भाजपा के राजनीतिक एजेंडा को बढ़ाने के लिए यह बिल है : डोटासरा

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर। राजस्थान की भाजपा सरकार ने कैबिनेट बैठक में डिस्टर्ब एरियाज बिल 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है, जो भाजपा के राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए है, इस बिल की भाषा ही संवैधानिक नहीं है, केवल राजनीतिक एजेंडा की भाषा है। सरकार ने केन्द्र से आई हुई गुजरात की पर्ची प्राप्त कर, यह बिल बनाया है, गुजरात मॉडल के रूप में यह बिल आया है जिसका उद्देश्य दंगा रोकना नहीं बल्कि राजस्थान जैसे शांत प्रदेश को अशांत करने की एक साजिश है।

 इस बिल की भाषा प्रदेश में केवल अशांति पैदा करने के लिए है, जिससे जनता के मुद्दे पर चर्चा ना हो और प्रदेश में डर का माहौल बने। लोगों का ध्यान भटकाने के लिये यह बिल लाया गया है और सरकारी गुंडागर्दी को वैधानिक जामा पहनाने की एक कोशिश है। पहले सरकार किसी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित करेगी, फिर शहर को करेंगे, उसके बाद पूरे प्रदेश को अशांत बनाएंगे, जबकि शांति बहाली के लिए पहले से ही कानून है, अधिकारी राज लाकर भाजपा की प्रदेश सरकार लोकतंत्र पर प्रहार कर रही है।

 इस प्रकार का बिल पूर्ण रूप से संविधान का उल्लंघन है, संविधान के अनुच्छेद 300ए में हर व्यक्ति को अपनी संपत्ति पर अधिकार है, उसे वंचित करने का यह षड्यंत्र है, संविधान में अनुच्छेद 14 में सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त है, यह बिल उसका भी उल्लंघन करता है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत यह बिल नागरिकों के अधिकारों के विरुद्ध लाया गया है, जबकि शांति बहाली के लिए पूर्व से ही आईपीसी जो अब bns है तथा सीआरपीसी जो अब bnss है मेंं अनेक प्रावधान है।

 जनसंख्या असंतुलन कोई कानूनी शब्द नहीं है, डिस्टर्ब एरिया किस आधार पर घोषित होगा इसका कोई उल्लेख नहीं है, केवल भाजपा का राजनीतिक एजेंडा है, उसे आगे बढ़ाने के लिए यह कानून लाया गया है और सांप्रदायिक सद्भाव प्रदेश का खत्म कर गुजरात की तरह यहां भी डर का माहौल बनाकर भाजपा सत्ता में बने रहना चाहती है। लोग मूलभूत अधिकारों और सरकार की नाकामियों पर चर्चा ना करें, उससे ध्यान भटकाने हेतु यह बिल लाया गया है। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जयपुर पर प्रेस को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

 डोटासरा ने कहा कि भाजपा कानून-व्यवस्था कायम रखने में नाकाम रही है और अब प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकरूपता को खंडित करने के लिए अपने एजेंडे के तहत् गुजरात मॉडल के आधार पर केन्द्र से प्राप्त पर्ची पढक़र यह बिल लाई है, जबकि देश भर में सबसे शांत कहे जाने वाले राजस्थान प्रदेश में जहां सभी आपसी सौहार्द के साथ रहते हैं, विभाजन करने का उद्देश्य भाजपा का है। प्रदेश में जनप्रतिनिधियों से ऊपर अधिकारियों को अधिकार देना चाहती है, 

जो लोकतंत्र की परंपराओं और सिद्धांतों के विपरीत है। इस बिल के पश्चात प्रदेश में निवेश करने वाले दूर हटेंगे, प्रदेश का विकास रूकेगा, व्यापार घटेगा, लोगों के जमीनों के दाम घटेंगे और समाज में बांटने का काम भाजपा करेगी। प्रदेश का सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ेगा और जो सक्षम अधिकारी हैं वह असीमित अधिकारों के साथ आम नागरिकों के मूलभूत संवैधानिक अधिकारों का हनन करेंगे।

 कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा सत्र में भाजपा के इस संविधान के प्रावधानों के विपरीत बनाए गए बिल का पुरजोर विरोध कर भाजपा सरकार की नाकामियों को एक्सपोज करेगी और जनता के अधिकारों के लिए सदन से सडक़ तक की लड़ाई लड़ेगी।

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