फर्नीचर क्यूसीओ एवं अंतरराष्ट्रीय सोशल कम्प्लायंस पर ईपीसीएच ने की कार्यशाला

० आशा पटेल ० 
जयपुर। निर्यात संवर्धन परिषद हस्तशिल्प (ईपीसीएच) द्वारा गोल्डन ट्यूलिप एसेंशियल, एम.आई. रोड में “बीआईएस अनुपालन, आगामी फर्नीचर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर एवं अंतरराष्ट्रीय सोशल कम्प्लायंस” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 80 से अधिक निर्यातकों, उद्यमियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ईपीसीएच के क्षेत्रीय संयोजक गिरीश अग्रवाल ने की। इस अवसर पर ईपीसीएच के पूर्व अध्यक्ष लेखराज माहेश्वरी, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के वरिष्ठ सहायक निदेशक रजत वर्मा, जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र (डीआईसीसी) के सहायक आयुक्त हिमांशु जोशी, कम्प्लायंस इंडिया के विशेषज्ञ प्रतिनिधिगण तथा उद्योग जगत के अनेक व्यवसाई उपस्थित रहे।
गिरीश अग्रवाल ने कहा कि फर्नीचर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO), 2025 के लागू होने के बाद अगस्त 2026 से संबंधित एमएसएमई इकाइयों के लिए बीआईएस प्रमाणन अनिवार्य हो जाएगा। उन्होंने उद्योग जगत को आगाह करते हुए कहा कि निर्धारित समय-सीमा के बाद बिना बीआईएस प्रमाणन वाले फर्नीचर का निर्माण, विक्रय अथवा आयात अनुमन्य नहीं होगा।
वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहने तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए SEDEX, SMETA और BSCI जैसे अंतरराष्ट्रीय सोशल कम्प्लायंस एवं सस्टेनेबिलिटी मानक तेजी से आवश्यक होते जा रहे हैं। कार्यशाला के दौरान Compliance India के विशेषज्ञों ने बीआईएस प्रमाणन, फर्नीचर क्यूसीओ के प्रावधानों, अनुपालन प्रक्रियाओं, आवश्यक दस्तावेजों तथा समय-सीमा के संबंध में  जानकारी प्रदान की। उन्होंने उद्योग इकाइयों को यह भी बताया कि उनकी संस्था किस प्रकार आवेदन से लेकर प्रमाणन प्राप्ति तक की प्रक्रिया में तकनीकी एवं व्यावहारिक सहयोग प्रदान कर सकती है।

डीआईसीसी, जयपुर के सहायक आयुक्त हिमांशु जोशी ने राज्य सरकार द्वारा उद्योगों को प्रदान की जा रही विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से अनुपालन एवं प्रमाणन संबंधी व्ययों पर उपलब्ध प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रावधानों का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य सरकार उद्योगों को गुणवत्ता एवं नियामकीय मानकों को अपनाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है। 

वहीं, केंद्र सरकार का संस्थान विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के वरिष्ठ सहायक निदेशक रजत वर्मा ने निर्यातकों को ईपीसीएच वुड टेस्ट लैब (EPCH Wood Test Lab) की अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि उत्पाद गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप परीक्षण के लिए यह प्रयोगशाला उद्योग को महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। साथ ही उन्होंने विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं, वित्तीय सहायता प्रावधानों एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की।

कार्यक्रम के दौरान ईपीसीएच अधिकारियों ने ईपीसीएच वुड टेस्ट लैब में उपलब्ध आधुनिक मशीनों, उनकी कार्यप्रणाली, विभिन्न परीक्षण सुविधाओं तथा सुरक्षा एवं अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं पर प्रस्तुति दी। इससे प्रतिभागियों को उत्पाद गुणवत्ता, परीक्षण मानकों एवं निर्यात आवश्यकताओं के प्रति बेहतर समझ विकसित करने का अवसर मिला।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए तथा नियामकीय अनुपालन एवं वैश्विक बाजार आवश्यकताओं के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन हासिल किया। सभी प्रतिभागियों ने उद्योग हित में इस समयानुकूल एवं उपयोगी कार्यशाला के आयोजन हेतु ईपीसीएच के प्रयासों की सराहना की।
 इस अवसर पर ईपीसीएच ऑफिस के जयपुर प्रभारी अमित भार्गव ने पूरी कार्यशाला को कुशल बिजनेस की दृष्टि से सफलता पूर्वक कॉर्डिनेट किया ।

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