पश्चिमी दिल्ली के डीडीए पॉकेट-8 नसीरपुर में धूमधाम से मनाया गया आज़ादी का जश्न
० शादाब सैफ़ी ०
नयी दिल्ली : डीडीए पॉकेट नंबर-8, नसीरपुर, द्वारका सेक्टर-1ए में देश के 80वें यौमे आज़ादी के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह और देशभक्ति के जज़्बे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सैफ़ी उर्दू सेंटर के चेयरमैन एवं हिन्दी-उर्दू के कवि-पत्रकार इरफ़ान राही सैदपुरी सैफ़ी, डीडीए पॉकेट नंबर-8 आरडब्ल्यूए के प्रधान रियाज़ अंसारी तथा सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार विक्रमादित्य सिंह ने संयुक्त रूप से तिरंगा फहराया।
नयी दिल्ली : डीडीए पॉकेट नंबर-8, नसीरपुर, द्वारका सेक्टर-1ए में देश के 80वें यौमे आज़ादी के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह और देशभक्ति के जज़्बे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सैफ़ी उर्दू सेंटर के चेयरमैन एवं हिन्दी-उर्दू के कवि-पत्रकार इरफ़ान राही सैदपुरी सैफ़ी, डीडीए पॉकेट नंबर-8 आरडब्ल्यूए के प्रधान रियाज़ अंसारी तथा सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार विक्रमादित्य सिंह ने संयुक्त रूप से तिरंगा फहराया।
ध्वजारोहण में सैकड़ों स्थानीय निवासियों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक शिरकत की। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार विक्रमादित्य सिंह ने देशप्रेम, एकता, भाईचारे और हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए इरफ़ान राही और रियाज़ अंसारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये दोनों लोग अपनी कॉलोनी में पूरे हिन्दुस्तान की खूबसूरत तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों हमेशा बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों की समान रूप से सेवा करते हैं और समाज में आपसी सौहार्द एवं भाईचारे को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं।समाजसेवा के लिए हिन्दू मुस्लिम सर्वधर्म एकता मंच की ओर विक्रमादित्य सिंह , रियाज़ अंसारी, सलीम उस्ताद होटल वाले, हनीफ अहमद, सलीम मलिक और मकसूद कुरैशी को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सैफ़ी उर्दू सेंटर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बच्चों ने देशभक्ति के गीतों एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।कार्यक्रम के दौरान उर्दू अकादमी, दिल्ली द्वारा संचालित उर्दू ख़्वांदगी मरकज़-2025 में सफल रहने वाले बच्चों को प्रमाण-पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। समारोह का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के माध्यम से बच्चों और समाज के लोगों में देशप्रेम, राष्ट्रीय एकता, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की भावना को और मजबूत करना था।
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