अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : योग की शक्ति से हृदय का पोषण–डॉ. सुशील शर्मा
० योगेश भट्ट ०
जम्मू : जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग की बढ़ती महत्ता पर बल देते हुए जीएमसीएच जम्मू के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एनजीओ हम साथ साथ हैं के सहयोग से अखनूर स्थित कामेश्वर मंदिर में एक हृदय जागरूकता एवं स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया।
इस अभियान में डॉ. भोला कुमार, डॉ. आदित्य शर्मा, डॉ. रितिका शर्मा तथा डॉ. अधिश्री बर्गोत्रा भी शामिल रहे। पैरामेडिकल स्टाफ एवं स्वयंसेवकों में कमल शर्मा, रंजीत सिंह, मोहम्मद एजाज, बिलाल अहमद, खुशबिंदर संधू, मोहम्मद अल्ताफ, हृधान्शु कोहली, विशाल मेहरा, राहुल वैद, गोकुल जम्वाल, जतिन भसीन, मुकेश कुमार, गौरव शर्मा, विकास कुमार, राजिंदर सिंह तथा निरवैर सिंह बाली ने सक्रिय योगदान दिया।
जम्मू : जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग की बढ़ती महत्ता पर बल देते हुए जीएमसीएच जम्मू के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एनजीओ हम साथ साथ हैं के सहयोग से अखनूर स्थित कामेश्वर मंदिर में एक हृदय जागरूकता एवं स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया।
कार्यक्रम में अखनूर के विधायक मोहन लाल भगत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। शिविर का उद्देश्य लोगों को योग, ध्यान और स्वस्थ जीवनशैली की उन आदतों के प्रति जागरूक करना था, जो हृदय रोगों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हृदय संबंधी बीमारियां आज भी विश्वभर में बीमारी और मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
डॉ. सुशील शर्मा ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें योग के असंख्य स्वास्थ्य लाभों की याद दिलाता है। भारत की प्राचीन धरोहर योग आज विश्वभर में अपनाई जा रही है और वैज्ञानिक रूप से भी इसके लाभ प्रमाणित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित खान-पान, बढ़ता तनाव, अपर्याप्त नींद, मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं ने हृदय रोगों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।
उन्होंने बताया कि हृदय स्वास्थ्य के लिए योग का सबसे बड़ा योगदान तनाव को कम करने में है। लगातार बना रहने वाला तनाव शरीर में ऐसे हार्मोनल परिवर्तन उत्पन्न करता है जो रक्तचाप और हृदय गति को बढ़ाते हैं तथा सूजन को बढ़ावा देकर हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाते हैं। योगासन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकों के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक शांति प्रणाली सक्रिय होती है और शारीरिक संतुलन बहाल होता है।
डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि योग केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक सजगता, भावनात्मक संतुलन और आत्म-जागरूकता को भी बढ़ावा देता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देते हैं, जिससे अनेक अस्वस्थ आदतें विकसित हो जाती हैं। योग व्यक्ति को अपने शरीर और मन को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है तथा संतुलित आहार, तंबाकू और शराब से दूरी, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जैसी स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों की व्यापक स्वास्थ्य जांच की गई तथा उन्हें हृदय रोगों के जोखिम कारकों और बचाव के उपायों के बारे में विशेषज्ञ सलाह दी गई। चिकित्सा एवं पैरामेडिकल टीमों ने दैनिक जीवन में योग को अपनाने और इन स्वस्थ आदतों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। विधायक मोहन लाल भगत ने डॉ. सुशील शर्मा और उनकी टीम द्वारा योग के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। एनजीओ हम साथ साथ हैं की प्रबंधन समिति के सदस्य मोनू वर्मा, विजय कुमार, भारती सिंह, सोनिया शर्मा, सोनाक्षी राजपूत, शुभम शर्मा एवं प्रगृति महाजन ने डॉ. सुशील शर्मा और उनकी टीम का जनसेवा एवं स्वास्थ्य जागरूकता के लिए आभार व्यक्त किया।
डॉ. सुशील शर्मा ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें योग के असंख्य स्वास्थ्य लाभों की याद दिलाता है। भारत की प्राचीन धरोहर योग आज विश्वभर में अपनाई जा रही है और वैज्ञानिक रूप से भी इसके लाभ प्रमाणित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित खान-पान, बढ़ता तनाव, अपर्याप्त नींद, मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं ने हृदय रोगों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।
उन्होंने बताया कि हृदय स्वास्थ्य के लिए योग का सबसे बड़ा योगदान तनाव को कम करने में है। लगातार बना रहने वाला तनाव शरीर में ऐसे हार्मोनल परिवर्तन उत्पन्न करता है जो रक्तचाप और हृदय गति को बढ़ाते हैं तथा सूजन को बढ़ावा देकर हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाते हैं। योगासन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकों के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक शांति प्रणाली सक्रिय होती है और शारीरिक संतुलन बहाल होता है।
डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि योग केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक सजगता, भावनात्मक संतुलन और आत्म-जागरूकता को भी बढ़ावा देता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देते हैं, जिससे अनेक अस्वस्थ आदतें विकसित हो जाती हैं। योग व्यक्ति को अपने शरीर और मन को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है तथा संतुलित आहार, तंबाकू और शराब से दूरी, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जैसी स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों की व्यापक स्वास्थ्य जांच की गई तथा उन्हें हृदय रोगों के जोखिम कारकों और बचाव के उपायों के बारे में विशेषज्ञ सलाह दी गई। चिकित्सा एवं पैरामेडिकल टीमों ने दैनिक जीवन में योग को अपनाने और इन स्वस्थ आदतों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। विधायक मोहन लाल भगत ने डॉ. सुशील शर्मा और उनकी टीम द्वारा योग के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। एनजीओ हम साथ साथ हैं की प्रबंधन समिति के सदस्य मोनू वर्मा, विजय कुमार, भारती सिंह, सोनिया शर्मा, सोनाक्षी राजपूत, शुभम शर्मा एवं प्रगृति महाजन ने डॉ. सुशील शर्मा और उनकी टीम का जनसेवा एवं स्वास्थ्य जागरूकता के लिए आभार व्यक्त किया।
इस अभियान में डॉ. भोला कुमार, डॉ. आदित्य शर्मा, डॉ. रितिका शर्मा तथा डॉ. अधिश्री बर्गोत्रा भी शामिल रहे। पैरामेडिकल स्टाफ एवं स्वयंसेवकों में कमल शर्मा, रंजीत सिंह, मोहम्मद एजाज, बिलाल अहमद, खुशबिंदर संधू, मोहम्मद अल्ताफ, हृधान्शु कोहली, विशाल मेहरा, राहुल वैद, गोकुल जम्वाल, जतिन भसीन, मुकेश कुमार, गौरव शर्मा, विकास कुमार, राजिंदर सिंह तथा निरवैर सिंह बाली ने सक्रिय योगदान दिया।
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