जलवायु परिवर्तन से राजस्थान में बढ़ रहा है संकट,चुनौतियों से पार पाने में मीडिया की बड़ी भूमिका

० आशा पटेल ० 
जयपुर। यूनिसेफ और फ्यूचर सोसायटी की ओर से कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित मीडिया राउंडटेबल में पत्रकारों के साथ ही पर्यावरण व मौसम से जुड़े एक्सपर्ट्स के साथ प्रदेश में बढ़ती हीटवेव, जल संकट, अनियमित वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियों का स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और जल सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर मंथन किया गया।
यूनिसेफ के राजस्थान प्रमुख रूषभ हेमानी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का नहीं, बल्कि वर्तमान का विकासात्मक संकट बन चुका है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है। विशेष रूप से अत्यधिक गर्मी और जल संकट की दोहरी चुनौती महिलाओं और बालिकाओं पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। 
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में राजस्थान में पहली बार राज्य स्तरीय जलवायु परामर्श बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न विभागों, तकनीकी संस्थानों और विकास साझेदारों ने मिलकर राज्य के सामने उभर रहे जलवायु जोखिमों पर चर्चा की। इस पहल से जलवायु अनुकूलन के लिए साझा रणनीति और विभागों के बीच समन्वय को मजबूती मिली।
चीफ UNICEF के.एल. राव ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में यूनिसेफ ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के क्रियान्वयन में सहयोग दिया है। इसके तहत राज्य के सभी जिलों में जिला जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम स्थापित किए गए हैं, जो जलवायु जनित स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान, निगरानी और आपदा के समय बेहतर समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में यूनिसेफ ने स्कूल शिक्षा विभाग के साथ मिलकर सरकारी विद्यालयों के लिए हीटवेव शिक्षण मॉड्यूल विकसित किया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अत्यधिक गर्मी के कारणों, उससे होने वाली बीमारियों, बचाव के उपायों, जल संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

 हेड मेट्रोलॉजिकल सेंटर, राधेश्याम शर्मा ने कहा कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और भूजल दोहन के कारण राजस्थान के जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) तथा अन्य विभागों के साथ मिलकर स्रोत संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन, जल बजटिंग और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही ‘विकसित राजस्थान-2047’ की परिकल्पना के तहत जल सुरक्षित राजस्थान के लिए प्रमुख संकेतकों के निर्धारण में भी सहयोग दिया गया है।

कार्यशाला के दौरान दो ऑनलाइन सत्र आयोजित किए गए, जिसमें क्लाइमेट चेंज एंड एनवायरनमेंट सस्टेनेबिलिटी स्पेशलिस्ट UNICEF, युसूफ कबीर और आई.आई.पी.एच. के प्रोफेसर महावीर गोलछा ने बढ़ते तापमान से बचाव के उपायों की जानकारी दी और सरकारी प्रयासों का ब्योरा पेश किया।

पर्यावरणीय स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए यूनिसेफ स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने में भी तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है। रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) और सामुदायिक आधारित अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल को बढ़ावा देकर स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट UNICEF, अंकुश सिंह ने बताया कि युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूनिसेफ राजस्थान युवा बोर्ड के साथ मिलकर ‘यूथ फॉर क्लाइमेट एक्शन’ पहल शुरू कर रहा है। स्वामी विवेकानंद युवा पोर्टल के माध्यम से युवाओं को जलवायु विज्ञान, जलवायु नीति, हरित रोजगार, सतत विकास, कार्बन बाजार और सामुदायिक नेतृत्व जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्यभर में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक और सक्रिय युवा नेतृत्व तैयार करना है।

फ्यूचर सोसाइटी की सचिव डॉ. मीणा शर्मा ने बताया कि आने वाले वर्षों में जलवायु अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं, जल सुरक्षा, जलवायु-स्मार्ट स्कूलों और युवाओं की भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में बच्चों के जीवन, शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके। इस कार्यशाला में जयपुर के गोवर्धन चौधरी, रघु आदित्य, अर्चना शर्मा, शोहेब खान, कैलाश चौधरी, RJ शिवांगी, अरविन्द पालावत, वेद प्रकश, आशा पटेल मौजूद रहे।

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