विराट संयुक्त आंदोलन का देश और प्रदेश भर में मजदूर-किसानों का विरोध प्रदर्शन
० आशा पटेल ०
जयपुर। मोदी सरकार द्वारा कामकाजी लोगों पर थोपी जा रही किसान-विरोधी और मज़दूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ 'जेल भरो', 'रास्ता रोको', 'रेल रोको' और अन्य तरह के बड़े विरोध प्रदर्शन किये गये। संयुक्त किसान मोर्चा और केन्द्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा अपने अखिल भारतीय सम्मेलन में राष्ट्रव्यापी आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था।इस आह्वान के तहत राज्य भर में संयुक्त किसान मोर्चा राजस्थान (SKM ) और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU) के संयुक्त तत्वावधान में किसानों और श्रमिकों ने विशाल विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया और गिरफ्तारियां दी। राज्य कार्यालय रिपोर्टों के अनुसार राज्य की राजधानी जयपुर सहित अनूपगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना-कुचामन, कोटा, भरतपुर, अलवर,सवाई माधोपुर, जोधपुर,फलौदी, बाड़मेर-जैसलमेर, जालौर, उदयपुर, डूंगरपुर आदि जिलों में हजारों की संख्या में किसानों और मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन किये और गिरफ्तारियां दी।संयुक्त किसान मोर्चा, राजस्थान की ओर से डॉ.संजय "माधव" ने बताया कि जेल भरो आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर और केन्द्रीय श्रमिक संगठनों के समर्थन से पूरे देश में शुरू होने वाले 'खेती बचाओ, उद्योग बचाओ और भारत बचाओ' की शुरुआत बताया। उन्होंने आज के इस आंदोलन को देश में एक बड़े और निर्णायक संघर्ष का शंखनाद बताया। आज के इस जेल भरो आंदोलन और विरोध- प्रदर्शनों ने पूरे देश के मेहनतकश लोगों के बीच मज़दूर-किसान एकता का एक मज़बूत संदेश दिया है।कॉर्पोरेट-पूंजीवादी ताकतों द्वारा किसानों और मज़दूरों के बेरहम शोषण के ख़िलाफ़ यह आंदोलन किया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित आमसभा को सम्बोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि देश में ना तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिल रहा है और ना ही मज़दूरों और ग्रामीण खेतिहर मज़दूरों को सम्मानजनक जीवन के लिए न्यूनतम मज़दूरी नहीं दी जा रही है। इस विरोध प्रदर्शन साथ एक बड़े और निर्णायक संघर्ष का शंखनाद हो गया है।यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि देश के किसान, मजदूरों और आम जनता की निम्नलिखित सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं हैं फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (मुक्त व्यापार समझौतों) को रद्द करो,कॉर्पोरेट्स को खेती से बाहर निकालो,किसानों के ज़मीन के अधिकारों की रक्षा करो,सभी फसलों के लिए MSP@C2+50% और गारंटीशुदा खरीद का कानून बनाओ,MGNREGA को बहाल करो ,खेतिहर मज़दूरों को 200 दिन का काम और 700 रुपये मज़दूरी दो,सभी किसानों की सम्पूर्ण कर्ज़ माफ़ी की घोषणा करो और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा दो,4 लेबर कोड (श्रम कानूनों) को रद्द करो,सभी मज़दूरों को कम से कम 42,000 रुपये मज़दूरी दो ,देश के संघीय ढांचे के तहत राज्यों के अधिकारों की रक्षा करो और राज्यों को मिलने वाले डिविज़िबल पूल (बांटे जाने वाले राजस्व) के हिस्से को मौजूदा 31% से बढ़ाकर 50% करो (जिसमें सेस और सरचार्ज भी शामिल हों),बिजली के निजीकरण पर रोक लगाओ , प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाना बंद करो,बीज बिल 2025 को वापस लो,राज्य के हिस्से का पूरा पानी लेने और नहरों का निर्माण कर पेयजल और खेती सिंचाई के उपलब्ध कराने के लिये नहरों का निर्माण करो,
वन भूमि पर आदिवासी किसानों को अधिकार दो ,पट्टे दो,ग्रामीण और शहरी इलाकों में घर विहीन लोगों को घर दो ,सभी बसे हुये लोगों को घरों के पट्टे दो आदि। उपरोक्त मांगों और अन्य स्थानीय मांगों को लेकर देश और राज्य भर में जुझारू आंदोलन का बिगुल बज गया है जो कि आने वाले दिनों में एक विशाल राष्ट्रव्यापी संयुक्त किसान-मजदूर आंदोलन की बुनियाद बनेगा। आंदोलन के अगले चरण में 17 अगस्त से 25 अगस्त तक जनप्रतिनिधियों एवं सरकारों के प्रमुखों को सामूहिक प्रतिनिधिमंडलों द्वारा ज्ञापन दिया जायेगा।
स्थानीय विधायक/सांसद को मांग-पत्र सौंप कर विरोध-अभियान का हिस्सा बनाया जायेगा। इस आंदोलन की तैयारी के लिए धरना, पदयात्रा, साइकिल यात्रा, वाहन रैली, ट्रैक्टर रैली आदि आंदोलनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा।
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