सच कहना है कला कलम की


मोहित कुमार


सच कहना है कला कलम की
डरी कहाँ है कला कलम की


भूखे को रोटी दिलवाये
निर्बल को अधिकार दिलाये
कोरे कागज पर चल दे तो
उसको भी अखबार बनाये


कलम समर्थक साक्षरता की
कलम समर्थक बुद्धिमता की
सत्य पक्ष में सदा खड़ी हो
कलम समर्थक जनसत्ता की


वस्तु नहीं उपभोगी कलम है
जन आशा की जननी कलम है
बदलाव का यह साधन है
भाव चरण की मही कलम है


'दिनकर' धारा का तन है
बाबा भीमराव का मन है
अस्त्र-शस्त्र में श्रेय सभी से
निर्बल का ये ही साधन है


लंगडे की लाठी बन जाए
अंधे को रोशनी दिलाये
ऊछ-नीच से ऊपर होकर
सबको सम सम्मान दिलाये


दमन न सहना है कला कलम की
सच कहना है कला कलम की


 


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