जन-जन में सद्भावना , हो ज्यूँ बहता नीर

० सुषमा भंडारी ० 
गणतन्त्र कहता सदा , न हो कोई गुलाम।
आजादी के वास्ते , अमर अनेकों नाम।।

पावन है अति पर्व ये, है अपना गणतन्त्र।
जन जन के ह्रदय बसा, ये ही इसका मंत्र।।

भाषा अपने देश में , कोस कोस पे भिन्न।
भाई चारा एकता, इक दूजे के अभिन्न।।

आंखों में रहता सदा , भारत माँ का रूप।
गंगधार छल छल करे, भाये उजली धूप।।

आजादी का पर्व है , लिए खुशी का ज्वार।
फाँसी पर चढ़ सूरमा , दे गये ये संसार।।

बर्ष 24 शुभ बहुत, आये घर पर राम।
हुई अयोध्या जगमगी, जय जय सीया राम।।

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