ग्रामीण परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए 42 पंचायतों को सम्मानित किया गया
० संवाददाता द्वारा ०
नयी दिल्ली : केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने दिल्ली में देशभर की 42 उत्कृष्ट पंचायतों को राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 प्रदान किये। इस अवसर पर पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, असम सरकार के रूपांतरण और विकास, श्रम कल्याण, चाय जनजाति और आदिवासी कल्याण मंत्री रमेश्वर तेली, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, केंद्रीय और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि उपस्थित थे।
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि पूरे देश के 2.5 लाख से अधिक पंचायतों में से 42 पुरस्कार विजेता पंचायतों का चयन पारदर्शी और सघन मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ये पुरस्कार स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) और पंचायत उन्नयन सूचकांक (पीएआई) पर आधारित हैं, जो वस्तुनिष्ठ और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित करते हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वास्थ्य, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी क्षेत्रों में सरकारी कल्याण योजनाओं की पूर्णता को सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि समावेशी और समग्र विकास हासिल किया जा सके।
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भरद्वाज ने पंचायती राज संस्थाओं के शानदार बदलाव को रेखांकित किया, जो डेटा-आधारित, पारदर्शी और ज़मीनी स्तर पर शासन की जवाबदेह इकाइयां हैं। उन्होंने इस यात्रा का वर्णन भारत की लोकतांत्रिक गाथा के सबसे प्रेरणादायक अध्यायों में से एक के रूप में किया। उन्होंने पूरे देश के पंचायतों से आग्रह किया कि वे इन उत्कृष्ट मॉडलों से शक्ति और प्रेरणा लें ताकि भारत में सहभागी और नागरिक-केंद्रित स्वशासन को और सुदृढ़ किया जा सके।
नयी दिल्ली : केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने दिल्ली में देशभर की 42 उत्कृष्ट पंचायतों को राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 प्रदान किये। इस अवसर पर पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, असम सरकार के रूपांतरण और विकास, श्रम कल्याण, चाय जनजाति और आदिवासी कल्याण मंत्री रमेश्वर तेली, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, केंद्रीय और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि उपस्थित थे।
ये पुरस्कार देश भर में पंचायतो द्वारा समावेशी, सहभागी और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में किए गए उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देते हैं, जो विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप हैं। इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 से सम्मानित पंचायतो के कार्यों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों पर एक ई-पुस्तक और पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सर्वोत्तम तौर-तरीकों का संकलन भी जारी किया गया। इन प्रकाशनों का उद्देश्य समान स्तर पर सीखने और जमीनी स्तर पर सफल शासन मॉडल अपनाने को सुविधाजनक बनाना है।
इस अवसर पर, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने पुरस्कार विजेता पंचायतों को उनकी निष्ठा, नवाचार और जन-केंद्रित शासन के प्रति प्रतिबद्धता के लिए बधाई दी। पुरस्कार विजेता पंचायतों के प्रतिनिधियों और देश भर से वर्चुअल रूप में जुड़े प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि ये पुरस्कार जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की बढ़ती ताकत और विकासित भारत के विज़न को साकार करने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रतिबिंबित करते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत की यात्रा सशक्त गांवों द्वारा संचालित होनी चाहिए, जो 'ग्रामोदय से भारत उदय' के सिद्धांत से मार्गदर्शित हो। केंद्रीय मंत्री ने यह बताते हुए संतोष व्यक्त किया कि 42 पुरस्कार विजेता पंचायतों में से 22 का नेतृत्व महिलायें कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ग्रामीण भारत में महिलाओं के नेतृत्व और समावेशी शासन के परिवर्तनकारी प्रभाव का प्रमाण है। पंचायत प्रगति सूचकांक (पीएआई) 2.0, ई-ग्रामस्वराज, एआई-सक्षम सभासार प्लेटफॉर्म जैसी मंत्रालय की पहलों का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि पंचायतों को तकनीक, संसाधनों और क्षमता निर्माण समर्थन के साथ सशक्त बनाया जा रहा है,
ताकि पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने पुरस्कार विजेता पंचायतों से कहा कि वे सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करके, नवाचार को बढ़ावा देकर, महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करके और अंतिम सिरे तक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करके आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करें। सिंह ने पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की और कहा कि 16वीं वित्त आयोग के तहत अनुशंसित ₹4.35 लाख करोड़ (15वीं वित्त आयोग की तुलना में आवंटनों में 84 प्रतिशत की वृद्धि) की धनराशि जमीनी स्तर पर शासन को और अधिक सशक्त बनाएंगे और 'विकसित भारत' विज़न का समर्थन करेंगे।
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि पूरे देश के 2.5 लाख से अधिक पंचायतों में से 42 पुरस्कार विजेता पंचायतों का चयन पारदर्शी और सघन मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ये पुरस्कार स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) और पंचायत उन्नयन सूचकांक (पीएआई) पर आधारित हैं, जो वस्तुनिष्ठ और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित करते हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वास्थ्य, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी क्षेत्रों में सरकारी कल्याण योजनाओं की पूर्णता को सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि समावेशी और समग्र विकास हासिल किया जा सके।
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भरद्वाज ने पंचायती राज संस्थाओं के शानदार बदलाव को रेखांकित किया, जो डेटा-आधारित, पारदर्शी और ज़मीनी स्तर पर शासन की जवाबदेह इकाइयां हैं। उन्होंने इस यात्रा का वर्णन भारत की लोकतांत्रिक गाथा के सबसे प्रेरणादायक अध्यायों में से एक के रूप में किया। उन्होंने पूरे देश के पंचायतों से आग्रह किया कि वे इन उत्कृष्ट मॉडलों से शक्ति और प्रेरणा लें ताकि भारत में सहभागी और नागरिक-केंद्रित स्वशासन को और सुदृढ़ किया जा सके।
टिप्पणियाँ