पश्चिम एशिया में युद्ध विराम पर जयपुर में फोर्टी ने जताई खुशी
० आशा पटेल ०
जयपुर। फोर्टी अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक बाजार को अब नकारात्मकता से मिलेगी मुक्ति, और प्रदेश के आयात- निर्यात को फिर से मिलेगी गति । ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध विराम का समझौता होने से देश के साथ प्रदेश के उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री ( फोर्टी ) अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने इस शांति समझौते पर खुशी जताई है,
फोर्टी के मुख्य सचिव गिरधारी खंडेलवाल का कहना है कि इस समझौते का पहला असर वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा और जिसका सबको इंतजार है। भारत अपनी तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है। युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन और उत्पादन महंगा हो जाता है। युद्ध विराम से तेल की कीमतें स्थिर या कम होने की संभावना बढ़ती है, जिससे राजस्थान के उद्योगों की लागत घट सकती है।
जेम्स ज्वेलरी की फिर से पश्चिम एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ सकती है। हवाई एवं समुद्री लॉजिस्टिक्स सामान्य होने से निर्यात आसान होगा। भुगतान और सप्लाई चेन में अनिश्चितता कम होगी। सोजत की मेहंदी उद्योग को राहत- मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग का निर्यात फिर से सुचारू हो सकेगा।
कालीन, हस्तशिल्प, ब्लू पॉटरी और वस्त्र उत्पादों के निर्यात में सुधार हो सकता है।
जयपुर। फोर्टी अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक बाजार को अब नकारात्मकता से मिलेगी मुक्ति, और प्रदेश के आयात- निर्यात को फिर से मिलेगी गति । ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध विराम का समझौता होने से देश के साथ प्रदेश के उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री ( फोर्टी ) अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने इस शांति समझौते पर खुशी जताई है,
उनका कहना है कि 28 फरवरी से ही राजस्थान के आयातक और निर्यातक दोनों को ही भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि घरेलू बाजार में सरकार के बेहतर प्रबंधन से ज्यादा मुश्किल नहीं आई, फिर भी इस युद्ध के कारण पूरे वैश्विक बाजार में नकारात्मकता का माहौल था। अब इस समझौते से राजस्थान के उद्योग और व्यापार पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
फोर्टी के मुख्य सचिव गिरधारी खंडेलवाल का कहना है कि इस समझौते का पहला असर वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा और जिसका सबको इंतजार है। भारत अपनी तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है। युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन और उत्पादन महंगा हो जाता है। युद्ध विराम से तेल की कीमतें स्थिर या कम होने की संभावना बढ़ती है, जिससे राजस्थान के उद्योगों की लागत घट सकती है।
जेम्स ज्वेलरी की फिर से पश्चिम एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ सकती है। हवाई एवं समुद्री लॉजिस्टिक्स सामान्य होने से निर्यात आसान होगा। भुगतान और सप्लाई चेन में अनिश्चितता कम होगी। सोजत की मेहंदी उद्योग को राहत- मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग का निर्यात फिर से सुचारू हो सकेगा।
कालीन, हस्तशिल्प, ब्लू पॉटरी और वस्त्र उत्पादों के निर्यात में सुधार हो सकता है।
समुद्री मार्ग और कंटेनर उपलब्धता बेहतर होने से डिलीवरी समय घट सकता है। अंतरराष्ट्रीय माहौल स्थिर होने से राजस्थान में विदेशी पर्यटकों की आवक फिर से बढ़ सकती है। सरकार की प्रदेश में निवेश प्रोत्साहन योजनाओं को गति मिल सकती है।
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