राजस्थान के पत्थरों की विश्व में अनूठी पहचान,उद्योग अब नई ऊंचाइयां छूने को तैयार : मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा

By Asha Patel, Jaipur.
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान के पत्थरों की विशिष्टता की विश्व पटल पर अनूठी पहचान है। देशभर के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों, किलों, महलों में राजस्थान का पत्थर उपयोग में लाया गया है। अब राजस्थान का पत्थर उद्योग नई ऊंचाइयां छूने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा हम इस उद्योग को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 
शर्मा जयपुर के जेईसीसी में आयोजित इंडिया स्टोन मार्ट के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इंडिया स्टोनमार्ट प्रदर्शनी नए राजस्थान के संकल्प का प्रतीक है। यह आयोजन भारतीय प्राकृतिक पत्थर उद्योग की शक्ति और सामर्थ्य को प्रदर्शित करने का एक वैश्विक मंच बन चुका है इस स्टोन मार्ट का पहली बार 26 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में वेबसाइट निर्माण, डिजिटल मोबाइल एप्लीकेशन तथा विशाल क्षेत्र में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनकर उभर रहा है। ‘मेक इन इंडिया‘ और ‘आत्मनिर्भर भारत‘ की महत्वाकांक्षी परिकल्पना ने उद्योगों को नई दिशा और नया विश्वास दिया है। भारतीय ग्रेनाइट, संगमरमर और सैंडस्टोन दुनियाभर में प्रसिद्ध है। भारत पत्थर निर्यातक के साथ मूल्य संवर्धन और नवाचार का केंद्र भी बन रहा है। साथ ही, हमारी कंपनियां वैश्विक संस्थानों के रूप में तेजी से उभर रही हैं। यह हमारे उद्योग के लिए तेज गति से बढ़ने का सुनहरा अवसर है।

 शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार ने पत्थर उद्योग सहित सभी प्रकार के उद्योगों के लिए निवेश-अनुकूल और नीति-स्थिर वातावरण तैयार करने का काम किया है। सिंगल विंडो सिस्टम, औद्योगिक बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण, लॉजिस्टिक्स में सुधार, प्रक्रियाओं का सरलीकरण जैसे नवाचारों से उद्यमी बिना परेशानी के यहां आसानी से स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकता है।

 उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने अनेक नीतियां लागू कीं है जिससे निवेश करना आसान हुआ है और आर्थिक विकास, नवाचार एवं रोजगार सृजन के भी कई नए मार्ग खुले हैं। उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट के तहत किए गए 35 लाख करोड़ के एमओयू में से 8 लाख करोड़ के कार्य शुरू हो चुके है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विपुल खनिज संपदा है। यहां कुल 85 तरह के खनिज उपलब्ध है। मकराना का संगमरमर, किशनगढ़ का मार्बल सहित राजसमंद, जालौर, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा के पत्थर दुनियाभर में प्रसिद्व है। राजस्थान के पास न केवल समृद्ध संसाधन हैं, बल्कि सदियों पुरानी शिल्पकला की परंपरा भी है। साथ ही, हमारे कारीगरों की कला विश्वविख्यात है। हमारे पत्थर को पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिल रही है।

 उन्होंने कहा कि कहा कि उद्योग की असली ताकत हमारे कुशल कारीगर और मेहनतकश श्रमिक हैं। उनके हाथों की कारीगरी ही साधारण पत्थर को अद्भुत कला में बदलती है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के लिए श्रमिकों की सुरक्षा एवं सम्मान सर्वाेच्च प्राथमिकता है। साथ ही, श्रमिकों के लिए आधुनिक सुरक्षा उपकरण, कौशल प्रशिक्षण, बेहतर काम का माहौल और उचित मजदूरी सुनिश्चित की जा रही है।

इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार पत्थर उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है। राज्य सरकार द्वारा निवेश परक नई नीतियों, सिंगल विंडो क्लियरेंस, प्रक्रियाओं का सरलीकरण सहित विभिन्न नवाचारों के माध्यम से उद्यमियों को राहत दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह इंडिया स्टोनमार्ट प्रदेश के पत्थर से जुड़े उद्यमियों को वैश्विक पटल पर आगे ले जाने के लिए सहायक सिद्ध होगा।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री प्रकाशचंद, आर.के. मार्बल्स के चैयरमेन अशोक पाटनी, ईरान और टर्की के प्रतिनिधिगण, सहित लघु उद्योग भारती के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, रीको एवं सीडॉस के अधिकारीगण, बड़ी संख्या में उद्यमी, वास्तुकार एवं श्रमिक मौजूद रहे।

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