ध्यान योग द्वारा शांति की अनुभूति’ पर आयोजित कार्यक्रम में ध्यान की व्यावहारिक प्रविधियों का हुआ अनुभव
० योगेश भट्ट ०
राँची : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया (वाईएसएस) ने राँची आश्रम में एक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें संन्यासी स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने ‘ध्यान योग द्वारा शांति की अनुभूति’ विषय पर प्रवचन दिया। स्वामी ईश्वरानन्द ने कहा : “योग जीवन जीने का एक संपूर्ण विज्ञान है, जो शरीर, मन और आत्मा को सामंजस्यपूर्ण रूप से विकसित करते हुए मनुष्य को उसके अंतर्निहित शांति स्रोत तथा ईश्वर से जोड़ता है।स्वामीजी ने विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु तथा गौरवग्रंथ ‘योगी कथामृत’ (Autobiography of a Yogi) के लेखक परमहंस योगा नन्द की क्रियायोग शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ध्यान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर स्थित दिव्य शांति का अनुभव कर सकता है।
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार यह वचन पढ़ा था, तब वे इसके गहन अर्थ को पूरी तरह नहीं समझ पाए थे। किंतु वर्षों के ध्यान-अभ्यास के अनुभव से उन्होंने जाना कि ध्यान का स्वाभाविक परिणाम आंतरिक शांति है। नियमित ध्यान के माध्यम से व्यक्ति जीवन की चुनौतियों, तनावों और अनिश्चितताओं के बीच भी शांत, संतुलित और केंद्रित रह सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को परमहंस योगानन्दजी द्वारा प्रदत्त योगदा सत्संग पाठमाला (YSS Lessons) की जानकारी दी गई। इन गृह-अध्ययन पाठों के माध्यम से साधक अपने घर पर रहकर ध्यान की वैज्ञानिक विधियों तथा आध्यात्मिक जीवन के सिद्धांतों का क्रमबद्ध अध्ययन कर सकते हैं। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) की स्थापना परमहंस योगानन्द ने 1917 में की थी।
राँची : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया (वाईएसएस) ने राँची आश्रम में एक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें संन्यासी स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने ‘ध्यान योग द्वारा शांति की अनुभूति’ विषय पर प्रवचन दिया। स्वामी ईश्वरानन्द ने कहा : “योग जीवन जीने का एक संपूर्ण विज्ञान है, जो शरीर, मन और आत्मा को सामंजस्यपूर्ण रूप से विकसित करते हुए मनुष्य को उसके अंतर्निहित शांति स्रोत तथा ईश्वर से जोड़ता है।स्वामीजी ने विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु तथा गौरवग्रंथ ‘योगी कथामृत’ (Autobiography of a Yogi) के लेखक परमहंस योगा नन्द की क्रियायोग शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ध्यान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर स्थित दिव्य शांति का अनुभव कर सकता है।
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार यह वचन पढ़ा था, तब वे इसके गहन अर्थ को पूरी तरह नहीं समझ पाए थे। किंतु वर्षों के ध्यान-अभ्यास के अनुभव से उन्होंने जाना कि ध्यान का स्वाभाविक परिणाम आंतरिक शांति है। नियमित ध्यान के माध्यम से व्यक्ति जीवन की चुनौतियों, तनावों और अनिश्चितताओं के बीच भी शांत, संतुलित और केंद्रित रह सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को परमहंस योगानन्दजी द्वारा प्रदत्त योगदा सत्संग पाठमाला (YSS Lessons) की जानकारी दी गई। इन गृह-अध्ययन पाठों के माध्यम से साधक अपने घर पर रहकर ध्यान की वैज्ञानिक विधियों तथा आध्यात्मिक जीवन के सिद्धांतों का क्रमबद्ध अध्ययन कर सकते हैं। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) की स्थापना परमहंस योगानन्द ने 1917 में की थी।
उनकी विश्वविख्यात पुस्तक ‘योगी कथामृत’ ने दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रेरित किया है। वाईएसएस भारत एवं पड़ोसी देशों में आश्रमों, ध्यान केंद्रों एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से ध्यान और संतुलित जीवन की शिक्षाओं का प्रसार कर रही है।
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