जिन जनप्रतिनिधियों को चुना वो आज सवर्णों के दमन पर खामोश है इसलिये हम नये युवा नेतृत्व तैयार करेंगे - सुनील उदेईया
० आशा पटेल ०
जयपुर। सवर्ण समाज का 80 साल से रही विभिन्न सरकारों ने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक ,अंग्रेजी शासन से आजादी की लडाई में तन मन और धन से सर्वाधिक योगदान देने वाले रूप से दमन किया है। राजपूतों ने अपनी सारी रियासतें, वैश्य समाज ने सारा खजाना और ब्राह्मणों ने अपनी मेघा देश के लिये समर्पित कर दी।
संविधान में लिखित शब्द समान अवसर, समान शिक्षा, समान नौकरी, स्वतंत्रता, आजादी शब्द बेमानी और झूठे साबित हो गये है। सवर्ण मेघावी बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है। उच्च नम्बर और मेरिट में होने के बाद भी उनके साथ भेदभाव और अन्याय हो रहा है जो अब असहनीय हो चुका है।सवर्ण समाज पर एससी एसटी एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी और कडा बना कर धन लूटने का जरिया बना दिया गया है जिसमें बेवश और लाचार व्यक्ति इसकी पीडा को बेवजह झेलता है। केस करने के नाम पर मुआवजा राशि देकर एक तरह से सवर्ण उत्पीडन प्रोत्साहन योजना बना दी है। इससे भी मन नहीं भरा तो कॉलेजों में पढने वाले बच्चों पर यूजीसी आदेश से उत्पीडन और दमन की तलवार लटका कर भय का माहौल बना दिया।
जयपुर। सवर्ण समाज का 80 साल से रही विभिन्न सरकारों ने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक ,अंग्रेजी शासन से आजादी की लडाई में तन मन और धन से सर्वाधिक योगदान देने वाले रूप से दमन किया है। राजपूतों ने अपनी सारी रियासतें, वैश्य समाज ने सारा खजाना और ब्राह्मणों ने अपनी मेघा देश के लिये समर्पित कर दी।
आजादी के बाद सत्ता में रहे हमारे ही लोगों ने कमजोर और गरीब वर्ग के उत्थान के लिये कुछ प्रावधान एक निश्चित अवधि के लिये किये थे लेकिन आज राजनीतिक तुष्टीकरण ने 80 साल में देश में वर्ग संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी है। सवर्णों के सर्वाधिक वोट और टेक्स में भागीदारी के बाद भी सवर्ण बच्चों को सभी वित्तीय और सामाजिक योजनाओं से वंचित कर दिया है। आरक्षण के नाम पर शक्तिशाली जातीय समूहों को बंदरबॉट कर रखी है।
संविधान में लिखित शब्द समान अवसर, समान शिक्षा, समान नौकरी, स्वतंत्रता, आजादी शब्द बेमानी और झूठे साबित हो गये है। सवर्ण मेघावी बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है। उच्च नम्बर और मेरिट में होने के बाद भी उनके साथ भेदभाव और अन्याय हो रहा है जो अब असहनीय हो चुका है।सवर्ण समाज पर एससी एसटी एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी और कडा बना कर धन लूटने का जरिया बना दिया गया है जिसमें बेवश और लाचार व्यक्ति इसकी पीडा को बेवजह झेलता है। केस करने के नाम पर मुआवजा राशि देकर एक तरह से सवर्ण उत्पीडन प्रोत्साहन योजना बना दी है। इससे भी मन नहीं भरा तो कॉलेजों में पढने वाले बच्चों पर यूजीसी आदेश से उत्पीडन और दमन की तलवार लटका कर भय का माहौल बना दिया।
जबकि ऐसी मांग किसी भी वर्ग ने नही की थी। सुप्रीम कोर्ट के स्टे और सख्ती के बाद भी आज तक एक यूजीसी आदेश को सरकार वापिस नहीं ले रही है। इस सब से पूरे देश का सवर्ण वर्ग नाराज है लेकिन सत्ता पक्ष ना विपक्ष इस विषय पर बोल रहा है ना हि चिन्तन कर रहा है। देश के सभी समाज और वर्ग भी अब आपस में लडाकर सत्ता के खेल को समझ चुके है ।
आज दिपल इंजन की सरकार केन्द्र-राज्य-निकाय के बाद भी पूरे प्रदेश में सडकों की हालत बिल्कुल खराब है और गडडे ही गडडे है, मंहगाई चरम पर है, हर वर्ग परेशान है तो फिर वोट देने का क्या फायदा हुआ। जिन जनप्रतिनिधियों को सवर्ण समाज ने तन मन धन देकर चुन कर विधानसभा और लोकसभा में भेजा वो आज सवर्णों के दमन पर मूक बधिर है।
आज दिपल इंजन की सरकार केन्द्र-राज्य-निकाय के बाद भी पूरे प्रदेश में सडकों की हालत बिल्कुल खराब है और गडडे ही गडडे है, मंहगाई चरम पर है, हर वर्ग परेशान है तो फिर वोट देने का क्या फायदा हुआ। जिन जनप्रतिनिधियों को सवर्ण समाज ने तन मन धन देकर चुन कर विधानसभा और लोकसभा में भेजा वो आज सवर्णों के दमन पर मूक बधिर है।
इसलिये राष्ट्रीय सवर्ण दल निकाय चुनाव में उम्मीदवार उतारकर इन विषयों पर मुखर रूप से बोलने वाले युवा नेतृत्व तैयार करेगा और विधानसभा और संसद में अपने एमएलए एमपी तैयार करेंगा जो सवर्ण के मुददों को पुरजोर तरीके से उठायेंगे और इन व्यवस्थाओं में बदलाव करेंगे। जहाँ हमारे उम्मीदवार नही होगें वहाँ नोटा या सभी पार्टियों के बहिष्कार की अपील करेंगे।
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