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समाज शास्त्रीय चिंतन मजबूत करने की जरूरत : डॉ.जी एल.शर्मा

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० आशा पटेल ०  जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से प्रख्यात समाजशास्त्री प्रो. एन. के. सिंघी की स्मृति में 'समकालीन भारत में बदलते सामाजिक मुद्दों का परिदृश्य' विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जीएल. शर्मा ने आधुनिक समाजशास्त्रीय चिंतन को भारतीय सामाजिक दर्शन से जोड़ते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए।  उन्होंने "वसुधैव कुटुम्बकम", "सर्वे भवन्तु सुखिनः" और "मैं से हम की यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया कि वास्तविक विकास वही है, जिसमें व्यक्ति के साथ समाज और समाज के साथ अंतिम व्यक्ति का कल्याण जुड़ा हो। डॉ. शर्मा ने कहा कि भारत को अपनी सामाजिक समस्याओं और सामाजिक मुद्दों के समाधान के लिए पश्चिम की नकल करने की आवश्यकता नहीं है। हमारे पास अपनी गहरी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा है, जिसके आधार पर भारतीय समाज की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए अपने दृष्टिकोण विकसित किए जा सकते हैं। डॉ. शर्मा ने भारतीय सामाजिक दर्शन और आधुनिक समाजशास्त्रीय चिंतन के बीच संबंध को रे...