आदित्य बिड़ला ग्रुप ने आईएनटी परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी शुरु की

० आशा पटेल ० 
मुंबई, आदित्य बिड़ला ग्रुप ने आईएनटी आदित्य बिड़ला परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी की शुरुआत की है, जिससे भारत के सबसे पुराने और सांस्कृतिक संस्थानों में से एक को नया रूप मिला है। यह इंडियन नेशनल थियेटर (आईएनटी) के लिए एक नई शुरुआत है। इस संस्था ने देश की आजादी के पहले से लेकर आज तक कलाकारों और दर्शकों की कई पीढ़ियों को तैयार किया है। इस एकेडमी का उद्घाटन एकेडमी की चेयरपर्सन राजश्री बिड़ला ने आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, नीरजा बिड़ला, अनन्या बिड़ला और आर्यमन विक्रम बिड़ला की उपस्थिति में किया।
यह पहल आदित्य बिड़ला समूह के इतिहास की एक खास विशेषता को दर्शाती है: ऐसे संस्थानों का निर्माण करना जो दीर्घकालिक विकासात्मक संपत्ति बन जाते हैं। समूह ने पीढ़ियों से स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, अनुसंधान केंद्रों, सांस्कृतिक संस्थानों और सामुदायिक मंचों के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण में निवेश किया है। आईएनटी का यह नया रूप उसी विरासत को आगे बढ़ाता है, जिससे एक ऐसा स्थान तैयार होगा जहाँ भारत की कलात्मक परंपराओं को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित, सराहा और नए रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
यह एकेडमी केवल एक परफॉर्मिंग आर्ट्स केंद्र नहीं है, बल्कि इसे कलात्मक उत्कृष्टता के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े नवाचार और प्रयोगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ थिएटर, संगीत और नृत्य के क्षेत्रों में प्रतिभाओं को निखारेगा।
राजश्री बिड़ला ने कहा, "आईएनटी आदित्य बिड़ला परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी, भारत की शानदार कला और संस्कृति को हमारा सलाम है। यह उन अनगिनत लोगों के प्रति सम्मान है, जिन्होंने सालों से हमारी परंपराओं को जिंदा रखा है। यह एकेडमी आदित्य विक्रम बिड़ला की इस सोच को पूरा करती है कि कला, कल्पना और संस्कृति एक अच्छे समाज के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
हम एक ऐसा संस्थान बनाना चाहते हैं जो हमारी पुरानी और पारंपरिक कलाओं का आदर करे, नए ज़माने की सोच को भी अपनाए और नए कलाकारों को आगे बढ़ने के मौके दे। सबसे बढ़कर, हम उम्मीद करते हैं कि यह एक ऐसा देशव्यापी मंच बने जहाँ भारत के अलग-अलग कोनों से लोग एक साथ आ सकें, एक-दूसरे से सीख सकें और देश में कला के भविष्य को बेहतर बना सकें।

एकेडमी की सलाहकार परिषद में भारतीय परफॉर्मिंग आर्ट्स के कुछ सबसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं, जिनमें उस्ताद अमजद अली खान, डॉ. एन. राजम, शंकर महादेवन, उल्हास कशालकर, अरुणा साईराम, लालगुड़ी जीजेआर कृष्णन, लुइस बैंक्स, बेला सहगल, यू. राजेश, सिद्धार्थ रॉय कपूर, रजित कपूर, टेरेंस लुईस और क्लिंट वलादारेस शामिल हैं, जिनमें से कई लोग इस लॉन्च में शामिल हुए।

इस शाम ने भारत के कलात्मक ताने-बाने की समृद्धि और विविधता का जश्न मनाया। मुख्य अतिथि, प्रसिद्ध कवि, गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने साइरस साहूकार के साथ एक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने भारत के सांस्कृतिक विमर्श को आकार देने में बीते अपने जीवन के संस्मरण साझा किए और मजबूती, रचनात्मकता तथा भविष्य की संभावनाओं पर खुलकर बात की।

 गायिका कौशिकी चक्रवर्ती ने चार महान गायिकाओं नूरजहाँ, शोभा गुर्टू, किशोरी अमोनकर और बेगम अख्तर को एक संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने प्रदर्शन में परंपरा और समकालीन व्याख्या को इस तरह पिरोया, जिसने एकेडमी के व्यापक दृष्टिकोण को जीवंत कर दिया।

आईएनटी की जड़ें 1940 के दशक से जुड़ी हैं, जब भारत अपने स्वतंत्रता संग्राम के दौर से गुजर रहा था। कमलादेवी चट्टोपाध्याय जैसी दूरदर्शी हस्तियों के मार्गदर्शन में, इस संस्थान का उदय इस विश्वास के साथ हुआ था कि संस्कृति और रचनात्मकता एक राष्ट्र के निर्माण के अभिन्न अंग हैं। दशकों से, आईएनटी भारत के कुछ सबसे प्रसिद्ध कलाकारों के लिए एक लॉन्चपैड बना,

 जिनमें पी. एल. देशपांडे, डॉ. श्रीराम लागू, अमरीश पुरी, सदाशिव अमरापुरकर, स्मिता पाटिल, संजीव कुमार, दीना पाठक, भक्ति बर्वे, रोहिणी हट्टंगड़ी, अशोक सराफ, परेश रावल और स्वरूप संपत शामिल हैं।
इसके साथ ही, एक समर्पित अभिलेखागार केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जो दुर्लभ संगीत रिकॉर्डिंग्स, प्रदर्शनों और सिनेमाई कृतियों को संरक्षित करेगा, जिससे भावी पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान सांस्कृतिक कोष तैयार होगा।

एक गैर-लाभकारी संस्था के तौर पर काम करने वाली, इस एकेडमी का मकसद सिर्फ कला को बढ़ावा देना ही नहीं है। सामाजिक कार्यक्रमों, शिक्षा और लोगों से जुड़कर, यह कला को हर किसी तक पहुँचाना चाहती है, खासकर उन लोगों तक जिन्हें इसके मौके नहीं मिलते। इसका उद्देश्य यह है कि कला के ज़रिए लोग आत्मनिर्भर बनें, उन्हें आगे बढ़ने के नए मौके मिलें और समाज में सबको बराबरी का स्थान मिले।

 यह एकेडमी आदित्य बिड़ला समूह के उन संस्थानों की लंबी विरासत में शामिल हो गई है जो समाज को मजबूत करते हैं, जीवन को समृद्ध बनाते हैं, और 'फोर्स फॉर गुड' बनने की समूह की स्थायी आकांक्षा को साकार करते हैं।

टिप्पणियाँ