूत करते हुए एक अलग अध्याय भी जोड़ा गया है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में राजस्थान पुलिस आधुनिकीकरण और नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। 
राजस्थान पुलिस अकादमी वर्तमान परिदृश्य के अनुसार प्रशिक्षण दे रही है और प्रशिक्षुओं को संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करती है। नए आपराधिक कानूनों के संबंध में अकादमी ने विभिन्न कोर्स आयोजित किए हैं और अब तक 1500 से अधिक अनुसंधान अधिकारियों को 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। शर्मा ने कहा कि नए जमाने की तकनीक से राजस्थान पुलिस भी निरंतर अपडेट हो रही है। केंद्र सरकार के आईगोट प्लेटफॉर्म (iGot Platform) 'कर्मयोगी पोर्टल' पर भी राजस्थान पुलिस के लगभग 80,000 पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों ने रजिस्ट्रेशन किया है और वे निरंतर ऑनलाइन कोर्स कर रहे हैं।
डीजीपी शर्मा ने नवीन न्याय संहिताओं के प्रावधानों को जन—जन तक पहुंचाएं। उन्होंने कर्तव्यों की नैतिकता और संवेदनशीलता पर देते हुए कहा कि न्याय सिर्फ़ कानूनी प्रक्रिया नहीं है, पीड़ित को सम्मान देना, तसल्ली से सुनना और जल्द से जल्द राहत देना भी है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि पुलिस सेवा के रूप में मिले गरीब, असहाय, निराश्रित व कमजोर व्यक्ति की सेवा व सहायता करने के अवसर को निरर्थक न होने दें और सही मायनों में जनता की सेवा कर अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करें। 

उन्होंने पुलिसकर्मियों से आह्वान किया कि वे अपने कार्य को अनुकरणीय बनाएँ और अपने परिवार तथा समाज में एक आदर्श बनें। डीजीपी ने पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक से समन्वय रखते हुए कार्य करने की बात कही। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपने कार्य को अनुकरणीय बनाने, नई भाषाएँ सीखने, कंप्यूटर का ज्ञान अच्छा करने और तकनीक को अपने पक्ष में करने की अपील की। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के दौर में साइबर क्राइम की बढ़ती चुनौती को देखते हुए उन्होंने पुलिस को डेटा कलेक्शन, एनालिसिस और साइबर पेट्रोलिंग पर अधिक फोकस करने का निर्देश दिया।

डीजीपी ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और याद दिलाया कि सबसे बड़ा पुरस्कार एक निर्मल अंतरात्मा है। महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। देश की आम जनता के बीच पुलिस की छवि बेहतर बनाने और लोगों की सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। इस अवसर पर 12 महिला प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के अलग-अलग श्रेणियों में श्रेष्ठता हासिल करने पर स्मृति चिन्ह और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया, वहीं राजस्थान पुलिस अकादमी की दो महिला प्रशिक्षकों पुलिस निरीक्षक रजनी मीणा व मीना वर्मा को भी प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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