संस्कृत बाल साहित्य पर सिम्पोजियम का आयोजन

० योगेश भट्ट ० 
सोनीपत -साहित्य अकादमी, दिल्ली तथा ऋषिहूड विश्वविद्यालय , सोनीपत, हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय संस्कृत बाल साहित्य पर सिम्पोजियम का आयोजन सोनीपत में किया गया । संस्कृत कवि,कथाकार ,गीतकार , ग़जलकार तथा पूर्व कुलपति पद्मश्री ' अभिराज ' राजेन्द्र मिश्र ने संस्कृत बाल साहित्य को लेकर वेदों , पुराणों, धर्मशास्त्रों तथा उपनिषदों के पक्षों पर चर्चा करते हुए आज के प्रसंग में इसके फलसफे पर प्रकाश डाला और कहा कि संस्कृत भाषा के आधुनिक युग में अच्छे बाल साहित्य लिखे जा रहें हैं । लेकिन आज इसे प्रयोग का काल कहा जा सकता है जिस प्रयोगधर्मिता में प्रो सम्पदानन्द मिश्र भी उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं । 
सिम्पोजियम के बीज भाषण में राष्ट्रपति पुरस्कृत विद्वान प्रो सम्पदानन्द मिश्र ने संस्कृत बाल साहित्य की दिशा तथा दशा पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत बाल साहित्य के निर्माण में चल रहे अकादमिक मुद्दों पर भी प्रकाश डाला । साहित्य अकादमी के उप सचिव श्री एन सुरेश बाबू ने अतिथियों का स्वागत करते लोकप्रिय बाल साहित्य पंचतंत्र की भी चर्चा की । सिम्पोजियम के प्रथम सत्र में सुरचना त्रिवेदी , साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त कवि अरविन्द कुमार तिवारी तथा धनंजय शास्त्री ने क्रमशः बाल साहित्य के प्रकार, परिचय तथा अनुवाद साहित्य पर प्रकाश डाला ।

इस सिम्पोजियम के समापन सत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार सम्मानित विद्वान तथा समीक्षक अजय कुमार मिश्रा ने संस्कृत बाल साहित्य के रचनाधर्मिता की समस्या तथा गुणात्मक नवोन्मेषी संभावना के आयामों को लेकर अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि संस्कृत भाषा का आधुनिक बाल साहित्य में युगीन अर्थ तो जरूर झलकते हैं । लेकिन इस क्षेत्र में बाल मन को रीझाने वाले बिम्बों तथा कथानकों को अभी और सजाने संभालने की ज़रुरत है , ताकि बच्चे पाठक के रुप में प्रौढ लेखक की मानसिकता तथा धुंधले बिम्ब के शिकार न बन सकें ।साथ ही साथ बाल साहित्य की भाषा में ऐसी पोटेंसीयलीटी भी हो जिससे बच्चों को जूझना न पड़े । मुकेश कुमार शर्मा ने भी समसामयिक बाल साहित्य की समीक्षा प्रस्तुत की ।

 इस सिम्पोजियम में परंपरा तथा आधुनिक धारा के अनेक विद्वानों के अलावा गुरुकुल के अंतेवासियों की भी सक्रिय सहभागिता रही । गुरु विरजानन्द विद्यालय के बच्चों ने संस्कृत भाषा में पंचतन्त्र के लघु अंशों का भी मंचन किया । इससे बाल साहित्य से जुड़ा यह सिम्पोजियम और सार्थक तथा जीवंत हो उठा । इस कार्यक्रम की सफलता को लेकर आत्मानंद गुरु के अध्यक्ष ने भी अपने विचार रखे तथा रामकृष्ण साधना केन्द्र के श्री भारद्वाज जी ने अपना वक्तव्य दिया ।मंच का संचालन नीलाभ शर्मा ने किया । तकनीकी तथा आतिथ्य व्यवस्था क्रमशः सौरभ तथा अर्चना ने किया ।

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