नन्हे बच्चों की हिंदी प्रतिभा आशा जगाती है–इंदिरा मोहन

० योगेश भट्ट 
नयी दिल्ली : नन्हे बच्चों की हिंदी प्रतिभा आशा जगाती है| हिंदी संस्कार की भाषा है, आत्मीयता और प्रेम की भाषा है| यदि इन बच्चों को इसी प्रकार सही मार्गदर्शन, संस्कार और अवसर मिलते रहे, तो निश्चित ही ये हिंदी के ध्वजवाहक बनेंगे|” ये शब्द प्रख्यात गीतकार एवं दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्ष इंदिरा मोहन ने कहे|अवसर था ‘दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन’ एवं ‘हिंदी प्रतिभा पुंज’ संस्थान के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित ‘हिंदी प्रतिभा प्रदर्शन समारोह इस कार्यक्रम का आयोजन हिंदी भवन, दिल्ली में किया गया।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सुरम्या शर्मा की नृत्य प्रस्तुति - सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा मोहन और राजेश श्रीवास्तव ने की; सान्निध्य सविता चड्ढा का था। विशिष्ट अतिथि के रूप में ऋषि कुमार शर्मा, डॉ. विवेक गौतम और राम अवतार बैरवा को सम्मान दिया गया। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप एवं डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प ’ ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र, माला एवं पुस्तक से स्वागत किया।
विभिन्न आयु वर्गों के 20 प्रतिभागियों ने कविता पाठ, भाषण, गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन नीलम मदान, प्रदन्या शर्मा और सरिता गुप्ता ने किया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम सौहार्द, साहित्यिक ऊर्जा एवं हिंदी भाषा के प्रति समर्पण के वातावरण में संपन्न हुआ।

श्रीमती तरुणा पुंडीर एवं भावना अरोड़ा ने के. आर. मंगलम विद्यालय के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने में विशेष भूमिका निभाई| उपस्थित जन में ज्योति स्वरूप गौड़, डॉ. नीलम वर्मा, आचार्य अनमोल, कीर्तिवर्धन, नवीन गुप्ता, मुहम्मद इसहाक खान, डॉ. रेखा चंदोला, तूलिका सेठ, सुनील विज, रामानुज सुंदरम, वीरेंद्र सैनी, प्रदीप कुमार, शोभा ठाकुर, कमलेश्वर शरण, समीर सक्सेना, अभिलाष, प्रेम सागर ‘प्रेम’, पुष्पा सिन्हा, सूक्ष्मलता महाजन सहित अनेक लोगों ने इसे हिंदी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने वाला प्रेरणादायी आयोजन बताया।

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