इंडिया इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी एक्सपो में ईपीसीएच पवेलियन ने भारतीय शिल्प कौशल का किया प्रदर्शन
नयी दिल्ली। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद अपने समर्पित ईपीसीएच पवेलियन के माध्यम से हॉस्पिटैलिटी एवं होरेका क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप हस्तनिर्मित उत्पादों की एक विशिष्ट श्रृंखला का प्रदर्शन इंडिया इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी एक्सपो (आईएच्ई 2026) के 9वें संस्करण में कर रही है । इस प्रदर्शनी का आयोजन 5 से 8 अगस्त तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में किया जा रहा है।ईपीसीएच पवेलियन का उद्घाटन ईपीसीएच के डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष; ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार तथा राजेश रावत, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर प्रमुख सदस्य निर्यातक, भाग लेने वाले कारीगर एवं आतिथ्य उद्योग के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।इस अवसर पर डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच ने कहा “हॉस्पिटैलिटी उद्योग भारतीय हस्तशिल्प निर्माताओं, निर्यातकों एवं कारीगरों के लिए व्यापक संभावनाएँ प्रदान करता है, क्योंकि होटल, रिसॉर्ट एवं रेस्तरां अपने अतिथियों को अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार विशिष्ट, सतत एवं डिजाइन-आधारित उत्पादों की तलाश में रहते हैं। विविध सामग्रियों, तकनीकों एवं क्षेत्रीय शिल्प परंपराओं से समृद्ध भारतीय हस्तशिल्प समकालीन आतिथ्य स्थलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूर्णतः सक्षम है।डॉ. खन्ना ने कहा “आईएच्ई 2026 में ईपीसीएच पवेलियन के माध्यम से हम अतिथि कक्षों, रेस्तरां, लॉबी, बैंक्वेट हॉल, वेलनेस स्पेस एवं आउटडोर क्षेत्रों के लिए भारतीय हस्तशिल्प की अनुकूलित समाधान विकसित करने की क्षमता प्रस्तुत कर रहे हैं। यह भागीदारी हमारे निर्यातकों एवं कारीगरों को संस्थागत खरीदारों से सीधे जुड़ने तथा अग्रणी हॉस्पिटैलिटी ब्रांडों के साथ दीर्घकालिक सोर्सिंग संबंध विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी।
रावत ने आगे कहा, “इस संस्करण में ईपीसीएच के 7 सदस्य निर्यातक भाग ले रहे हैं, जो होम डेकोर, ग्लासवेयर, फर्नीचर, हाउसवेयर, कालीन, किचनवेयर, घरेलू उपयोग के उत्पाद, जूट उत्पाद आदि का प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ईपीसीएच ने मास्टर शिल्पकारों/कारीगरों द्वारा भारतीय पारंपरिक शिल्पों के लाइव डेमोंस्ट्रेशन सहित एक विशेष थीमैटिक डिस्प्ले भी स्थापित किया है।
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद देश से हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और देश के विभिन्न शिल्प क्लस्टरों में घरेलू, लाइफस्टाइल, फर्नीचर तथा फैशन ज्वेलरी एवं एक्सेसरीज़ उत्पादन में लगे लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के प्रतिभाशाली हाथों के जादू की ब्रांड छवि बनाने के लिए एक नोडल संस्था है । ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा ।
ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा “आईएच्ई आज एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक मंच के रूप में स्थापित हो चुका है, जो आपूर्तिकर्ताओं को उन निर्णयकर्ताओं से जोड़ता है जो भारत के तेजी से विकसित हो रहे आतिथ्य अवसंरचना क्षेत्र को दिशा दे रहे हैं।
