प्रवासी साहित्य के स्वरूप एवं प्रवृत्तियों पर साहित्यिक परिसंवाद आयोजित
० आशा पटेल ०
जयपुर। स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान, जयपुर एवं कानोडिया पी जी महिला कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रवासी साहित्यः स्वरूप और प्रवृत्तियाँ’ विषय पर साहित्यिक परिसंवाद का आयोजन परिसर में किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा कि प्रवासी साहित्य भारतीय समाज, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक संदर्भ में देखने का अवसर प्रदान करता है।
जयपुर। स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान, जयपुर एवं कानोडिया पी जी महिला कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रवासी साहित्यः स्वरूप और प्रवृत्तियाँ’ विषय पर साहित्यिक परिसंवाद का आयोजन परिसर में किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा कि प्रवासी साहित्य भारतीय समाज, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक संदर्भ में देखने का अवसर प्रदान करता है।
कार्यक्रम में प्रवासी साहित्यकार शालिनी वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रवासी साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रवासी साहित्य भारतीय संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विदेशों में हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार तथा प्रवासी रचनाकारों के योगदान पर भी चर्चा की।
हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शीताभ शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुये साहित्यकार शालिनी से उनकी साहित्यिक यात्रा, हिंदी भाषा और साहित्य तथा प्रवास में साहित्य सृजन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। इसी क्रम में हिन्दी विभाग की छात्राओं ने भी वक्ता से प्रश्न पूछे। इन प्रश्नों के उत्तर देते हुए वक्ता ने विदेशों में हिन्दी भाषा और साहित्य के अध्ययन-अध्यापन तथा रोजगार की संभावनाओं की जानकारी भी दी। विशिष्ट अतिथि डॉ. संदीप अवस्थी ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में विदेशों में कार्यरत अनेक संस्थाओं और प्रवासी साहित्यकारों की भूमिका पर प्रकाश् डाला।
स्पंदन संस्थान की अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने प्रवासी साहित्यकारों के इतिहास और वर्तमान साहित्य पर प्रकाश डालते हुए मॉरीशस के प्रख्यात प्रवासी साहित्यकार स्व अभिमन्यु अनंत के उपन्यास “लाल पसीना”और “गांधी बोलते हैं “ उपन्यास के बारे में बताया और वर्तमान में अमेरिका, लंदन और यूरोप के प्रवासी साहित्यकारों विशेषकर महिला साहित्यकारों के साहित्य पर चर्चा की, उन्होंने बताया की साहित्य समर्था पत्रिका ने प्रवासी साहित्यकार डॉ. सुधा ओम ढींगरा,
अर्चना पैन्यूली, कविता वाच्कनवी और दिव्या माथुर पर विशेषांक निकाले हैं। महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में ‘पहला गिरमिटिया’ उपन्यास का उल्लेख किया और डायस्पोरा लिटरेचर की जानकारी साझा की, साथ ही बताया कि किस प्रकार प्रवासी भारतीय अपनी जड़ों से आज भी जुडे़ हुये हैं। स्पंदन की संस्थापक अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने इस आयोजन और सहभागिता के लिये सभी का धन्यवाद किया।
इस परिसंवाद में उप-प्राचार्य, डॉ. रंजुला जैन, डॉ. मनीषा माथुर, सहायक आचार्य, डॉ. धर्मा यादव तथा प्रमुख साहित्यकार एस. भाग्यम शर्मा, कवि विनय कुमार अंकुश, प्रो. बीना अग्रवाल, डॉ.अलका अग्रवाल सहित अनेक साहित्यकारों एवं छात्राओं ने भाग लिया।
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