चादर महोत्सव : 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु करेंगे सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ


० संवाददाता द्वारा ० 
Kolkata : राजस्थान के जैसलमेर में 6 से 8 मार्च को तीन दिवसीय चादर महोत्सव और दादागुरु इकतीसा पाठ का आयोजन होगा। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत करेंगे। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण 7 मार्च को विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ का ऐतिहासिक महासंकल्प है। कार्यक्रम का आयोजन दादा गुरूदेव श्री जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव समिति के अंतर्गत हो रहा है। 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान, विद्या भारती तथा अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि कार्यक्रम में सहभागी हैं। कार्यक्रम गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरी की पावन निश्रा में सम्पन्न होगा। इस विराट महोत्सव के प्रेरणास्रोत पूज्य आचार्य जिनमनोज्ञ सागर है । चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं संयोजक जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गोलेछा है। आयोजन में विभिन्न भारतीय परंपराओं के करीब 400 संतों की उपस्थिति होगी। करीब 20 हजार श्रद्धालुओं की तीन दिवसीय कार्यक्रम में मौजूदगी रहेगी।

चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन मंगल प्रभात लोढ़ा के अनुसार यह अभियान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आस्था, एकता और आध्यात्मिक जागरण का महाअभियान है। निर्धारित समय पर देश–विदेश के विभिन्न नगरों में श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों से एक साथ दादागुरु इकतीसा पाठ करेंगे, जिससे विश्वभर में आध्यात्मिक चेतना की सामूहिक तरंग उत्पन्न होगी।

 इस विराट संकल्प के प्रेरणास्रोत पूज्य आचार्य जिन मनोज्ञ सागर हैं, जिनकी प्रेरणा से यह आयोजन वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन का रूप ले रहा है। दादा गुरूदेव श्री जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव में 871 वर्षों बाद पहली बार चादर का विधिवत अभिषेक होगा, इससे पहले जैसलमेर किले से वरघोड़े के साथ चादर को महोत्सव स्थल पर लाया जाएगा। 8 मार्च को उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा।

दादागुरु इकतीसा कार्यक्रम के राष्ट्रीय चेयरमैन प्रकाश चंद्र लोढ़ा ने बताया कि 6 से 8 मार्च को गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरी की पावन निश्रा में आयोजित होने जा रहे त्रिदिवसीय चादर महोत्सव का मुख्य आकर्षण 7 मार्च को विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ का ऐतिहासिक महासंकल्प रहेगा। निर्धारित समय पर देश विदेश में श्रद्धालु एक साथ पाठ करेंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।

जैसलमेर में चादर महोत्सव के पहले दिन 6 मार्च को महोत्सव की शुरूआत गच्छाधिपतिश्री, आचार्य, उपाध्याय सहित भगवंतों के मंगल प्रवेश से होगी। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में आरएसएस सरसंघचालक मोहन राव भागवत मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर चादर समारोह सिक्का और विशेष डाक टिकट का विमोचन होगा। पहली बार दादा गुरूदेव के जीवन पर आधारित जीवंत नाटिका का मंचन होगा। कार्यक्रम के दूसरे दिन 7 मार्च को जैसलमेर किले से चादर वरघोड़ा निकलेगा। इसके बाद 1 करोड़ 8 लाख श्रृद्वालु पूरे विश्व में दादा गुरू इकतीसे का पाठ करेंगे।

  सांस्कृतिक संध्या में प्रख्याात संगीतकार भक्ति महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देंगे। आठ मार्च को उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा साथ ही गणिनी पद समारोह भी आयोजित होगा। इसी दिन चादर अोक जल और वासक्षेप को वितरण होगा।

जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली ने बताया कि जैन समाज के जैसलमेर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर डेडानसर मैदान में विशाल डोम टेंट्स लगाने का काम एक महिने से शुरू है। इसके अलावा मैदान में एक संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है। देश-दुनिया से दादागुरु जिनदत्त सूरि के करीब 20 हजार भक्तजन इस मौके पर जैसलमेर आएंगे। गौरतलब है कि जैसलमेर जिला जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है।

आयोजन समिति के सचिव पदम टाटिया का कहना है कि प्रथम दादागुरु आचार्य श्री जिनदत्त सूरी 11वीं शताब्दी के महान आध्यात्मिक आचार्य माने जाते हैं। परंपरा अनुसार अजमेर में राजा अर्णोराज द्वारा प्रदत्त भूमि पर उनका अग्नि-संस्कार हुआ, जहाँ अग्नि-संस्कार के समय चादर का नहीं जलना एक अलौकिक घटना के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, जो आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है।

 ऐतिहासिक उल्लेख के अनुसार लगभग डेढ़ शताब्दी पूर्व जैसलमेर के महारावल ने महामारी शमन हेतु अनहिलपुर पाटन से यह चादर मंगवाई थी। वर्तमान में यह चादर जैसलमेर दुर्ग स्थित श्री जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार में सुरक्षित है। इसी परंपरा के आधार पर चादर महोत्सव आयोजित किया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान 7 और 8 मार्च को “भारत की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक सद्भाव एवं समरसता में दादागुरु परंपरा का योगदान” विषय पर राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी आयोजित होगी। जिसमें जोधपुर विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, प्राकृत भारती संस्थान तथा समाज एवं संस्कृति अध्ययन केंद्र सहित कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी होंगे।

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