सेवा,सुशासन और संकल्प के 12 वर्ष 'मोदी युग' में विश्व शक्ति बन रहा है भारत
० डॉ संजय चौधरी,जबलपुर ०
नई दिल्ली,मई 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार देश की कमान संभाली थी, तब भारत के सामने नीतिगत पंगुता (Policy Paralysis) से उबरने और सवा सौ करोड़ नागरिकों में एक नया आत्मविश्वास जगाने की बड़ी चुनौती थी। आज वर्ष 2026 में, जब मोदी सरकार केंद्र की सत्ता में अपने 12 वर्ष पूरे कर लगातार तीसरे कार्यकाल की मजबूत नीतियों के साथ आगे बढ़ रही है, तो भारतीय राजनीति का इतिहास एक अभूतपूर्व मोड़ पर खड़ा है ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन चुके हैं। उन्होंने 10 जून 2026 को पद पर लगातार 4,399 दिन पूरे कर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लगातार शासनकाल के 4,398 दिनों के 64 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह सफर केवल समय की निरंतरता का नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में जनता के अभूतपूर्व और अटूट विश्वास का साक्षात प्रमाण है।
इस 12 साल के सफर की सबसे बड़ी विशेषता देश में आई 'दीर्घकालिक राजनैतिक स्थिरता' है। नेहरू जी के रिकॉर्ड को पार करने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नाम कई ऐतिहासिक कीर्तिमान जुड़ गए हैं: तीन लगातार जनादेश: जवाहरलाल नेहरू के बाद वह पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019, 2024) में अपनी पार्टी और गठबंधन को ऐतिहासिक विजय दिलाई है।
सबसे लंबे समय तक गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री: वह भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन चुके हैं। लगातार 6 ऐतिहासिक चुनावी जीत: मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपने नेतृत्व में लगातार 6 बड़े चुनाव (3 बार गुजरात विधानसभा और 3 बार लोकसभा) जीते हैं, जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।
मोदी सरकार की पहचान उसकी 'मजबूत और निर्णायक राजनैतिक इच्छाशक्ति' से है। अतीत की सरकारें जिन संवेदनशील मुद्दों को छूने से कतराती थीं, मोदी सरकार ने उन्हें देशहित में सुलझाने का ऐतिहासिक साहस दिखाया। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसे देश की मुख्यधारा में शामिल करना इस सरकार की सबसे बड़ी संवैधानिक और रणनीतिक जीत है।
तीन तलाक पर प्रतिबंध और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) जैसे दूरदर्शी कदमों ने यह साबित किया कि यह सरकार 'तुष्टिकरण के बिना विकास' और सामाजिक न्याय की नीति पर अडिग है। आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति ने आज देश की सीमाओं को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ बना दिया है।
आर्थिक मोर्चे पर, इस सरकार ने 'आर्थिक राष्ट्रवाद' (Economic Nationalism) की एक ऐसी नई परिभाषा गढ़ी है जिसने भारत को दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है। जीएसटी (GST) के रूप में 'एक देश, एक टैक्स' को सफलतापूर्वक लागू कर देश की कर प्रणाली को पारदर्शी बनाया गया। सबसे बड़ी सफलता देश में आई अभूतपूर्व 'डिजिटल क्रांति' है।
आर्थिक मोर्चे पर, इस सरकार ने 'आर्थिक राष्ट्रवाद' (Economic Nationalism) की एक ऐसी नई परिभाषा गढ़ी है जिसने भारत को दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है। जीएसटी (GST) के रूप में 'एक देश, एक टैक्स' को सफलतापूर्वक लागू कर देश की कर प्रणाली को पारदर्शी बनाया गया। सबसे बड़ी सफलता देश में आई अभूतपूर्व 'डिजिटल क्रांति' है।
आज भारत का यूपीआई (UPI) मॉडल वैश्विक वित्तीय मंचों पर एक मिसाल बन चुका है। 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के तहत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से लेकर रक्षा निर्यात में आई रिकॉर्ड उछाल यह दर्शाती है कि भारत अब दुनिया के लिए केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक प्रमुख वैश्विक उत्पादक (Global Hub) बन चुका है।
मोदी सरकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'कल्याणकारी योजनाएं' रही हैं, जिसने देश के सबसे गरीब और वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा है। 'लूट और बिचौलियों' की पुरानी संस्कृति को हमेशा के लिए खत्म करते हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे गरीबों के खातों में शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाया गया। आयुष्मान भारत के तहत करोड़ों परिवारों को मिला मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवच, जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से साफ जल, और स्वच्छ भारत अभियान के तहत करोड़ों महिलाओं को मिला गरिमापूर्ण जीवन इन योजनाओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति में यह विश्वास जगाया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आज का भारत एक मुखर, स्वतंत्र और निर्णायक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। चाहे वैश्विक संकटों में शांति दूत की भूमिका निभाना हो या वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार बनना, भारत की विदेश नीति आज अत्यंत सुदृढ़ और 'नेशन फर्स्ट' की भावना से प्रेरित है। प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर के 30 से अधिक देशों से मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान इस बात का प्रतीक हैं कि वैश्विक व्यवस्था में अब भारत का स्थान सर्वोच्च है।
आज जब यह सरकार 'विकसित भारत @ 2047' के विराट संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है, तब यह साफ दिखाई देता है कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने एक लंबी और गौरवशाली छलांग लगाई है। जवाहरलाल नेहरू के सबसे लंबे समय तक निरंतर शासन करने के रिकॉर्ड को पार कर प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल राजनीतिक स्थिरता की एक नई परिभाषा लिखी है,
मोदी सरकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'कल्याणकारी योजनाएं' रही हैं, जिसने देश के सबसे गरीब और वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा है। 'लूट और बिचौलियों' की पुरानी संस्कृति को हमेशा के लिए खत्म करते हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे गरीबों के खातों में शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाया गया। आयुष्मान भारत के तहत करोड़ों परिवारों को मिला मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवच, जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से साफ जल, और स्वच्छ भारत अभियान के तहत करोड़ों महिलाओं को मिला गरिमापूर्ण जीवन इन योजनाओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति में यह विश्वास जगाया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आज का भारत एक मुखर, स्वतंत्र और निर्णायक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। चाहे वैश्विक संकटों में शांति दूत की भूमिका निभाना हो या वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार बनना, भारत की विदेश नीति आज अत्यंत सुदृढ़ और 'नेशन फर्स्ट' की भावना से प्रेरित है। प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर के 30 से अधिक देशों से मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान इस बात का प्रतीक हैं कि वैश्विक व्यवस्था में अब भारत का स्थान सर्वोच्च है।
आज जब यह सरकार 'विकसित भारत @ 2047' के विराट संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है, तब यह साफ दिखाई देता है कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने एक लंबी और गौरवशाली छलांग लगाई है। जवाहरलाल नेहरू के सबसे लंबे समय तक निरंतर शासन करने के रिकॉर्ड को पार कर प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल राजनीतिक स्थिरता की एक नई परिभाषा लिखी है,
बल्कि देश को आत्मनिर्भरता, सुशासन और परम वैभव की ओर ले जाने वाला एक मार्गदर्शक स्तंभ भी प्रदान किया है। नीतिगत जड़ता से निकलकर 'वैश्विक नेतृत्व' की ओर बढ़ते भारत की इस यात्रा ने हर नागरिक को बड़े सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए पुरुषार्थ करना सिखाया है।

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