साहित्य न केवल इतिहास का स्त्रोत है बल्कि इतिहास का निर्धारक तत्व भी है~डाॅ.अविनाश कुमार


जयपुर - राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास एवं भारतीय संस्कृति के मंच हेरोडोट्स सोसायटी द्वारा 'कहानियों के द्वारा इतिहास' विषय पर डाॅ. अविनाश कुमार के विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। डाॅ.अविनाश कुमार, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी, लन्दन विश्वविद्यालय से पोस्ट डाॅक एवं वर्धा विश्वविद्यालय में अध्यापन कर चुके हैं।



वे वर्तमान में वाॅटरएड, भारत के कार्यक्रम एवं नीति निदेशक हैं। संयोजिका डाॅ.नीकी चतुर्वेदी ने विषय प्रवर्तन करते हुए रेखांकित किया कि साहित्य के सृजन में अन्तर्निहित पहचान के गठन के भाव को चिन्हित करके इतिहास को सही अर्थों में समझा जा सकता है। विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रमिला पूनिया ने साहित्य के इतिहास के स्त्रोत के रूप में महत्त्व को बताया। डाॅ.अविनाश कुमार ने अपने व्याख्यान में हिन्दी साहित्य को औपनिवेशिक चुनौती के प्रत्युत्तर रूप में समझाने का प्रयास किया।



राष्ट्रीयता के सृजन में इतिहास और साहित्य के योगदान को उद्धरण सहित प्रस्तुत करते हुए डाॅ. कुमार ने बताया कि किस प्रकार साहित्य न केवल इतिहास का स्त्रोत है बल्कि इतिहास का निर्धारक तत्व भी है। अध्यक्ष डाॅ. संगीता शर्मा ने कहा कि साहित्य के द्वारा इतिहासकार नवीन अध्ययन क्षेत्रों की ओर अग्रसर होते हैं। महेश दायमा ने धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम का समापन किया।


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