मुर्शिदाबाद मैंगो फेस्टिवल 2026 में बंगाल के नवाबी आम छाए रहे

० संवाददाता द्वारा ० 
कोलकाता : मुर्शिदाबाद मैंगो फेस्टिवल 2026 की शुरुआत कोलकाता के आईलीड में एक कार्यक्रम के साथ हुई। इस कार्यक्रम ने विरासत प्रेमियों, फूडीज और यात्रियों को बंगाल के सबसे खास मौसमी उत्सवों में से एक की झलक दिखाई। मुर्शिदाबाद हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी (MHDS) और हाउस ऑफ शहरवाली द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महीने भर चलने वाला फेस्टिवल जून 2026 में मुर्शिदाबाद के अजीमगंज में आयोजित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम ने मुर्शिदाबाद की मशहूर नवाबी आम संस्कृति को शहर तक पहुँचाया और ऐसी दुर्लभ किस्में प्रदर्शित की गई, जो आम तौर पर जिले के सदियों पुराने बागों के बाहर नहीं मिलतीं। प्रदर्शित किस्मों में कोहितूर शामिल था, जो कभी नवाबी दरबारों के लिए खास माना जाता था और अपनी केसर जैसी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है;
रानी, जो फूलों जैसी सुगंध वाली और स्थानीय आमों की “रानी” कही जाती है; बिमली, जो छोटी, बेहद मीठी और कागज जैसे पतले छिलके वाली किस्म है; और गहरे रंग वाला काला पहाड़। इनके अलावा बॉम्बे, चंपा, मुलायम जाम, दिलपसंद, अनरस, चंदनकोसा, रोगनी और सारंगा जैसी किस्में भी मौजूद थीं, जो मुर्शिदाबाद की 150 से अधिक आम किस्मों के असाधारण खजाने की झलक पेश करती हैं।
इस कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। इनमें ब्राज़ील, बांग्लादेश, नेपाल, चीन और नॉर्वे के मानद कॉन्सल जनरल, जाने-माने रेस्टोरेंट मालिक, रोटरी क्लब के पूर्व जिला गवर्नर तथा कोलकाता के प्रमुख स्कूलों के प्रिंसिपल शामिल थे। उन्हें शहरवाली की पारंपरिक रेसिपीज़ पर आधारित आम से बने व्यंजन परोसे गए, जैसे आम पन्ना, कच्चा आम खीर, आम संदेश, विशेष चटनियाँ और मौसमी शर्बत। हर व्यंजन इस समुदाय की समृद्ध पाक परंपरा और विरासत का प्रमाण प्रस्तुत करता था।
मुर्शिदाबाद हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी (MHDS) के प्रेसिडेंट और ‘हाउस ऑफ़ शहरवाली’ के फाउंडर, मिस्टर प्रदीप चोपड़ा ने कहा, “मुर्शिदाबाद के आम सिर्फ फल नहीं हैं, बल्कि एक जीवित विरासत हैं। इनमें सदियों का शाही संरक्षण, कला के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक यादें बसी हैं। इस फेस्टिवल के जरिए हमारा मकसद इन्हें बचाना और इस तरह बंगाल की आत्मा को संजोना है। हम चाहते हैं कि लोग इन आमों का असली मजा वहीं लें जहाँ ये असल में पैदा होते हैं – मुर्शिदाबाद के बागों में।
यह फेस्टिवल वर्तमान में ‘हाउस ऑफ शहरवाली’ में आयोजित किया जा रहा है, जो एक हेरिटेज हवेली है और भारत का पहला म्यूज़ियम होटल भी है, जहाँ ठहरने की सुविधा उपलब्ध है। इस हवेली के आँगन, गैलरी और कमरे बंगाल के नवाबी दौर की सदियों पुरानी कहानियाँ बयां करते हैं जिनमें नदी मार्ग से होने वाला व्यापार, शाही कारीगरी, 
वास्तुकला और ऐतिहासिक शहरवाली जैन व्यापारी समुदाय की सस्टेनेबल जीवनशैली शामिल है। पूरे जून महीने तक चलने वाले इस फेस्टिवल में 2-रात और 3-रात के विशेष स्टे पैकेज भी उपलब्ध हैं। इन पैकेजों में बागों की सैर, शहरवाली भोजन अनुभव, सांस्कृतिक गतिविधियां और अजीमगंज रेलवे स्टेशन से निःशुल्क पिकअप जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
अब कोलकाता से मुर्शिदाबाद पहुँचना काफी आसान हो गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस हावड़ा को अजीमगंज से लगभग 2.5 घंटे में जोड़ती है। इसके अलावा कोलकाता से इस रूट पर रातभर चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें भी उपलब्ध हैं।

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