वाणिज्य विभाग ने कहा जेम्स-ज्वेलरी क्षेत्र के एफटीए से ज्वेलरी व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएं
० आशा पटेल ०
जयपुर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के वाणिज्य विभाग ने जयपुर में “जेम्स एवं ज्वेलरी क्षेत्र के लिए एफटीए का लाभ उठाना” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई तथा उद्योग से जुड़े अन्य व्यवसाइयों ने सक्रीय भागीदारी की ।यह कार्यशाला सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि निर्यातक विशेषकर एमएसएमई और क्लस्टर आधारित उद्यम भारत के नए पीढ़ी के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से प्राप्त बाजार पहुंच के लाभों का पूर्ण उपयोग कर सकें।
पिछले बारह वर्षों में भारत का कुल निर्यात लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 863 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो वित्त वर्ष 2014-15 के 468 अरब अमेरिकी डॉलर से कहीं अधिक है। इसमें वस्तु निर्यात 442 अरब अमेरिकी डॉलर तथा सेवा निर्यात 421 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।
वाणिज्य विभाग के अधिकारीयों का कहना था कि हाल के वर्षों में भारत के एफटीए अधिक व्यापक, गहन और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण बने हैं। इनमें उत्पादों, सेवाओं, निवेश, मानकों और व्यापार सुगमता के व्यापक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। जेम्स एवं ज्वेलरी क्षेत्र इन समझौतों के अंतर्गत प्रमुख लाभार्थी क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है।
भारत के एफटीए साझेदार देश सामूहिक रूप से प्रतिवर्ष 55 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के आभूषण आयात करते हैं। वर्तमान में भारत की हिस्सेदारी केवल 8 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो इस क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावनाओं को दर्शाती है। राजस्थान, जो भारत के रंगीन रत्न निर्यात का 97 प्रतिशत योगदान देता है तथा चांदी और इमिटेशन ज्वेलरी में मजबूत उपस्थिति रखता है, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त स्थिति में है।
वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव साकेत कुमार ने कहा, “भारत के एफटीए निर्यात अवसरों के विस्तार के लिए रणनीतिक साधन हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक निर्यातक, विशेषकर एमएसएमई और क्लस्टर आधारित उद्यम, इनका प्रभावी उपयोग करने में सक्षम हो।
यह कार्यक्रम वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उस परिकल्पना के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने बल दिया है कि भारत की निर्यात वृद्धि रणनीति बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता, उन्नत बाजार पहुंच और मजबूत घरेलू विनिर्माण पर आधारित है। वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्योग जगत को भारत के विस्तारित एफटीए नेटवर्क से उत्पन्न अवसरों का पूर्ण उपयोग करना होगा।
वाणिज्य विभाग देश के प्रमुख निर्यात क्लस्टरों में इसी प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी आयोजित करता रहेगा, ताकि एफटीए से संबंधित अवसरों का व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जा सके और ‘विकसित भारत 2047’ के तहत भारत को एक अग्रणी वैश्विक विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र बनाया जा सके।
इस अवसर पर जयपुर के प्रमुख ज्वेलर्स जिनमे जयपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजू अग्रवाल ,नवल अग्रवाल ,निर्मल बरड़िया ,संजय काला ,विजय चोरडिया ,डी पी खंडेलवाल आदि ज्वैलरी ट्रेड से जुड़े अनेक व्यवसाईयों ने भागीदारी निभाई | इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अधिकारी गण और आयोजक संस्थान जीजेईपीसी के रीजनल डाइरेक्टर नितिन खंडेलवाल एवं उनके विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे |
जयपुर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के वाणिज्य विभाग ने जयपुर में “जेम्स एवं ज्वेलरी क्षेत्र के लिए एफटीए का लाभ उठाना” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई तथा उद्योग से जुड़े अन्य व्यवसाइयों ने सक्रीय भागीदारी की ।यह कार्यशाला सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि निर्यातक विशेषकर एमएसएमई और क्लस्टर आधारित उद्यम भारत के नए पीढ़ी के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से प्राप्त बाजार पहुंच के लाभों का पूर्ण उपयोग कर सकें।
पिछले बारह वर्षों में भारत का कुल निर्यात लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 863 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो वित्त वर्ष 2014-15 के 468 अरब अमेरिकी डॉलर से कहीं अधिक है। इसमें वस्तु निर्यात 442 अरब अमेरिकी डॉलर तथा सेवा निर्यात 421 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।
वाणिज्य विभाग के अधिकारीयों का कहना था कि हाल के वर्षों में भारत के एफटीए अधिक व्यापक, गहन और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण बने हैं। इनमें उत्पादों, सेवाओं, निवेश, मानकों और व्यापार सुगमता के व्यापक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। जेम्स एवं ज्वेलरी क्षेत्र इन समझौतों के अंतर्गत प्रमुख लाभार्थी क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है।
भारत के एफटीए साझेदार देश सामूहिक रूप से प्रतिवर्ष 55 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के आभूषण आयात करते हैं। वर्तमान में भारत की हिस्सेदारी केवल 8 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो इस क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावनाओं को दर्शाती है। राजस्थान, जो भारत के रंगीन रत्न निर्यात का 97 प्रतिशत योगदान देता है तथा चांदी और इमिटेशन ज्वेलरी में मजबूत उपस्थिति रखता है, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त स्थिति में है।
वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव साकेत कुमार ने कहा, “भारत के एफटीए निर्यात अवसरों के विस्तार के लिए रणनीतिक साधन हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक निर्यातक, विशेषकर एमएसएमई और क्लस्टर आधारित उद्यम, इनका प्रभावी उपयोग करने में सक्षम हो।
यह कार्यक्रम वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उस परिकल्पना के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने बल दिया है कि भारत की निर्यात वृद्धि रणनीति बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता, उन्नत बाजार पहुंच और मजबूत घरेलू विनिर्माण पर आधारित है। वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्योग जगत को भारत के विस्तारित एफटीए नेटवर्क से उत्पन्न अवसरों का पूर्ण उपयोग करना होगा।
वाणिज्य विभाग देश के प्रमुख निर्यात क्लस्टरों में इसी प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी आयोजित करता रहेगा, ताकि एफटीए से संबंधित अवसरों का व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जा सके और ‘विकसित भारत 2047’ के तहत भारत को एक अग्रणी वैश्विक विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र बनाया जा सके।
इस अवसर पर जयपुर के प्रमुख ज्वेलर्स जिनमे जयपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजू अग्रवाल ,नवल अग्रवाल ,निर्मल बरड़िया ,संजय काला ,विजय चोरडिया ,डी पी खंडेलवाल आदि ज्वैलरी ट्रेड से जुड़े अनेक व्यवसाईयों ने भागीदारी निभाई | इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अधिकारी गण और आयोजक संस्थान जीजेईपीसी के रीजनल डाइरेक्टर नितिन खंडेलवाल एवं उनके विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे |
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