भाजपा का असली महिला विरोधी चेहरा उजागर हुआ : अल्का लाम्बा

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर। जयपुर में महिला कांग्रेस द्वारा महिला विरोधी मानसिकता वाली भाजपा की डबल इंजन की सरकार के विरूद्ध जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। बंगाल व तमिलनाडू के चलते चुनावों में भाजपा की मोदी सरकार द्वारा दिनांक 16, 17 एवं 18 अप्रेल, 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया जिसमें महिला आरक्षण बिल जो पारित हो चुका है, में संशोधन करने के लिये एक बिल प्रस्तुत किया था जो कि परिसीमन संशोधन विधेयक था। 
सभी विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की कि इस बिल के प्रस्तुत करने से पूर्व सर्वदलीय बैठक बुलाई जाये और परिसीमन बिल का मसौदा विपक्षी दलों को सौंपा जाये, किन्तु ऐसा प्रस्ताव सरकार ने विशेष सत्र बुलाने से पहले नहीं स्वीकार किया और परिसीमन बिल का मसौदा भी नहीं बताया गया। कांग्रेस ने कहा कि बंगाल व तमिलनाडू के सांसद चुनावों में व्यस्त है, उनकी भागीदारी भी लोकतांत्रिक परम्पराओं के मुताबिक विशेष सत्र में होनी चाहिये, इसलिये सत्र 29 अप्रेल के पश्चात् दोनों राज्यों के चुनाव सम्पन्न होने के बाद बुलाया जाये,

 किन्तु सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस सत्र के बुलाये जाने पर कांग्रेस सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गॉंधी ने समाचार पत्रों में लेख लिखकर बताया कि विशेष सत्र महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करने की बजाये परिसीमन करने के लिये बुलाया गया है तथा महिला आरक्षण बिल पर कोई बहस नहीं हो सकती, क्योंकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम सर्वसम्मति से वर्ष 2023 में ही संसद में पारित हो चुका है। उक्त विचार अखिल भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लाम्बा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये।

 लाम्बा ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में सर्वसम्मति से सबके सहयोग से पारित हो चुका है और आधी आबादी का अधिकार संविधान में दर्ज हो चुका है। महिला आरक्षण बिल पारित होने के तुरंत बाद सभी दलों ने सरकार से मांग की थी कि इस कानून को लागू करने हेतु गजट नोटिफिकेशन तुरंत होना चाहिये, किन्तु भाजपा की महिला विरोधी केन्द्र सरकार ने ऐसा नहीं किया। विशेष सत्र बुलाये जाने के पश्चात् 30 महिने की देरी से 16 अप्रेल, 2026 को रात 11 बजे नोटिफिकेशन जारी हुआ।

 विशेष सत्र में बहस के दौरान भाजपा का असली महिला विरोधी चेहरा उजागर हुआ, क्योंकि सत्र प्रारम्भ होने के पश्चात् तीन वर्ष पूर्व पारित महिला आरक्षण विधेयक पर कानून का नोटिफिकेशन 30 महिने की देरी से इस दौरान जारी हुआ। 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किये जाने के बाद सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पारित कराया तथा सरकार से मांग की कि इस कानून को लागू करने के लिये जो शर्तें जोड़ी गई हैं, महिला आरक्षण लागू होने में जो रोड़ा अटकाया गया है, उन्हें हटाया जाये।

 सरकार ने महिला आरक्षण कानून लागू होने पर शर्तें लगाई थी कि पहले जनगणना होगी और उसके आधार पर परिसीमन होगा, जिसके पश्चात् ही महिला आरक्षण लागू हो सकेगा। सच्चाई यह है कि कांग्रेस सहित सभी दलों ने इन शर्तों को हटाने के लिये कहा था कि महिला आरक्षण कानून बिना शर्तों के तुरंत अविलम्ब लागू हो और 2024 में लोकसभा चुनावों में देश की महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

 उसी समय यदि महिला आरक्षण बिल लागू हो जाता तो लोकसभा की 543 सीटों में से 180 सीटों पर महिलायें चुनाव लडक़र सीधे लोकसभा में पहुॅंच जाती, लेकिन महिला विरोधी भाजपा सरकार ने इस कानून को लागू नहीं किया। भाजपा ने विशेष सत्र परिसीमन करने के लिये बुलाया था और परिसीमन बिना जनगणना करवाना चाहते थे, जनगणना 2011 में हुई थी और उसके पश्चात् 2021 में होनी थी, जो अभी 2026 में प्रारम्भ हुई है।

जब कांग्रेस पार्टी ने जातिगत जनगणना कराने की मांग रखी तो भाजपा की सरकार इसके विरोधी में माननीय उच्चतम न्यायालय तक गई, जो लोग जातिगत जनगणना की मांग कर रहे थे उन्हें अरबन नक्सली तक बताया गया, किन्तु दबाव में जातिगत जनगणना कराने हेतु भाजपा सरकार को झुकना पड़ा। भाजपा 2026 में जो जातिगत जनगणना प्रारम्भ हुई है उसके तथ्यों को नजरअंदाज कर परिसीमन करना और लोकसभा की 850 सीटें करना चाहती है।

 इसमें भाजपा की मंशा केवल राजनैतिक लाभ प्राप्त करते हुये देश की राजनीतिक का भूगोल बदलने की थी। यदि ऐसा हो जाता तो देश के दक्षिणी राज्यों एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों का सीधा नुकसान होता। 12 साल में पहली बार भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है जब इस लोकतंत्र और महिला विरोधी सरकार का मनमानी से परिसीमन करने का बिल कांग्रेस एवं विपक्षी दलों ने गिरा दिया।

 कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि जो लोकसभा की वर्तमान 543 सीटें हैं उनमें तत्काल महिला आरक्षण लागू कर 180 सीटें महिलाओं को दी जाये। दूसरी मांग है कि अनुसूचित जाति, जनजाति की बहिनों के साथ ओबीसी वर्ग की महिलाओं को क्यों वंचित रखा जाये, ऐसा भाजपा की महिला विरोधी सरकार नहीं करने दिया जायेगा। प्रश्र यह है कि जब चुनाव वर्ष 2029 में होना है और जातिगत जनगणना वर्ष 2026-2027 में पूर्ण हो जायेगी तो परिसीमन उसके आधार पर भाजपा क्यों नहीं करना चाहती है।

 कहीं ना कहीं भाजपा की नीयत खराब है जो देश में जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहती है, इसीलिये इसके आधार पर परिसीमन करने की बजाये मनमुताबिक परिसीमन भाजपा करवाना चाहती है। असम और जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने मनमर्जी से परिसीमन किया, एक राज्य में 2011 की जनगणना के आधार पर और दूसरे राज्य में 2001 की जनगणना के आधार पर मनमाना परिसीमन राजनैतिक लाभ पाने के लिये किया गया। भाजपा ने इन राज्यों में ऐसा कर दिया, किन्तु देश की संसद में भाजपा के षडय़ंत्र को इण्डिया गठबंधन ने अपनी एकता से पराजित कर दिया।

उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है और दबाव है कि महिला आरक्षण कानून तुरंत लागू हो, क्योंकि इसका नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। सामाजिक समानीकरण के लिये जातिगत जनगणना 2026-2027 में पूर्ण हो इसके लिये कांग्रेस पूरा दबाव बनायेगी। जातिगत जनगणना में समय नहीं लगता इसके उदाहरण बिहार और तेलंगाना है जहॉं वैज्ञानिक तरीकों से मात्र 6 माह में जातिगत जनगणना करवाई जा चुकी है,

 इसके तथ्यों पर सभी ने सहमति व्यक्त की है और कोई विवाद नहीं हुआ। आज भाजपा जो झूठे आरोप लगा रही है, उसे आईना दिखाना आवश्यक है। 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. राजीव गॉंधी ने संसद में 73वॉं व 74वॉं संविधान संशोधन महिलाओं को राजनीति की धारा में आरक्षण देकर लाने हेतु प्रस्तुत किया था जिसका परिणाम है कि आज देश में नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं का 33 प्रतिशत आरक्षण है और लगभग 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का हो गया है।

 कांग्रेस की सरकारों द्वारा महिलाओं को अधिकार दिये गये जिसका परिणाम है कि आज 15 लाख से अधिक महिलायें नगर निकायों व पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न पदों पर जनप्रतिनिधि चुनी गई है। कांग्रेस की सरकार ने 1992 में संविधान संशोधन कर महिला आरक्षण पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों में लागू किया था जो 1993 में मात्र एक वर्ष में लागू हुआ,

 जबकि भाजपा महिला विरोधी केन्द्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून 2023 में पारित करवाया, किन्तु लागू करवाने में तीन साल लगा दिये, जो भाजपा की बदनियती का उदाहरण है। 2014 में भाजपा की सरकार को पूर्ण बहुमत मिला था, उसके पश्चात् 2019 में भी पूर्ण बहुमत मिला और कांग्रेस नेता श्री राहुल गॉंधी ने लगातार मोदी सरकार से महिला आरक्षण लागू करने की मांग करते हुये अनेक पत्र लिखे। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने 2010 में राज्यसभा में बहुमत होने पर महिला आरक्षण बिल पारित करवाया था।

 लोकसभा में कांग्रेस का बहुमत नहीं होने से यह बिल पारित नहीं हो सका, क्योंकि सहमति नहीं बन सकी और उक्त समय भाजपा के सांसदों ने भी इस कानून को लागू करने का विरोध किया था। भाजपा की केन्द्र सरकार ने कांग्रेस के दबाव में महिला आरक्षण कानून के लिये बिल 2023 में प्रस्तुत किया क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव होने थे। प्रधानमंत्री केवल राजनैतिक लाभ लेने के लिये कांगे्रस को कोस रहे हैं और यह काम 29 अप्रेल तक चलेगा,

 क्योंकि तब बंगाल और तमिलनाडू के चुनाव सम्पन्न होंगे। राष्ट्रीय ध्वज लगाकर देश के नाम सम्बोधन में केवल कांगे्रस एवं विपक्षी दलों को कोसने का काम ही प्रधानमंत्री करते हैं। यदि चुनावी सम्बोधन ही करना था तो भाजपा कार्यालय में जाकर मीडिया को बुलाकर प्रेसवार्ता करते। महिला कांग्रेस भाजपा की महिला आरक्षण विरोधी मानसिकता के खिलाफ दिल्ली में आन्दोलन कर चुकी है

 जयपुर सहित अन्य शहरों में आन्दोलन हो रहे हैं और लोकसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस पार्टी भाजपा की केन्द्र सरकार पर दबाव बनायेगी कि मानसून सत्र में ही महिला आरक्षण बिल पर पुन: चर्चा करवाई जाये और महिला आरक्षण तत्काल लागू किया जाये।

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