नदियों को सुरंग में डाईवर्ट करने वाली परियोजनायें हिमालय की सेहत बिगाड़ रही है
० सुरेश भाई ० बाढ़, भूस्खलन,भूकंप के लिए अति संवेदनशील हिमालय को भूवैज्ञानिकों ने जोन 4 और 5 में रखा है। इसके बावजूद भी क्लीन एनर्जी के नाम पर सुरंग आधारित परियोजनाओं को महत्व दिया जा रहा है। जबकि वैश्विक स्तर पर क्लीन एनर्जी के दावे अस्थाई साबित हो रहे हैं। इस नाम पर जो निर्माण हो रहा है वह प्रकृति में अचंभित करने वाला विनाशकारी बदलाव ला रहा है। दूसरी ओर नदियों और जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संतुलन के दावे भी कमजोर हैं। पहाड़ों की नसों को काटकर बिजली के सपनों को साकार करने के लिए नदियों को सुरंग में डाईवर्ट करने वाली परियोजनायें हिमालय की सेहत बिगाड़ रही है। हिमालय में करोड़ों लोगों का निवास स्थान भी है लेकिन यहां से नीचे बहकर जा रही नदियों का रौद्र रूप जानलेवा बनता जा रहा है। इसलिए हिमालय को कितना भी रोज जपते रहेंगे उससे नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती है।क्योंकि विकास और पर्यावरण के बीच में जब संतुलन नहीं बना पा रहे हैं तो देखिए कि हिमालय क्षेत्र में लंबी-लंबी सुरंगों के निर्माण के बाद अनेकों जिंदगियां पिछले दो दशक में दफन हो गई इसके साथ ही हिमालय की अमूल्य प्राकृतिक संपदा का ज...