कुमाऊनी भाषा से जुड़े सामाजिक,साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर विमर्श

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली |  कुमाऊनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से कुमाऊनी भाषा साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति द्वारा दिल्ली स्थित गढ़वाल भवन में कुमाऊनी भाषा संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुमाऊनी भाषा से जुड़े सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र रावत ने की, जबकि समिति के महासचिव राजू पाण्डेय ने कार्यक्रम का संचालन किया। समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह हाल्सी ने समिति के उद्देश्यों, कार्यकलापों एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य कुमाऊनी भाषा और संस्कृति को पुष्पित एवं पल्लवित करना है।
उन्होंने बताया कि नए लेखकों और साहित्यकारों को मंच प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा तथा अगले चार वर्षों में 400 नए लेखकों और साहित्यकारों को समिति से जोड़ना समिति का प्रमुख लक्ष्य है। विभिन्न भाषा संगोष्ठियों एवं सेमिनारों के माध्यम से कुमाऊनी के प्रचार-प्रसार का कार्य लगातार किया जाएगा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चंद्र शेखर रावत (मुख्य स्थायी अधिवक्ता, उत्तराखंड सरकार) उपस्थित रहे। इस अवसर पर अतिथियों एवं समिति के पदाधिकारियों द्वारा कुमाऊनी भाषा सीखने हेतु तैयार की गई कुमाऊनी प्रवेशिका “तुतुरी” का लोकार्पण भी किया गया। समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह हाल्सी ने जानकारी दी कि समिति पिछले दो वर्षों से कुमाऊनी पत्रिका “दुदबोली” का नियमित प्रकाशन कर रही है, जिसका संपादन पत्रकार चारु तिवारी कर रही हैं।

 संगोष्ठी में कुमाऊनी भाषा एवं साहित्य, लोक-संस्कृति, पारंपरिक त्योहार, लोक-जागर, सामाजिक सरोकार, कुमाऊनी फिल्म विकास यात्रा, योग एवं धर्म से जुड़े कुमाऊनी लोकबोध जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कवियों ने काव्य-पाठ के माध्यम से कुमाऊनी भाषा की संवेदनाओं, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक यथार्थ को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में स्वर्गीय गोपाल बाबू गोस्वामी और स्वर्गीय जीत सिंह नेगी को याद कर श्रद्धांजलि दी गई । इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार पूरन चंद्र कांडपाल, रमेश हितैषी, फिल्मकार संजय जोशी, मनोज चंदोला, वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी, योग गुरु रमेश कांडपाल, संगीतकार राजेंद्र चौहान , डॉ. सुरेंद्र रावत, सुरेंद्र सिंह हाल्सी, राजू पाण्डेय, कुंदन भैसोड़ा, राहुल सती, के.एन. पाण्डेय, हेम पंत, महेंद्र लटवाल, संजय जोशी, शिव दत्त पंत, हेमा हरबोला , 

हरीश भंडारी, पूर्व राज्य मंत्री धीरेंद्र प्रताप , शमशाद पिथौरागढ़ी, बीना नयाल , विमला राणा खेल सिंह जैरा, अकादमी के सचिव रमेश तिवारी सहित अनेक बुद्धिजीवी, सामाजिक एवं साहित्यिक जन उपस्थित रहे।
समिति के स्लोगन — “काव्य में कुमाऊं, स्वर में संस्कृति” के अनुरूप संचालित यह आयोजन कुमाऊनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक सशक्त और सार्थक पहल सिद्ध हुआ।

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