सोर्सिंग विशेषज्ञों, होटल मालिकों, इंटीरियर डिजाइनरों, वास्तुकारों एवं परियोजना सलाहकारों की उपस्थिति हस्तशिल्प निर्माताओं को संस्थागत खरीद आवश्यकताओं को समझने तथा नवाचारी, अनुकूलित एवं बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराए जा सकने वाले समाधान प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने आगे कहा, “भारत का हॉस्पिटैलिटी उद्योग अपने प्रतिष्ठानों के डिज़ाइन में स्थानीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत एवं सतत सामग्रियों को तेजी से अपना रहा है। इससे हमारे निर्यातकों, कारीगरों एवं उद्यमियों के लिए होटलों एवं रेस्तरां के साथ उत्पाद विकास, इंटीरियर स्टाइलिंग तथा विशेष रूप से तैयार संग्रह विकसित करने का स्वाभाविक अवसर उत्पन्न होता है। हस्तनिर्मित उत्पादों को हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला से जोड़कर हम नई मांग उत्पन्न कर सकते हैं, कारीगरों की आजीविका को सुदृढ़ कर सकते हैं तथा भारतीय शिल्प कौशल को आधुनिक आतिथ्य डिज़ाइन का अभिन्न अंग बना सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा, “भारत का हॉस्पिटैलिटी उद्योग अपने प्रतिष्ठानों के डिज़ाइन में स्थानीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत एवं सतत सामग्रियों को तेजी से अपना रहा है। इससे हमारे निर्यातकों, कारीगरों एवं उद्यमियों के लिए होटलों एवं रेस्तरां के साथ उत्पाद विकास, इंटीरियर स्टाइलिंग तथा विशेष रूप से तैयार संग्रह विकसित करने का स्वाभाविक अवसर उत्पन्न होता है। हस्तनिर्मित उत्पादों को हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला से जोड़कर हम नई मांग उत्पन्न कर सकते हैं, कारीगरों की आजीविका को सुदृढ़ कर सकते हैं तथा भारतीय शिल्प कौशल को आधुनिक आतिथ्य डिज़ाइन का अभिन्न अंग बना सकते हैं।
राजेश रावत, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच ने कहा, “आईएच्ई 2026 में ईपीसीएच की भागीदारी ने हस्तशिल्प एवं आतिथ्य क्षेत्रों के बीच प्रत्यक्ष व्यावसायिक संपर्क स्थापित किया है। प्रदर्शक ऐसे उत्पाद प्रस्तुत कर रहे हैं जिन्हें होटल, रेस्तरां, रिसॉर्ट एवं कैटरिंग प्रतिष्ठानों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप आकार, फिनिश, सामग्री, रंग, ब्रांडिंग एवं मात्रा के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।
हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक महत्वपूर्ण घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार के रूप में उभर सकता है। शिल्प उद्यमों एवं होरेका खरीदारों के बीच अधिक सहयोग न केवल निर्यातकों के लिए नए व्यावसायिक अवसर उत्पन्न करेगा, बल्कि देश के प्रमुख शिल्प क्लस्टरों में कारीगरों के लिए निरंतर मांग भी सुनिश्चित करेगा।
रावत ने आगे कहा, “इस संस्करण में ईपीसीएच के 7 सदस्य निर्यातक भाग ले रहे हैं, जो होम डेकोर, ग्लासवेयर, फर्नीचर, हाउसवेयर, कालीन, किचनवेयर, घरेलू उपयोग के उत्पाद, जूट उत्पाद आदि का प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ईपीसीएच ने मास्टर शिल्पकारों/कारीगरों द्वारा भारतीय पारंपरिक शिल्पों के लाइव डेमोंस्ट्रेशन सहित एक विशेष थीमैटिक डिस्प्ले भी स्थापित किया है।
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा आगरा से जरी-जरदोजी, अल्मोड़ा से लोक चित्रकला, देहरादून से मोमबत्ती शिल्प, दिल्ली से पेपर मेशी एवं फ्यूजन क्राफ्ट, गुरुग्राम से ड्राई फ्लावर क्राफ्ट, होशियारपुर से होम डेकोर, कोलकाता से ग्रास फाइबर क्राफ्ट, लखनऊ से चिकनकारी तथा प्रयागराज से गुड़िया एवं खिलौना शिल्प के मास्टर शिल्पकारों/कारीगरों को प्रतिनियुक्त किया गया है।
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद देश से हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और देश के विभिन्न शिल्प क्लस्टरों में घरेलू, लाइफस्टाइल, फर्नीचर तथा फैशन ज्वेलरी एवं एक्सेसरीज़ उत्पादन में लगे लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के प्रतिभाशाली हाथों के जादू की ब्रांड छवि बनाने के लिए एक नोडल संस्था है । ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान कुल हस्तशिल्प निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा ।
टिप्पणियाँ