मोहित राही ने संगीत को बनाया संस्कृति संरक्षण का माध्यम
० आशा पटेल ०
रामगंजमंडी. संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और समाज को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी है। युवा लोक एवं शास्त्रीय संगीत साधक मोहित राही ऐसे ही कलाकारों में शामिल है जो राजस्थान की लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
रामगंजमंडी. संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और समाज को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी है। युवा लोक एवं शास्त्रीय संगीत साधक मोहित राही ऐसे ही कलाकारों में शामिल है जो राजस्थान की लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
विद्यालय अध्ययन के दौरान विकसित हुई संगीत के प्रति उनकी रुचि को उनके प्रारंभिक गुरु लक्ष्मण सिंह भानावत ने संगीत की बुनियादी शिक्षा के साथ अनुशासन और साधना के जरिए आकार दिया। राजस्थान विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातक मोहित ने केंद्रीय विश्वविद्यालय हैदराबाद से संगीत विषय में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। उन्हें विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षांत समारोह में दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित भी किया गया ।
वर्ष 2023 में नव्य नाटक समिति द्वारा आयोजित 48वीं राष्ट्रीय संगीत एवं नृत्य प्रतियोगिता में शास्त्रीय गायन श्रेणी में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले मोहित ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे उस्ताद मीर रज़ाक अली की गायकी और संगीत साधना से प्रेरणा लेते हुए निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने लोक संस्कृति और लोक कलाओं के संरक्षण के उद्देश्य से आरोहण फाउंडेशन की स्थापना की।
संस्था के माध्यम से वे सांस्कृतिक कार्यशालाएं, संवाद कार्यक्रम, व्याख्यान और लोक कला के आयोजन कर युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। मोहित राही को पद्मश्री लाखा खान, पद्मश्री जानकीलाल भांड, पद्मश्री गफूरुद्दीन मेवाती तथा भजन सम्राट अनूप जलोटा जैसे कलाकारों से भी मिलकर और सीखने का अवसर मिला है। संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 'कर्मठ युवा सम्मान' और 'एक्सीलेंट रिसर्च पेपर अवॉर्ड' सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके है। हाल ही में राष्ट्रीय युवा महोत्सव में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर उन्होंने प्रदेश की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया।
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