स्व.राजेश पायलट के आदर्श आज भी राजनीति के लिए प्रेरणादायी : पायलट

० आशा पटेल ० 
जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि स्व. राजेश पायलट ने भारतीय वायुसेना में पायलट की अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर इन्दिरा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर जनसेवा का मार्ग चुना था। वे जीवन की आखिरी सांस तक कांग्रेस पार्टी के एक जांबाज सिपाही बनकर जनता के हक के लिए लड़ते रहे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चा राजनेता वही है जो लोभ, लालच और पदों की अंधी दौड़ से दूर रहकर केवल जनता का मन जीतने और उनके कल्याण के लिए कार्य करें, ताकि इतिहास उन्हें हमेशा आदर के साथ याद करें।
सचिन पायलट करौली के ग्राम सकरघटा में आयोजित स्व. राजेश पायलट की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम व किसान सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्व. राजेश पायलट ने गृह मंत्रालय में रहते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए कई साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिए। उन्होंने कभी भी दबाव या प्रभाव में आकर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आज यह जो मूर्ति यहां लगी है, यह उसी बात का प्रतीक है।

पायलट ने मध्यप्रदेश में राज्यसभा के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन गैर कानूनी तरीके से रद्द किये जाने की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ अन्याय है। जब कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता इस अन्याय के खिलाफ निर्वाचन आयोग पहुंचे, तो उनके लिए आयोग के लोहे के दरवाजे और ताले बंद कर दिये गये। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है, जो कि बेहद चिंताजनक है।

किसानों की समस्याओं पर उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। सरकार में मनरेगा को सीधे बंद करने का साहस नहीं है, इसलिए इसे धीरे-धीरे कमजोर करने का काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो गये है। फसल के लिए खाद, बीज, बिजली और पानी के दाम आसमान छू रहे है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और फसल खराब होने की स्थिति में बीमा कम्पनियों से मुआवजा प्राप्त करना भी मुश्किल हो गया है।

उन्होंने नीट पेपरलीक मामले पर कहा कि पेपरलीक से 22 लाख बच्चों के जीवन और उनके परिवारों के अरमानों पर पानी फिर गया है। मां-बाप अपना पेट काटकर कितनी कठिनाई से बच्चों को पढ़ाते है, लेकिन परीक्षा माफियाओं के कारण उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो गई और अब सरकार इसकी जिम्मेदारी लेने से बच रही है।

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