शारीरिक अक्षमता और बीमार पड़े बुजुर्गों के लिए होगा सदभावना वृद्धाश्रम

० इम्तियाज़ अहमद ० 
नई दिल्ली : वृद्धाश्रम सिर्फ़ भारतीय संस्कृति ही नहीं, बल्कि आज की ज़रूरत भी है। बदकिस्मती से जैसे-जैसे जॉइंट फैमिली सिस्ट्म टूट रही है, बहुत से लोग बेसहारा होते जा रहे हैं। पिछले दस सालों से राजकोट में "विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर" सदभावना वृद्धाश्रम चल रहा है। इस वृद्धाश्रम में, जाति या धर्म के भेदभाव के बिना, ज़रूरतमंद बुजुर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार रखा जाता है, वहीं नागरिक सभी सुविधाएँ मुफ़्त दी जाती हैं।

 सदभावना फाउंडेशन के अध्यक्ष, संस्थापक विजय डोबरिया उन्हें पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कर्ष कार्य के लिए 'ग्रीनमैन' की उपाधि से नवाजा गया हैं। संस्थान के अध्यक्ष विजय डोबरिया ने बताया कि शारीरिक अक्षमत और बीमार पड़े बुजुर्गों के लिए हम एक आधुनिक मल्टीस्टोरी शेल्टर होम बना रहें हैं,हमें वृद्धो की ज़रूरत है।

वृद्धाश्रम सिर्फ़ भारतीय संस्कृति ही नहीं, बल्कि आज के कलियुग की ज़रूरत भी है। बदकिस्मती से जैसे-जैसे जॉइंट फैमिली सिस्ट्म टूट रहा है, बहुत से लोग बेसहारा होते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों से राजकोट में "विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर" सदभावना वृद्धाश्रम चल रहा है। इस वृद्धाश्रम में, जाति या धर्म के भेदभाव के बिना, ज़रूरतमंद बुजुर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार रखा जाता है, वहीं नागरिक सभी सुविधाएँ मुफ़्त दी जाती हैं।

 संस्था बुजुर्गों, जरूरत मंदो, बेसहारो के लिए कई वर्षो से गुजरात में काम कर रही हैं, अब हमने विचार किया कि करोड़ रुपये की लागत से 1400 कमरों में 5000 बेसहारा, बीमार और बिस्तर पर पड़े बुजुर्गों को रहने की जगह दी भी जाएगी। दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त सदभावना ओल्ड एज होम होगा। उन्होंने कहा कि विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर बेसहारा, बीमार और बिस्तर पर पड़े बुजुर्गों को ज़िंदगी भर के लिए पूरी तरह से मुफ्त में रखेगा। 

जिसमें हर टावर में 11 फ्लोर होंगे, ताकि हर व्यक्ति को काफी जगह और देखभाल मिल सकेंगे। जहां हर धर्म के धार्मिक स्थल भी बने हैं, पूरी आजादी से अपने धर्म का पालन करतें हैं। अब हमने देश के अन्य राज्यों में विस्तार करने की योजना पर कार्य शुरू किया हैं जिसकी शरुआत दिल्ली से करना चाहते हैं।

यहां रहने वालों को ट्रेंड स्पेशलिस् 24/7 मेडिकल अटेंशन, पर्सनल सुपरविज़न और परिवार जैसी सेंसिटिव केयर देंगे। गुजरात के इस सबसे बड़े वृद्धाश्रम में 700+ बुजुर्ग अपनी रिटायर्ड ज़िंदगी जी रहे हैं। इनमें 400 बुजुर्ग की जरूरतों के साथ होंगे ।

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